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मंगलवार, 28 जुलाई 2020

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हकीकत से दूर रख रहे हैं,सूबे के मदारी किस्म के अफसर

सूबे के मदारी किस्म के अफसर ‘मोह’ में कहीं चली न जाये योगी की सत्ता...
सूबे में सरकार चाहे जिस राजनीतिक दल की रहे, परन्तु कुछ अफसरों के मकड़जाल में उलझ कर रह जाती है,सरकार...
मदारी किस्म के अफसरों के चंगुल में फंसते नजर आ रहे हैं,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ...
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले करीब तीन माह से जो स्थिति बनी हुई है, उस पर अंकुश लगने के बजाय उसका दायरा बढ़ता ही जा रहा है। इसके लिए निश्चित रुप से राज्य के कुछ मदारी किस्म के अफसर ही जिम्मेदार हैं। हालांकि वह अफसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘खास’ भी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भोलेपन का लाभ उठाते हुए इन अफसरों ने ही पूरे प्रदेश में ‘अराजकता’ का माहौल फैला रखा है। 

मुख्यमंत्री ने समय रहते इन अफसरों का इलाज न किया तो उन्हें सत्ता से हाथ धोने का खामियाजा भुगतना होगा। ये अफसर ऐसे है जो सूबे में माया, मुलायम और अखिलेश की सरकार में मलाईदार मदों पर बैठकर मलाई चाभी और जब चुनाव हुआ तो पैतारेबांजी के माहिर खिलाड़ियों की तरह जो सरकार सूबे में बनी तो ये चालाक और चतुर अफसर उस सरकार के खास हो गए। ये अफसर चुनाव से पूर्व ही वर्तमान सरकार के प्रति जनता में बने माहौल को भांप लेते हैं और उसी के अनुरूप ये काम करने लगते हैं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह समझना होगा कि कहीं उनके खास अफसर विपक्षी दलों के नेताओं के इशारे पर तो यह सब नहीं कर रहे हैं। अगर ऐसा है तो बेहद गंभीर मामला है। यदि ऐसा नहीं है तो भी इन अफसरों को फौरन उनकी जिम्मेदारी से हटा देना चाहिए, क्योंकि जब वह समस्या का समाधान नहीं कर सकते तो उन्हें जिम्मेदारी देने का कोई लाभ नहीं है। ईमानदारी से बात की जाए तो सूबे में 25फीसदी ऐसे अफसर हैं जिनकी पूरी नौकरी राजधानी लखनऊ में ही कट गई या कट रही है। तवादला हुआ भी तो घूमकर फिर राजधानी लखनऊ में ये जुआड़ वाले अफसर आकर मलाई काटने लगते हैं। 

सूबे में सरकार की बागडोर संभालने वाले सूबे के मुखिया को ये बातें पता होती हैं, फिर भी सूबे के मुखिया इन अफसरों की मकड़जाल से निकल नहीं पातेकानपुर, गोंडा, गोरखपुर और गाजियबाद समेत प्रदेश के अन्य जिलों में हत्या और अपहरण की घटनाओं से पूरे प्रदेश का माहौल खराब हो चुका है। अब तक की रिपोर्टों में साफ हो चुका है कि ऐसी घटनाओं के लिए सीधे तौर पर पुलिस के अधिकारी जिम्मेदार पाये जा रहे हैं। यह पुलिस अफसर यह लापरवाही किसके इशारे पर कर रहे हैं। इस बात को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समझना होगा। जब मंत्री और सांसद सहित विधायकों के सरकारी आवासों में क्रिमिनल्स सोते हों तो उनका उत्तर प्रदेश की पुलिस क्या उखाड़ लेगी ? 

कई बार इनामिया बदमाश भी मंत्री और सांसद एवं विधायक के आवास में पाए गए, परन्तु उन माननीयों के खिलाफ आजतक कुछ भी नहीं हुआ। परन्तु यही अपराधी अभी किसी सामान्य ब्यक्ति के घर से पुलिस बरामद करे तो यही पुलिस उस सामान्य ब्यक्ति का जीना हराम कर देगी और अपराधी को पनाह देने के मुकदमा अलग लिख देगी और उस बदमाश को बाद में जेल भेजेगी, उससे पहले उस सामान्य ब्यक्ति को यही पुलिस जेल भेज देती है। जबतक देश और प्रदेश में ऐसे अपाहिज वाले कानून का बोलबाला रहेगा तबतक उत्तर परदेश में कानून ब्यवस्था को दुरुस्त करने की बात सोचना ही निर्थक और बेईमानी होगी

कानपुर के विकरू और विकास दुबे कांड की जड़ में भी यही अफसर...
उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के विकरू गांव में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और उसके साथियों द्वारा की गयी आठ पुलिसकर्मियों की हत्या, उसके बाद विकास दुबे और उसके पांच अन्य साथियों के इनकाउंटर तक राज्य के अफसरों ने जिस तरह का ड्रामा किया, उससे सरकार की छवि आम जनता के बीच प्रभावित हुई है। राज्य में बेखौफ बदमाश लगातार हत्या और लूट की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। क्या पुलिस का उत्तर प्रदेश में इतना खौफ कम हो गया है ? जबकि जहां के मुख्यमंत्री ने अपराधियों का एनकाउंटर करने की खुली छूट दे रखी है। दरअसल ऐसा नहीं है अपराधियों को लगातार सत्ता से जुड़े लोगों का संरक्षण मिल रहा है। चाहे अफसर हो या फिर सत्ता पक्ष के नेता ! वह लगातार अपराधियों के संपर्क में हैं। जिसके कारण पुलिस का खौफ नहीं बन पा रहा है।

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