पीएम नरेन्द्र मोदी ने देश के नागरिकों को आत्मनिर्भर का मन्त्र बताकर छाड़ लिया पल्ला।

"जनता कर्फ्यू की सफलता से गदगद पीएम मोदी बिना आगे-पीछे विचार किये नोटबंदी की तरह 21 दिनों वाला प्रथम लॉकडाउन का निर्णय और बाद में आत्म निर्भर बनने  और अर्थब्यवस्था को पटरी पर लाने के नाम पर खुली छूट देने से कोरोना वायरस का संक्रमण विश्व में भारत को छठवें पायदान पर पहुँचा दिया है..."
नागरिकों को आत्म निर्भर का ज्ञान देते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 
कोरोना संक्रमण काल में देश के प्रधान सेवक और लोकसभा चुनाव में चौकीदार बने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीच मझधार में देश के नागरिकों को आत्म निर्भर बनने का पाठ पढ़ाकर मरने के लिए छोड़ा...
देश में 24 घंटे में लगभग 10 हजार कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आए, जबकि 287 लोगों की मौत हुई है...
देश में कोरोना संक्रमण के कुल संक्रमित मरीजों की संख्या-247040
 ➤कोरना संक्रमण से भारत में अभी तक हुई मौतें की संख्या - 6946
 ➤कोरोना संक्रमित से एक्टिव मरीजों की संख्या - 121386
 ➤कोरोना के संक्रमण से ठीक हुए मरीजों की संख्या - 11869


 मास्क पहनकर,गमझा लगाकर देश वासियों को कोरोना संक्रमण से लड़ने की प्रेरणा देते पीएम मोदी... 
कोरोना संक्रमण से राज्यों के हालात... 
महाराष्ट्र - कुल संक्रमित मरीज - 82968
तमिलनाडु -कुल संक्रमित मरीज - 30172
दिल्ली - कुल संक्रमित मरीज - 27654 
गुजरात - कुल संक्रमित मरीज - 19617
राजस्थान - कुल संक्रमित मरीज - 10337
उत्तर प्रदेश - कुल संक्रमित मरीज - 10103
मध्यप्रदेश - कुल संक्रमित मरीज - 9228

प्रधान मंत्री राहत कोष के रहते PM CARES FUND के गठन पर उठे सवाल 
देश में कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या में जब बेतहासा बृद्धि हो रही है तब केंद्र की मोदी सरकार देश के नागरिकों को आत्म निर्भर बनने का गुण सूत्र सिखा रही है। जब पेट में भूख लगी हो और सोने के लिए एक अदद खाट और बिछौना भी न हो आत्म निर्भर बनने वाला फार्मूला किसी भी ब्यक्ति के समझ में नहीं आ सकता। परन्तु देश के प्रधान सेवक/चौकीदार की जिद है कि वो ऐसे हालात में भी देश के नागरिकों को आत्म निर्भर बनाकर ही दम लेंगे। देश में मोदी जी के लाखों ऐसे भी अंध भक्त हैं जो दिन को यदि मोदी जी रात कह दें तो वो उसे बिना विचार किये ही मान लेते हैं कि ये रात ही है, क्योंकि ये बात देश के चौकीदार ने कही है बस इसी का फायदा देश के चौकीदार महोदय उठा रहे हैं

 लॉकडाउन के फैसले पर मोदी सरकार से पूँछे जा रहे हैं सवाल...
भारत में कोविड-19 वैश्विक माहामारी कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए केंद्र की मोदी सरकार और राज्यों की सरकारों ने बिना किसी योजना के ही निर्णय लेना शुरू किये और उनके सारे निर्णय आज उल्टे पड़ते दिख रहे हैं। जब विदेशों में कोरोना संक्रमण ने तवाही मचा राखी थी तो देश की मोदी सरकार नमस्ते ट्रंप के आयोजन में मस्त थी और सत्ताधारी दल भाजपा मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान मामाजी की सरकार बनाने में मशगूल थी। मार्च महीने में होली का त्यौहार आया कोरोना संक्रमण की ख़बरें अब तक देश में आ चुकी थी और मौसम भी इस बार होली के रंग में भंग डाल रहा था सो मौसम के मिजाज और कोरोना संक्रमण के भय से इस बार होली का त्यौहार बहुत फीका रहा। कुछ ही दिनों बाद चैत्र मास में पड़ने वाला नवरात्रि का पावन पर्व आ गया । उससे पहले केंद्र की मोदी सरकार कुम्भकर्णी नींद से जाग चुकी थी और जागते ही देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 21 मार्च को शाम 8 बजे देश के न्यूज़ चैनलों पर लाइव होते हैं और टेस्टिंग के तौर पर एक दिन पूरे देश में जनता कर्फ्यू की घोषणा कर देते हैं। जनता अपने प्रधानमंत्री की बात को शिरोधार्य करके उसे सफल बना देती है। 


 पीएम मोदी के सामने नहीं है किसी को अपनी बात रखने की हिम्मत 
अब इस सफलता को देश के प्रधानमंत्री जी अपने 11रत्नों के साथ दो दिन तक अध्ययन किये और 24मार्च की शाम 8 बजे 21दिनों के लिए देश भर में लॉकडाउन की घोषणा कर दिए।पूरे देश में इस घोषणा से अफरातफरी मच गई। जनजीवन अस्त ब्यस्त हो गया। ऐसी स्थिति भारत के लोंगो ने कभी देखी न थी। जीवन का पहिया ही थम सा गया। नवरात्रि का पहला दिन और बाजारों में खरीददारी की ऐसी लाइन लगी कि 10रूपये का सामान 30 रुपये तक बिक गया और शासन व प्रशासन देखता रहा। कहीं कहीं स्थानीय प्रशासन ने थोड़ा बहुत दखल दिया पर वो न के बराबर रहा। लोंगो ने किसी तरह 21दिन लॉकडाउन का कार्यकाल ब्यतीत कर लिया,परन्तु स्थिति भयावह बताकर 21दिनों से पूर्व 19दिनों का लॉकडाउन लगाया गया और उसे लॉकडाउन-2 नाम दिया गया। जब लॉकडाउन की अवधि पर देश की जनता सोशल मीडिया मंच पर और देश की मीडिया कुछ लिखना चाहे अथवा बोलना चाहे तो उनके विरुद्ध कोरोना संक्रमण के संदर्भ में अफवाह फ़ैलाने का मुकदमा भी कई थानों में दर्ज किया गया। अब किसकी मजाल थी की राष्ट्रीय आपदा और कोरोना संक्रमण काल में उसके खतरे के संदर्भ में कुछ बोल सके अथवा दो लाइन अपने मन का विचार ब्यक्त कर सके। "मन की बात" तो सिर्फ देश के चौकीदार/प्रधान सेवक ही कर सकते हैं। "मन की बात" करने के लिए उन्होंने "कॉपी राइट" करा रखा है

 ''मन की बात" करने के लिए पीएम मोदी को ही है छूट 
केंद्र की मोदी सरकार का देश में ये लॉकडाउन का पाँचवां टर्म है ढ़ाई माह लगभग होने जा रहा है और आज भी कोरोना वायरस कमजोर नहीं हुआ, बल्कि सरकारें कमजोर हुई हैं। कोरोना संक्रमण की स्थिति आज भयावह होती दिख रही है अभी तक सरकार मौत की दर को कम करके अपनी सफलता का ढिढोरा पीट रही थी और रिकवरी दर भी 45% से 48% के आसपास रहा। पर इन पंद्रह दिनों में तो स्थिति भयवाह होती दिख रही है देश की जागरूक जनता देश और राज्य की सरकारों से सवाल कर रही है कि जब देश में कोरोना संक्रमण के गिने चुने मरीज थे तो देश में कड़ाई के साथ लॉकडाउन लागू किया गया और जब देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति ढ़ाई लाख पहुँचने को है तो देश भर में सबकुछ खोल दिया गया। कितना गैर जिम्मेदाराना वाला कार्य केंद्र की मोदी और राज्य की सरकारें कर रही हैं सरकार को देश की जनता की नहीं पड़ी है, बल्कि सरकार को अपनी कुर्सी की पड़ी है जल्दी-जल्दी आप सब सिर्फ एक काम करो अपना टैक्स भर दो ! क्योंकि सरकार का खजाना खाली हो चुका है जिससे सरकार महीने का लाखों रुपया वेतन, भत्ता, गाड़ी, बंगला का मजा लेने वाले खाली बैठे अधिकारियों और नेताओं को वेतन, पेंशन एवम अन्य सुविधाएं दे सके हाँ, हाँ  इनको कोरोना काल में भी वेतन, भत्ता गाड़ी, बंगला एवं अन्य ठाट बाट में कोई कमी न आने पाए। इस लिए बिना किसी पूँछताँछ बिना कोई सवाल दागे देश की जनता को यही निर्देश सरकार की तरफ से दिया जाता है कि कोरोना वायरस से निडर होकर काम करो और टैक्स भरो ! ताकि सरकार को राजकोषीय संकट से न जूझना पड़े। 

कोरोना संक्रमण काल में दिल्ली सरकार के मुखिया अरविन्द केजरीवाल के निर्णय और जानिये कैसे रही उनके सरकार की स्थिति ?

संवैधानिक पदों पर बैठा ब्यक्ति कैसा दे देता है गैर जिम्मेदार बयान और बेहयाई और वेशर्मी की इन्तहा पार कर देश की जनता के आँखों में झोंकता है धूल...

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
संवैधानिक और जिम्मेदार पदों पर आरूढ़ ब्यक्ति जब अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगे तो समझ लीजिये कि स्थिति ठीक नहीं है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक का इंटरव्यू एक TV न्यूज चैनल पर देख रहा था। जिसे देखकर दिल्ली की जनता के मन ग्लानि जरुर हुई होगी चूंकि राज्य के मुख्यमंत्री से राज्य की जनता को बहुत अपेक्षाएं होती हैं और वो मुख्यमंत्री एक नेता की तरह कुछ भी बोल जाए ये उचित नहीं। सीएम केजरीवाल ने कहा कि कोरोना वायरस "माता का निकास" जिसे चिकित्सकीय भाषा में चेचक कहते हैं। कोविड-19 कोरोना वायरस भी चेचक के समान ही है। उन्होंने समझाया कि जैसे हम लोग छोटे थे। माता का निकास होता था और उस प्रकोप से बचने के लिए पूजा-पाठ कर उनसे अनुनय विनय और क्षमा याचना कर अपने प्रकोप को शांत होने की प्रार्थना की जाती थी। माली बुलाकर माता रानी के गीत सुनाकर उन्हें प्रसन्न किया जाता था। माता का निकास पूजा-पाठ और उनकी श्रद्धा के साथ-साथ उनकी आस्था, विश्वास एवं साफ-सफाई से ठीक हो जाता था। उन्होंने ने यह भी कहा कि दिल्ली में कुछ लोग ही हॉस्पिटल में क्वारन्टीन हैं। बाकी हजारों लोंगो को सरकार ने घर पर ही क्वारन्टीन किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यतानुसार डॉक्टर घर पर जाकर सावधानियों के बारे में बताते हैं। शायद इनके कहनें का आशय यह है कि जैसे माता के निकास पर माली आता था। वैसे डॉक्टर भी आते हैं अर्थात जैसे माली माता की पूजा अर्चना करता था, ठीक उसी प्रकार डॉक्टर भी "कोरोना वायरस" को निकास वाली माता की भाँति पूजा पाठ करता है।

दिल्ली के गैर जिम्मेदार मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल 
दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने बड़े आत्मविश्वास से कहा कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है। किसी अस्पलात में जाने की जरूरत नहीं है। घर में ही क्वारन्टीन रहें। ऐसा करने से कोरोना संक्रमण खुद हार कर अपनी आत्महत्या कर लेगा। लोंगो को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की बातों पर यकीन भी हुआ। वो उनके बताये नुस्खे पर अमल भी किये।परन्तु दूसरी तरफ स्वयं केजरीवाल सरकार ने कोरोना के डर से दिल्ली का बार्डर सील कर दिये। अब दिल्ली की जनता हैरान व परेशान हो उठी। उसे नहीं पता था कि जिसे वो अपना भाग्य विधाता मानकर कुछ लालच में दिल्ली की बागडोर केजरीवाल के हाथ में दी है वह राष्ट्रीय आपदा के काल में भी दोगली बात करके जनता का मजाक उड़ाएगा। उसे मरने के लिए यूँ ही छोड़ देगा। ऐसे ही नेता राजनीति का बाजा बजाते हैं और जनता उस पर भांगड़ा डांस कर जमकर नाचती है।जिस नेता के कथनी एवं करनी में विल्कुल सामंजस न हो और वह जनता की आंख में धूल झोंकने वाला हो ! उस राज्य की जनता का भला कभी हो ही नहीं सकता। चूँकि जनता भी लालच में आकर ऐसे नेता का चुनाव कर सत्ता की चाभी उस वादे को पूरा करने के लिए देती है जो पूरा हो ही नहीं सकता।

भारत में कोरोना की भयावह स्थिति...
अभी तक कोरोना वायरस इतना भयावह था कि लिफ्ट की बटन छूने से हो जाता। सीढ़ी की रेलिंग छूने से हो जाता था। दीवाल छूने से हो जाता था। बर्तन छूने से हो जाता था। टैक्सी/कार/आटो में बैठने से हो जाता था। घर के बाहर झांकने से हो जाता था। अरे ! हम नेता हैं झूठ को सच एवं सच को झूठ बनाना हमारे बाएं हाथ का खेल है। क्योंकि अफवाह फैलाने की हमारे पास मशीन है एवं विभिन्न माध्यम हैं। सीधे-साधे भाईयों हम नेता लोग ऐसे ही कुर्सी पर नहीं पहुँच पाते। इस विद्या को सीखने में सालों साल लग जातें हैं। इसीलिये इस विद्या को बहुत कम लोग ही पूर्णतः सीख पाते हैं। क्योंकि बहुत से बेचारे सीधे लोग भी इस विद्या को सीखने आ जाते हैं, लेकिन पूरी जिंदगी जिंदाबाद एवं मुर्दाबाद में निकल जाती है। लेकिन ये विद्या सीख नहीं पाते। अरे भाइयों ! हम कामयाब नेता एवं पार्टी के पास बड़े-बड़े दिमाग वालो की पूरी टीम रहती है जो प्रतिदिन हम लोंगो को विभिन्न प्रकार की मक्कारी भरी जानकारियां एवं बारीकियां समझाते रहतें हैं और हम नेता लोग देखें नहीं 
कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए ईलाज की ब्यवस्था 
देश की मोदी सरकार और राज्यों की सरकारों ने आम जनता (मजदूर) को कोविड-19 "कोरोना वायरस" नामक बीमारी से इतना डरा और घबड़वा दिया कि चारों ओर हाहाकार फैल गया। भोली-भाली जनता पैदल ही बिना किसी संसाधन के अपने घरों से निकल पड़ी। जरा सा बार्डर और चेकपोस्ट पर पुलिस की सख्ती क्या की वो बेचारे निरीह मजदूर और आम लोग तप अपनी जान की परवाह किये बगैर रेल की पटरी पर पैदल ही चलकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ने लगे कईयों की तो रेल से कटकर मौत भी हो गई घर से निकलने के बाद प्रवासी लोग अपने परिवार में पहुँचने के लिए बेचैन हो रहे थे और सड़को पर कभी पैदल तो कभी जो भी मालवाहक वाहन दिखता और जितने भाड़े में वो तैयार होता तो वो प्रवासी मजदूर उस पर भूंसे की तरह लोग भरकर जाने लगे। उन मजदूरों और असहायों को भोजन और नाश्ते के लिए भी कोई ब्यवस्था न हुई। 

जब देश में राष्ट्रीय आपदा के आपत्तिकाल में सरकार को जनता के प्रति अपना कर्तब्य दिखाने और बजट को खर्च करने की बारी आई तो वह कंगाल हो गई जबकि हकीकत पर गौर फरमाएं तो इन्हीं मजदूरों के नाम पर लंच पैकेट, इनके रहने खाने और अन्य ब्य्वस्थाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट सिर्फ एक जिले से खारिज होकर अधिकारीयों नेताओं और उसकी ब्यवस्था से जुड़े लोगों में ईमानदारीपूर्वक बंट जाएगा और उसका कभी आडिट भी नहीं होगा और न ही खिन शिकायत की ब्यवस्था होगी भूख और प्यास से तड़पते किसी तरह अपने अपने घरों को पहुँच गए और कईयों की जिन्दगी सड़क पर ही दुर्घटना में भेंट चढ़ गयी। चारों तरफ कोहराम मच गया इन सभी घटनाओं को देश की मीडिया ने प्रकाशित भी किया और न्यूज़ चैनलों ने प्रमुखता से अपने-अपने चैनलों पर दिखाया भी, परन्तु सत्ता सुख में मदांध होकर बैठे धृतराष्ट्रों को ये सब दिखा ही नहीं या कह सकते हैं कि देखने के बाद वो इस तरफ ध्यान ही नहीं दिए

  मनीष सिसौदिया उप मुख्यमंत्री,दिल्ली सरकार...
"लॉकडाउन के चलते आर्थिक तंगी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने केंद्र से तुरंत 5 हजार करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आपदा राहत कोष से अन्य राज्यों को केंद्र सरकार से मदद मिली है, लेकिन दिल्ली सरकार को कोई मदद नहीं मिली। टैक्स में आई कमी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने पैसे जुटाने के लिए जो कदम उठाए हैं, उनमें राजधानी में शराब पर 70%तक प्रिंट रेट से अधिक दामों पर उसकी बिक्री कराने का निर्णय लिया और बाद में जग हँसाई शुरू होने पर उसे कम किया कोरोना संक्रमण के संकट से लड़खड़ाई दिल्ली सरकार की अर्थव्यवस्था, दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच केंद्र की मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई। जबकि दिल्ली सरकार ने मई महीने में कोरोना सेस से कमाए 161 करोड़ रुपये। फिर भी केंद्रीय वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) को मनीष सिसौदिया उप मुख्यमंत्री / वित्तमंत्री, दिल्ली सरकार चिट्ठी लिखकर दिल्ली के लिए 5 हज़ार करोड़ रुपए की राशि की मांग की है..."
इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहें ? कोरोना संक्रमण से डर कर दूसरे राज्यों में फंसे असहाय और गरीब लोग जैसे ही येन-केन-प्रकारेण अपने-अपने घर-गांव अपार पीड़ा एवं दुःख के साथ पहुँचे और उनके पैरों  के जख्म  अभी ठीक भी नहीं हुये थे अभी घर के बाहर पेड़ के नीचे क्वारन्टीन होनें के कारण, अपने घर-परिवार, गांव-पड़ोस से भी नहीं मिल पाये थे इसी बीच नेतागीरी में सफल नेताओं ने मजदूरों के पैर के छालों एवं इनके हृदय विदारक दुःख का मजाक उड़ाते हुये, लॉकडाउन-5 लगभग-लगभग ओपेन कर दिया और कुटिल मुस्कान के साथ मन ही मन बोले लो असहाय मजदूरों गांव-घर में बैठकर पश्चाताप करो ! इसीलिये कहता हूं कि कामयाब नेता एवं सत्ताधारी दल कभी भी कुछ भी कर सकता है और कह सकता है। उस पर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं है क्योंकि वो सर्व शक्तिमान है। सत्ता पर काबिज रहते उसका जनता कुछ बिगाड़ नहीं सकती और सत्ता में बने रहते वो अपनी सात पीढ़ी का गुजर बसर शाही अंदाज वाला कर लेता है और फिर उसको चुनने वाली जनता सिर्फ और सिर्फ हाथ मालती है। 
   
दो माह से अधिक समय हो गया और आज भी कोरोना वायरस कमजोर नहीं हुआ, बल्कि सरकारें कमजोर हुई हैं। कोरोना संक्रमण की स्थिति आज भयावह होती दिख रही है जब देश में कोरोना संक्रमण के गिने चुने मरीज थे तो देश में कड़ाई के साथ लॉकडाउन लागू किया गया और जब देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति ढ़ाई लाख पहुँचने को है तो देश भर में सबकुछ खोल दिया गया। कितना गैर जिम्मेदाराना वाला कार्य केंद्र की मोदी और राज्य की सरकारें कर रही हैं सरकार को देश की जनता की नहीं पड़ी है, बल्कि सरकार को अपनी कुर्सी की पड़ी है जल्दी-जल्दी आप सब सिर्फ एक काम करो अपना टैक्स भर दो ! क्योंकि सरकार का खजाना खाली हो चुका है जिससे सरकार महीने का लाखों रुपया वेतन, भत्ता, गाड़ी, बंगला का मजा लेने वाले खाली बैठे अधिकारियों और नेताओं को वेतन, पेंशन एवम अन्य सुविधाएं दे सके हाँ, हाँ  इनको कोरोना काल में भी वेतन, भत्ता गाड़ी, बंगला एवं अन्य ठाट बाट में कोई कमी न आने पाए। इस लिए बिना किसी पूँछताँछ बिना कोई सवाल दागे देश की जनता को यही निर्देश सरकार की तरफ से दिया जाता है कि कोरोना वायरस से निडर होकर काम करो और टैक्स भरो ! ताकि सरकार को राजकोषीय संकट से न जूझना पड़े। 

आज मैं देश की भोली भाली और लालची जनता से एक सीधा साधा सवाल करना चाहता हूँ कि पूरे देश में कोरोना वायरस के संक्रमण से बहुत से डॉक्टर ईलाज करते हुए मर गये, बहुत से पुलिस वाले अपने कर्तब्य निर्वहन करते मर गये, बहुत सी आम जनता दवा के अभाव में मर गई ! परन्तु भारत देश में क्या कोई नेता भी कोरोना वायरस के संक्रमण से अभी तक मरा ? शायद ! नहीं मरा, विल्कुल मर ही नहीं सकता ! क्योंकि नेता हिम्मती होते हैं, निडर हैं और उनमें राष्ट्रीय आपदा जैसे बजट को खाकर पचा जाने की हिम्मत और कूबत होती है इसलिए भारत के नेता कोरोना संक्रमण क्या किसी भी संक्रमण से मर नहीं सकते ! आम जनता से सरकार की तरफ से अपील है कि वो मास्क पहनें, एक दूसरे से दूरी बनाकर रहें, बार-बार अपने हाथ को साबुन से धोये अथवा सेनेटाईजर का प्रयोग करें ! साथ ही सरकार जो आदेश निर्देश जारी करे, उसका शत प्रतिशत अनुपालन करें ! देश की जनता का यही दायित्व है इससे विमुख कदापि न हो !

कोविड-19 के संक्रमित मरीजों की संख्या भारत में अब 2 लाख, 35 हजार, 544 हुई

कोरोना संक्रमण से राज्यों के हालात... 
 ➤कोरना संक्रमण से भारत में अभी तक 6637मौतें हुई...
 ➤कोरोना संक्रमित से एक्टिव मरीजों की संख्या-116138
 ➤कोरोना के संक्रमण से ठीक हुए मरीजों की संख्या-112757

देश में कोविड-19 का संक्रमण...
●  हरियाणा, कुल संक्रमित-3557
अनलॉक-1 की शुरुआत हरियाणा के लिए बेहद खराब रही। जन-जीवन तो पटरी पर लौटा, लेकिन कोरोना संक्रमण की गति तीन गुना बढ़ गई। मात्र 4 दिन में ही एक हजार से ज्यादा संक्रमित मिले। पिछले 96 घंटे में प्रदेश में 1028 संक्रमित मिले हैं। यानि हर पांचवें मिनट में एक कोरोना संक्रमित की पुष्टि हो रही है। लगातार बढ़ रहे संक्रमण के ग्राफ से मृत्युदर में इजाफा हो रहा है। प्रदेश में 26 मौतों से मृत्युदर 0.71 फीसदी पर पहुंच चुकी है। प्रदेश में 15 मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है। 12 मरीजों की सांसें आक्सीजन के सहारे चल रही हैं तो 3 वेंटीलेटर पर हैं। 

● दिल्ली, कुल संक्रमित-26,334
राजधानी में कोरोना संक्रमितों की संख्या 25004 के पार पहुंची। गुरुवार को दिल्ली सरकार के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार 24 घंटे में 1359 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या 25004 पहुंच गई। वहीं, पिछले 24 घंटे में 22 मौते हुई है। वहीं, अन्य 22 मौते 3 अप्रैल से 1 जून तक हुई है। जिनकी केस सीट देखकर डेथ ऑडिट कमेटी ने उनकी मौत कोरोना से होने की पुष्टि की है। इसके साथ ही 44 नई मौते जुड़ने से अब तक कुल मौतों की संख्या 650 पहुंच गई है। वहीं, 356 मरीज ठीक/डिस्चार्ज/माइग्रेट होने के साथ अब तक कुल 10315 पहुँच गई है। 

● महाराष्ट्र; कुल संक्रमित- 80229
राज्य में पिछले 24 घंटे में 2933 नए केस मिले, जबकि 123 मरीजों की मौत हुई। देश के कुल 2 लाख 17 हजार 967 केसों में से 35% मरीज सिर्फ महाराष्ट्र में हैं। 1 जून से 4 जून के बीच एक्टिव कोविड-19 मरीजों में 11.29% का इजाफा हुआ है। 

● राजस्थान; कुल संक्रमित- 9934
राज्य में शुक्रवार को 68 नए केस सामने आए। इनमें झालावाड़ में 23, भरतपुर में 20, जयपुर में 16, बारां में 4, कोटा में 2 और सवाई माधोपुर में 1 मरीज मिला है। वहीं, 2 दूसरे राज्य से आए व्यक्ति भी संक्रमित मिले हैं। इस तरह राज्य में अब तक 9934 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, अब तक संक्रमण से 213 की जान जा चुकी है।

● मध्यप्रदेश-कुल संक्रमित- 8762
देश में मध्य प्रदेश संक्रमितों के मामलों में छठवें से सातवें नंबर पर आ गया है। पहले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश आगे थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश में संक्रमितों की संख्या में इजाफा हुआ। उसने मध्य प्रदेश को पीछे छोड़ दिया। राज्य में संक्रमितों की संख्या 8762 हो गई है।

● उत्तर प्रदेश- कुल संक्रमितों की संख्या 9733
राज्य में बीते 24 घंटे में 371 नए मरीज मिले, जबकि 15 की मौत हुई। अब कुल संक्रमितों की संख्या 9733 पहुँच चुकी है। इस बीमारी से राज्य में 245 मरीजों की जान जा चुकी है।

● बिहार संक्रमित-4598
बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4598 हो गई है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 126 नए मरीज मिले हैं और तीन लोगों ने दम तोड़ दिया। राज्य में अब तक 88313 सैंपल की जांच हो चुकी है। करीब 21 लाख प्रवासी मजदूर बिहार आ चुके हैं और इनमें से 11 लाख लोग क्वारैंटाइन पीरियड पूरा कर अपने घर लौट चुके हैं।

उक्त आंकड़े सरकारी वेबसाइट से https://www.covid19india.org  5 जून रात 7:50 पर लिए गए है।

इस पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण की सुरक्षा हेतु एक सुन्दर सन्देश।

पर्यावरण दिवस मनाये जाने का कारण और इसका संदेश...!!!
क्या प्रकृति का कहर है कोरोना वायरस और चक्रवाती तूफ़ान जैसी राष्ट्रीय आपदाएं...???

पर्यावरण की रक्षा से ही प्रकृति सुरक्षित रह सकेगी...
विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई। यहां 1972 में पहली बार पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें 119 देशों ने भाग लिया था। हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य कारण है व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति सचेत करने का। हम मनुष्यों और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है। विश्व में लगातार वातावरण दूषित हो रहा है,जिसका गहरा प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ रहा है। जिसका भंयकर परिणाम है कोरोना वायरस,जिससे पूरा विश्व ग्रसित हो चूका है, जोकि लगातार मानव का हनन किये जा रहा है और वहीं दूसरी तरफ चक्रवाती तूफान जैसे अम्फान और निसर्ग का उठाना और विध्वंस फैलाना,ये प्रकृति का ही कहर है जो की हमे चेतावनी दे रहा है कि मानव अब तो सुधर जाओ, अब तो अपनी मानवता की खोखली हो चुकी उस गन्दी सोच को बदलो, अपने धर्मं का झूठा डंका बजाना छोड़ो और अपनी विचारो के गिरते स्तर को उठाओ।

अभी ज्यादा दिनो की बात नहीं है वो गर्भवती हाथी की शर्मनाक घटना का घटना वो भी इस महामारी के समय, कहा गए धर्मं का प्रचार करने वाले सभी ढोंगी जिन्होंने उस कुक्रिया पर एक भी शब्द नहीं बोला, कहा गए मानवता का दिखावा करने वाले सभी महापुरुष, कुछ लोग जागे और एक पोस्ट लिखकर खत्म कर दिए अपने अन्दर की मानवता को , जब तक हम सभी मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं, पक्षियों को सामान आधिकार नहीं देंगे तब तक प्रकृति अपना ऐसा ही कहर ढाती रहेगी। प्रकृति के लिए उसकी सभी संताने सामान है चाहे वो पशु हो,पक्षी हो या मानव हो और यदि उसके किसी भी संतान के जीवन पर संकट आएगा तो उसका प्रकोप पूरा विश्व सहेगा।

पर्यावरण से जुड़ा सुन्दर सन्देश...!!!


विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

मानवों को यह मानसिकता छोड़ देनी चाहिए की यह पूरे विश्व में वाही वास करते हैं, जितना आधिकार हमारा इस संसार में,उतना ही पशु,पक्षियों का भी तो आइये इस दिवस हम सभी एक प्राण ले- हम अपनी जननी प्रकृति की सुरक्षा करेंगे, हम अपने वन जीवों और पक्षियों की सुरक्षा करेंगे,हम अपने मतलब के लिए इन्हें कभी कष्ट नहीं देंगे, हम इनके रहने की जगह को नहीं नष्ट करेंगे और अपने पर्यावरण को और भी ज्यादा शुद्ध करने के लिए वृक्षारोपण करेंगे जिससे हमारी अगली पीढ़ी भी शुद्ध वातावरण में स्वास ले सके।


कुछ शब्द पर्यावरण पर...


"इस पर्यावरण दिवस पर एक खास सन्देश फैलाना है,
मानवों को प्रकृति के महत्व को समझाना है,
कोरोना और चक्रवाती तूफानों से अपने देश को बचाना है,
हम सभी को इस पर्यावरण दिवस मिलके वृक्ष लगाना है,
अपनी सोई हुई मानवता को हमे फिर से जगाना हैं,
पशु,पक्षियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमे अपने कंधो पर उठाना है,
पर्यावरण दिवस के मौके पर हमको यह सौगंध खाना है,
प्रकृति की सुरक्षा में सबको मिलके हाथ बटाना है,
धर्मवाद को छोड़ हमे अपनी मानवता को दिखाना है,
तिरंगे की शान को पूरे विश्व में फैलाना है l"

इतिहास के इस पन्ने को आज पढ़ना, याद करना बहुत जरूरी है...

तियानमेन चौक नरसंहारः जब चीनी सेना ने 10,000 प्रदर्शनकारियों को टैंकों से कुचल डाला था 

वामपंथी दल आज़ादी के बाद विकसित अपनी वह छवि नहीं बचा पाए हैं, जिसमें उन्हें सत्ता का सबसे प्रतिबद्ध वैचारिक प्रतिपक्ष माना जाता था । वे परिस्थितियों के नाम पर कभी इस तो कभी उस बड़ी पार्टी की पालकी के कहार की भूमिका में दिखने लगे। 

सीताराम येचुरी (फोटो: पीटीआई) 

जून 1989 की एक शाम सीताराम येचुरी जेएनयू पहुंचा था
 उसके पास तत्कालीन चीन सरकार द्वारा तैयार की गई एक फिल्म का कैसेट भी था उस फिल्म में यह सिद्ध करने का पैशाचिक प्रयास किया गया था कि 4 जून 1989 को चीन की राजधानी बीजिंग के थ्येनमान चौक में चीन की सेना द्वारा मशीनगनों से भून दिए गए टैंकों से रौंद दिए गए छात्र एवं नागरिक बुर्जुआ अपराधी थे और अमेरिका की सीआईए के एजेंट थे। सीताराम येचुरी उस फिल्म के सहारे जेएनयू के छात्रों को यही समझाने के लिए जेएनयू पहुंचा था लेकिन थ्येनमान चौक पर चीन की सरकार द्वारा सेना से कराए गए उस नरसंहार से पूरा देश तब तक परिचित हो चुका था अतः जेएनयू के वामपंथी लफंगों के खिलाफ़ शेष छात्र एकजुट हो गए थे। छात्रों ने वह फिल्म देखने से मना कर दिया था और येचुरी को मेस में बंद कर के उससे सवाल जवाब शुरू किए थे येचुरी लगभग पूरी रात मेस में छात्रों के कब्जे में रहा और उनके तीखे सवालों को झेलता रहा सवेरे जैसे तैसे वहां से निकल पाया था

चीन का थ्येनमान चौक जहाँ हुआ नरसंहार...

आज उपरोक्त घटना की चर्चा इसलिए क्यों आज 4 जून है और आज उन दस हजार चीनी छात्रों और चीनी नागरिकों की इकतीसवीं पुण्यतिथि है जिन्हें तत्कालीन चीन सरकार ने राजधानी बीजिंग की सड़कों पर मौत के घाट उतार दिया था, लेकिन भारत में चीन के दलाल कम्युनिस्ट उस नरसंहार को सही तथा मौत के घाट उतरे लोगों को गलत सिद्ध करने में जुटे हुए थे। नयी पीढ़ी सम्भवतः न परिचित हो ! इसलिए 31 वर्ष पूर्व बीजिंग की सड़कों पर आज ही के दिन हुए उस नरसंहार का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कर रहा हूं। 4 जून 1989 को चीन की राजधानी बीजिंग में चीन की सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बंदूकों और टैंकों से कार्रवाई की थी बीजिंग में कम्युनिस्ट पार्टी ने लोकतांत्रिक सुधारों की मांग करने वाले छात्रों और मजदूरों के प्रदर्शन को कुचलने के लिए टैंक भेजे थे चीन की सेना ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर बंदूकों और टैंकों से कार्रवाई की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए इसे इतिहास में ‘थ्येनमान स्क्वायर नरसंहार’ के तौर पर जाना जाता है


4 जून, 1989 को चीन के थ्येनमान चौक में प्रदर्शन छात्रों का हुआ था,प्रदर्शन 
वर्ष-1989 में कम्युनिस्ट पार्टी के उदारवादी नेता हू याओबैंग की मौत के खिलाफ छात्रों ने थ्येनमान चौक में प्रदर्शन शुरू किया था। याओबैंग देश में लोकतांत्रिक सुधार की बात करते थे। उनके अंतिम संस्कार में करीब एक लाख लोग शामिल हुए थे। उनकी संदिग्ध मौत/हत्या के बाद तीन दिन तक लोगों सड़कों पर जमा थे। बीजिंग में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया था थ्येनमान चौक पर 3 और 4 जून, 1989 को सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरू हो गए थे चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने प्रदर्शन का निर्दयतापूर्ण दमन करते हुए भयंकर नरसंहार किया था चीनी सेना ने मशीनगनों और टैंकरों के ज़रिये शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे दस हजार से अधिक नि:शस्त्र नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था। थ्येनमान चौक नरसंहार को दुनिया के सबसे नृशंस नरसंहारों में से एक माना जाता है। उस नरसंहार के करीब तीन दशक बाद, आज भी चीन की कम्युनिस्ट सरकार इस विषय पर किसी भी तरह की बहस, उल्लेख वगैरह की मंज़ूरी नहीं देती पाठ्यपुस्तकों एवं मीडिया में घटना के उल्लेख की मंज़ूरी नहीं है और इंटरनेट पर इससे जुड़ी सूचना प्रतिबंधित है। हद तो यह है कि छात्रों का सबसे बड़ा शुभचिंतक होने का दावा करने वाले जेएनयू के वामपंथी लफंगे भी उस नरसंहार की चर्चा को प्रतिबंधित किए हैं

प्रदर्शनकारियों पर बर्बर कार्रवाई को जायज ठहराता रहा है,चीन...

दुनिया भर में भले ही इस नरसंहार की आलोचना होती हो लेकिन चीन की सरकार और प्रशासन 04 जून, 1989 को निर्दोश लोगों पर की गई सैन्‍य कार्रवाई को सही ठहराता है। चीन के रक्षा मंत्री भी साल 1989 में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को तत्‍कालीन सरकार की सही नीति करार चुके हैं। जनरल वेई फेंगहे ने सिंगापुर में क्षेत्रीय सुरक्षा के एक फोरम में इस घटना को राजनीतिक अस्थिरता करार दिया था। उन्‍होंने कहा था कि तत्‍कालीन सरकार ने इस सियासी संकट को रोकने के लिए जो कदम उठाए थे वो सही थे। जबकि अमेरिका समेत पूरी दुनिया में चीनी सेना की इस बर्बर कार्रवाई की निंदा की जाती है।

निर्दोष लोगों पर चीनी सेना ने दौड़ाए थे,टैंक...

04 जून, 1989 को मानव सभ्‍यता के इतिहास में काले दिन के तौर पर जाना जाएगा। इस दिन कम्युनिस्ट पार्टी के उदारवादी नेता हू याओबैंग की हत्‍या या मौत के विरोध में हजारों छात्र बीजिंग के तियानमेन चौक पर प्रदर्शन कर रहे थे। कहते हैं कि तीन और चार जून की दरम्यानी रात को लोकतंत्र के समर्थकों पर चीन की कम्‍यूनिष्‍ट सरकार ने ऐसा कहर बरपाया जिसने इतिहास में काले अध्‍याय के तौर पर जगह बनाई। चीनी सेना ने निर्दोष लोगों पर फायरिंग की और उन पर टैंक दौड़ाए। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे जबकि एक ब्रिटिश खुफिया राजनयिक दस्तावेज में कहा गया है कि इस नरसंहार में 10 हजार लोगों की मौत हुई थी।

योगी सरकार पर भारी एमिटी यूनिवर्सिटी के अधिकारी


एमिटी की मनमानी से विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी।
एमिटी यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा छात्रों पर 5% बढोत्तरी के साथ 23 जून तक फीस जमा करने हेतु बढ़ाया गया दबाव।

 एमिटी विश्वविद्यालय,लखनऊ 
लखनऊ:- उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तमाम घोषणाओं के बावजूद एमिटी ला कालेज व उनके प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह सरकार पर भारी पड़कर कोरोना संकट काल में भी 5% फीस बढ़ाकर उसे हर हाल में 11 जून तक जमा करने के लिए अपने विद्यार्थियों पर जबरदस्त दबाव बना रहे हैं।

जानकारी के अनुसार यूजीसी अपने एक दिशानिर्देश में सभी शिक्षण संस्थानों  कहा था कि वे अभिभावकों पर फीस जमा करने को लेकर दबाव न बनाएं अथवा जरूरत पड़ने पर छात्रों को किस्त के रूप में फीस जमा करने की अनुमति प्रदान की जाए इसके अलावा यूजीसी ने यह भी कहा था कि हर विश्वविद्यालय एक पोर्टल की स्थापना करेगा और एक टास्क फोर्स भी गठित करेगा जोकि छात्रों को हो रही समस्याओं का निवारण निकालेगी। यह भी बता दें कि सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि कोरोना संकट काल व लॉक डाउन से उतपन्न परिस्थिति में फीस वृद्धि न कि जाए परन्तु इसका विपरीत देखने को मिल रहा है जहां पर एक वैश्विक महामारी के चलते के चलते छात्रों और अभिभावकों के ऊपर लाखों रुपए की फीस को जमा करने हेतु एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रशासन द्वारा, दबाव डाला जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किया गया यह काम यूजीसी के दिशानिर्देशों के विपरीत है। 


एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ की मनमानी...
संस्थान की उच्च अधिकारी तक एप्लीकेशन द्वारा अपनी समस्याओं को छात्रों ने बताया परंतु उसका निवारण अभी तक नहीं निकला है और लाखों की फीस जमा करने की आखिरी तिथि 23 जून घोषित कर दी गई है जोकि सरासर मनमानी। इसी संबंध में एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ के छात्रों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है और वह यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा दी गई मौखिक दिलासे का विश्वास नहीं करते है। अतः हम जानते है कि पूरे उत्तर प्रदेश में आपका अखबार सबसे अधिक पढ़ी जाती है। इसलिए हम अपनी समस्याएं प्रकाशित करवाना चाहते हैं। ताकि साशन एवं प्रशासन इसका संज्ञान लेकर छात्रों के अधिकारों की रक्षा करे। इस संदर्भ में बात करने पर एमिटी प्रशासन ने कोई भी स्पष्ट जवाब नही दिया जबकि उनके अकाउंट सेक्शन को मीडिया का फोन उठाने तक का समय नही मिला।

मानवीय मूल्यों का हो रहा है हर पल ह्रास


"देख तेरे इंसान की हालत क्या हो गई भगवान...
कितना बदल गया इंसान..." 

 प्यास से ब्याकुल जल ग्रहण करती हथिनी... 
भारत में केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकलती है। उसे अनानास फल खाने के लिए प्रेरित किया जाता है। वह मनुष्य पर भरोसा करके अनानास फल खा लेती है। वह नहीं जानती थी कि उसे पटाख़ों से भरा अनानास खिलाया जा रहा है। पटाख़े उसके मुँह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह चोटिल हो जाते हैं। मुँह में इतने जख्म हो गए कि घायल हथिनी उन ज़ख्मों की वजह से कुछ खा नहीं पा रही थी। संयोग से उसके पेट में गर्भ था। गर्भ के दौरान भूख अधिक लगती है। उसे अपने पेट में पल रहे बच्चे का भी ख्याल रखना था। लेकिन मुँह में ज़ख्म की वजह से वह कुछ खा नहीं पाती हैभारत में जानवरों से प्रेम करने की प्रेरणा फिल्मों में दिखाया गया है ताकि लोगों में मनुष्यता कायम रहे और वो अपने साथ जानवरों से भी प्रेम करना सीखे। फिल्म हाथी मेरे साथी में हाथी और मनुष्य के प्रेम का चित्रण इसीलिए किया गया कि मनुष्य जानवरों के साथ प्रेम करना सीखे। 

नफ़रत की दुनिया को छोड़ के प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार, इस झूठ की नगरी से तोड़ के नाता जा प्यारे अमर रहे तेरा प्यार...

घायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हुई सड़कों पर भटकती रही। इसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुक़सान नहीं पहुँचाई, कोई घर नहीं तोड़ी। अपनी ब्याकुलता और प्यास से तड़पते हुए हथिनी पानी की खोज में  नदी तक जा पहुँचती है। पटाखों के बारूद से मुँह में जो आग महसूस हो रही होगी, उसे बुझाने का यही उपाय हथिनी को सूझा होगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जब इस घटना के बारे में पता चलता है तो वे उसे पानी से बाहर लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हथिनी को शायद समझ आ गया था कि उसका अंत अति निकट है और कुछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही वह दम तोड़ देती है। फिर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिसर अपनी टीम के साथ हथिनी के शव को बाहर निकालते हैं और उसका अंतिम संस्कार कराते हैं

दम तोड़ने के बाद हथिनी को बाहर निकालते फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिसर
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जिस ऑफिसर के सामने यह घटना घटी, उस ऑफिसर के अन्दर मानवीय संवेदनाएं जीवत थी, सो उन्होंने दुःख और बेचैनी में हथिनी के साथ घटित घटना से द्रवित होकर उसके बारे में अपनी फेसबुक पर पूरी दास्तान लिखा। जिसके बाद यह बात मीडिया में आई। पढ़े-लिखे मनुष्यों की सारी मानवीयता क्या सिर्फ मनुष्य के लिए ही हैं ? ख़ैर पूरी तरह तो मनुष्यों के लिए भी नहीं। हमारी प्रजाति में तो गर्भवती स्त्री को भी मार देना कोई नई बात नहीं। इन पढ़े-लिखे लोगों से बेहतर तो वे आदिवासी हैं, जो जंगलों को बचाने के लिए अपनी जान लगा देते हैं। जंगलों से प्रेम करना जानते हैं। जानवरों से प्रेम करना जानते हैं। अधिक पढ़े-लिखे लोगों में मानवीय मूल्यों का जिस तरह ह्रास हो रहा है उसी का परिणाम है कोविड-19 कोरोना संक्रमण। मरने के बाद घर परिवार, नात रिश्तेदार, सगे सम्बन्धी भी आगे नहीं आ रहा है। मृत शरीर को वो लोग भी हाथ लगाने से कतरा रहे हैं जो कल तक उसी जीवित शरीर से प्यार करते थे और उसी की कमाई खाते थे। 

 गर्भवती हथिनी के मृत होने के बाद पेट से निकला उसका बच्चा...
वह ख़बर ज़्यादा पुरानी नहीं हुई है जब अमेज़न के जंगल जले। इन जंगलों में जाने कितने जीव मरे होंगे। ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों ऊँट मार दिए गए, यह कहकर कि वे ज़्यादा पानी पीते हैं। कितने ही जानवर मनुष्य के स्वार्थ की भेंट चढ़ते हैं। भारत में हाथियों की कुल संख्या 20000 से 25000 के बीच है। भारतीय हाथी को विलुप्तप्राय जाति के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। एक ऐसा जानवर जो किसी ज़माने में राजाओं की शान होता था आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। धरती का एक बुद्धिमान, समझदार याद्दाश्त में सबसे तेज़, शाकाहारी जीव क्या बिगाड़ रहा है हमारा जो हम उसके साथ ऐसा सलूक कर रहे हैं ? कोरोना ने हम इंसानों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। यह बता दिया है कि हमने प्रकृति के दोहन में हर सीमा लाँघ दी है। लेकिन अब भी हमें अक्ल नहीं आई। हमारी क्रूरता नहीं गई। मनुष्य इस धरती का सबसे क्रूर और स्वार्थी प्राणी है। इससे अधिक कुछ कहना ब्यर्थ है।