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बुधवार, 15 जुलाई 2020

राजनीतिक दलों में, सचिन पायलट जैसे कार्यकर्ताओं के काम का नहीं किया जाता, मूल्यांकन

दोहरे मापदंड से आहत होकर ही कोई जुझारू नेता पार्टी के विरोध में विगुल बजाता है...
सचिन पायलट पूर्व उप मुख्यमंत्री,राजस्थान...
सचिन पायलट अच्छे एवं सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उभरते हुए युवा नेता हैं। उन्होने परिश्रम से अपने को प्रमाणित किया है। नेता कह रहे हैं कि सचिन पायलट को कम उम्र में बहुत कुछ मिल गया है, इसलिए उनकी महत्वाकांक्षा बढ गयी हैं। नेता ऐसे ही बताते हैं। यही बताते हैं कि उन्होंने कार्यकर्ता को क्या-क्या दिया है ? वह, यह कभी नहीं बताते कि कार्यकर्ता ने क्या-क्या किया है  नेता कार्यकर्ता के लिए तभी कुछ करता है, जब वह सत्ता में होता है। ना जाने क्या, क्या करके वह नेता को सत्ता में ले आता है।इसके बाद नेता उस सत्ता की पावर से कार्यकर्ता के लिए कुछ करता है तो उसे एहसान या उपकार बताता है। बिल्कुल उसी तरह जैसे सचिन पायलट को बताया जा रहा है।
     
पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद, सचिन को कमान दी गयी कि वह सत्तारूढ़ दल से संघर्ष करें, लाठी खाएं, जेल जांय,उनके लोग प्रताड़ित हों और परिश्रम करके पार्टी को पुनः सत्ता में ले आवें। यदि सचिन परिश्रम न करते तो पार्टी की जीत न होती और सरकार भी कांग्रेस की न बनती। सरकार नहीं बनती तो क्या नेता उप मुख्यमंत्री बना देते। इसी तरह जब नेता सत्ता में नहीं होता तो कार्यकर्ता संघर्ष करता है प्रताड़ित होता हैस्वयं धूल और धूप फांकता है और नेता को मंच पर बैठाता है। गला फाड़-फाड़ कर जिन्दाबाद के नारे लगाता है। प्रत्येक नुक्कड़, चौराहे और अंत में बूथ पर लड़ता है। इस अथक संघर्ष के बाद जब नेता जीत जाता है तो वह कार्यकर्ता की समीक्षा करता है, उसको त्याग, समाज सेवा, राष्ट्र भक्ति और निष्ठा के आदर्श समझाता है।
     
सत्ता पाने के लिए हर तरह का समझौता करने के लिए लालायित नेता, कार्यकर्ता को वफादारी की सीख देता रहता है। लगभग सभी दलों के कार्यकर्ताओं की यही स्थिति है और उनके नेताओं का लगभग यही रवैया होता है। मेरी समझ के अनुसार सभी नेता, कार्यकर्ता को तभी तक अहमियत देते हैं, जब तक उसकी, अपने गांव समाज में पूंछ होती है। जब कार्यकर्ता अपने लोगों का काम नहीं करा पाता तो लोगों के बीच उसकी अहमियत घट जाती है। इसके बाद नेता, उसकी इमेज को ठीक करने में कोई मदद नहीं करता, बल्कि उसका विकल्प ढूंढने लगता है।
     
कार्यकर्ता फिर से शुरू करता है और अपने स्वाभिमान के लिए लड़ता है। नेता को सिर्फ चुनाव जिताने वाले सहयोगियों की जरूरत होती है। इसीलिए राजनीतिक दल, गठबंधन करते हैं और नेता दल-बदल करते हैं। राजनीतिक कार्यकर्ता होने के नाते मेरी शुभकामना और समर्थन जुझारू, संघर्षशील युवा नेता सचिन पायलट के लिए है। शुभम भूयात्।

प्रस्तुति : - अनिल तिवारी

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