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शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

सीडीओ प्रतापगढ़ के पद पर लगातार आईएएस की तैनाती होती रही,परन्तु नहीं कम हुआ विकास भवन और ब्लाक मुख्यालय पर भ्रष्टाचार

जहाँ से बहती है विकास की गंगा,वहीं से शुरू होता है विकास के लिए आवंटित बजट में खेल...
विकास भवन, प्रतापगढ़ में विकास के लिए आवंटित बजट में पड़ जाती है,डकैती...
शासन की ब्यवस्था के तहत एक जिले में जिलाधिकारी ही जिला का आलामालिक होता है
। डीएम के सहयोग हेतु  कई तरह के हैंड्स शासन जिलाधिकारी को उपलब्ध कराता है। उसी हैंड्स में मुख्य विकास अधिकारी भी होता है जो जिले में विकास की योजनाओं को शासन की मंशानुसार उसका क्रियान्वयन कराता है। जिलाधिकारी के बाद मुख्य विकास अधिकारी का ही जिले में रोल होता है। उसके बाद अपर जिलाधिकारी और मुख्य राजस्व अधिकारी का रोल होता है। प्रतापगढ़ जनपद में कुल 17 ब्लाक मुख्यालय हैं और पाँच तहसीलें हैं। 

विकास योजनाओं का क्रियान्वयन ब्लाक मुख्यालय के माध्यम से ही संभव होता है। प्रतापगढ़ जनपद में मुख्य विकास अधिकारी की कुर्सी पर कई बार आईएएस को बैठाया गया। आई ए एस को मुख्य विकास अधिकारी बनाने के पीछे का मकसद सिर्फ और सिर्फ यही होता है कि बाद में उस आई ए एस को जब जिलाधिकारी के रूप में किसी जिले में तैनाती दी जाए तो वह विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर ढंग से जानता व समझता रहे। एक आई ए एस जो पहली तैनाती सीडीओ के रूप में पाता है तो शासन और जनता उससे ईमानदारी के साथ कार्य करने की अपेक्षा रखती है। ऐसी अपेक्षा रखनी भी चाहिए। 

हालांकि जनपद प्रतापगढ़ की बात करें तो में विअगत कई वर्षों से मुख्य विकास अधिकारी की कुर्सी पर लगातार आईएएस अधिकारी को तैनात किया जाता रहा है। बीच में सिर्फ एक सीनियर पीसीएस डी पी सिंह की पोस्टिंग प्रतापगढ़ की गई नहीं तो मनीष वर्मा से लेकर महेंद्र बहादुर सिंह, राजकमल यादव, अमित पाल शर्मा और बिना पदभार ग्रहण करने वाले विपिन जैन सभी आई ए एस ही रहे। इस सभी अधिकारियों से प्रतापगढ़ की जनता उम्मीद लगाए बैठी थी कि ये आईएएस हैं। ये ईमानदार होंगे। जिला का विकास बेहतर ढंग से करने का प्रयास करेंगे। परन्तु कोई भी अधिकारी जनता के नजरों में फिट न बैठ सका 

इसके पहले CDO प्रतापगढ़ अमित पाल शर्मा भी आईएएस रहे। शुरुआत में कुर्सी संभालते ही बहुत तेजी से कार्य निपटाना शुरू किये। परन्तु ये तेजी कुछ ही दिनों में धीमी पड़ गई। जिलाधिकारी रहे मार्कण्डेय शाही के आगे उनकी एक न चली। फिर जिले की कमान डॉ रूपेश कुमार के हाथ में आई तो कोरोना संक्रमण काल शुरू हो गया। जिससे सारे कार्य पटरी से उतर गए। अब नए CDO के रूप में विपिन जैन की तैनाती शासन ने की है। प्रतापगढ़ में विकास योजनाओं के बजट में चोरी, लूट नहीं बल्कि डकैती डाली गई है। कई बीडीओ और ADO पंचायत व सेक्रेटरी सहित लेखाकारों पर मुकदमा तक लिखाया जा चुका है। परन्तु नतीजा वही ढांक के तीन पात वाला ही रहा। क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई का फार्मूला भ्रष्टाचार में भी लागू होता है। 

एक CDO राजकमल यादव थे। वो भी आईएएस थे। उनकी पत्नी ज्योत्सना श्रीवास्तव एसडीएम रानीगंज रही। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रतापगढ़ शम्भू कुमार के कार्यकाल में CDO प्रतापगढ़ राजकमल यादव जिले की कमान अपने हाथ में रहकर जिले की सभी योजनाओं में जमकर बैटिंग की। प्रतापगढ़ से करोड़ों रुपये कमाये होंगे। अपने एक चहेते ठेकेदार को मालामाल कर दिये। जब एक ठेकेदार एक सीडीओ को पटाकर लाखों रुपये ठीक कर लिया तो साहेब कितना ठीक किये होंगे, इसकी कल्पना करना ही ब्यर्थ है। आईएएस राजकमल यादव के जाने के बाद आज वह बड़बोला ठेकेदार चमन्नी के लिए तरस रहा है। आई ए एस रहे राजकमल यादव सभी नेताओं और मीडिया के लोगों का खास रहे। सभी को मैनेज कर जिले के विकास वाले धन पर जमकर हाथ साफ किया। सवा आठ करोड़ के बजट को कागज पर चट कर गए थे, आईएएस राजकमल यादव।

प्रतापगढ़ एक ऐसा अनोखा जनपद है जहाँ पहले अफसर यहाँ आना नहीं चाहते और जो आ जाते हैं वो जाना नहीं चाहते। जिस भी अफसर को प्रतापगढ़ के खारे पानी का असर हो गया वो प्रतापगढ़ को भुला नहीं पाता और यहीं बने रहना चाहता है। प्रतापगढ़ के खारे पानी का मतलब भ्रष्टाचार से है। राजकमल यादव के मुँह प्रतापगढ़ का खारा पानी ऐसे लगा था कि अभी भी प्रतापगढ़ को वो भुला नहीं पाए हैं। वो शम्भू कुमार के डीएम कार्यकाल में ऑफ द रिकार्ड डीएम का भी रोल प्ले करते देखे गए थे। वो तो प्रतापगढ़ का जिलाधिकारी बनने का सपना भी मन ही मन में संजोये हुए थे जो फलीभूत न हो सका था। भविष्य में देखना है कि राजकमल यादव कभी जिलाधिकारी प्रतापगढ़ बन पाते हैं अथवा उनका सपना, सपना ही रह जाता है। 

प्रतापगढ़ जनपद ऐसा विचित्र जनपद है कि कल CDO प्रतापगढ़ के पद पर विपिन जैन की तैनाती होती है और सुबह पता चलता है कि अब उनके स्थान पर सीडीओ प्रतापगढ़ के रूप में अश्वनी कुमार पाण्डेय की तैनाती हुई है। अश्वनी कुमार पाण्डेय अभी चित्रकूट में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य कर रहे थे अश्वनी कुमार पाण्डेय भी आईएएस हैं। अब देखना है कि अश्वनी कुमार पाण्डेय प्रतापगढ़ में सीडीओ का पदभार ग्रहण करते हैं अथवा उनके स्थान पर किसी और की तैनाती होगी ? अश्वनी कुमार पाण्डेय जी प्रयागराज के रहने वाले हैं,परन्तु इनका पैतृक घर जनपद प्रतापगढ़ के रानीगंज तहसील के प्रेमधर पट्टी गाँव में हैं,परन्तु इनके पिताजी और माता जी पूरे परिवार के साथ प्रयागराज में रहते थे और अश्वनी कुमार पाण्डेय सहित सभी भाईयों का रहन सहन प्रयागराज में ही हुआ है। फिलहाल सीडीओ प्रतापगढ़ की कुर्सी अश्वनी कुमार पाण्डेय के लिए कांटों भरी होगी। 

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