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शनिवार, 11 जुलाई 2020

हुजूर पुलिस वाले रस्सी का साँप कैसे बना देते हैं...???

पुलिस की माया पुलिस ही जाने...
 पुलिस की कहानी पुलिस ही जाने...
एक बार एक दरोगा जी का मुंह लगा नाई पूछ बैठा कि "हुजूर पुलिस वाले रस्सी का साँप कैसे बना देते हैं ?"
दरोगा जी बात को टाल गए। लेकिन नाई ने जब दो-तीन बार यही सवाल पूछा तो दरोगा जी ने मन ही मन तय किया कि इसको बताना ही पड़ेगा कि रस्सी का साँप कैसे बनाते हैं ! लेकिन प्रत्यक्ष में नाई से बोले- "अगली बार आऊंगा तब बताऊंगा !"

इधर दरोगा जी के जाने के दो घंटे बाद ही 4 सिपाही नाई की दुकान पर छापा मारने आ धमके। "मुखबिर से पक्की खबर मिली है, तू हथियार सप्लाई करता है। तलाशी लेनी है तेरे दूकान की !" तलाशी शुरू हुई। एक सिपाही ने नजर बचाकर हड़प्पा की खुदाई से निकला जंग लगा हुआ असलहा नाई की दुकान में कहीं जगह देखकर छुपा दिया ! नाई की दुकान का सामान उलटने-पलटने के बाद एक सिपाही चिल्लाया-"ये रहा रिवाल्वरछापामारी अभियान की सफलता देख के नाई के होश उड़ गए। "अरे साहब मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता ।

सिपाहियों से नई गिड़गिड़ाते हुए बोला कि आपके बड़े साहब भी मुझे अच्छी तरह जानते व पहचानते हैं ! उनकी हजामत मैं ही करता हूँ। जिस पर एक सिपाही हड़काते हुए बोला-"दरोगा जी का नाम लेकर बचना चाहता है।दरोगा जी की आड़ में असलहे की तस्करी करोगे ? साले सब कुछ बता दे कि तेरे गैंग में कौन-कौन हैं ? तेरा सरदार कौन है ? तूने कहाँ-कहाँ हथियार सप्लाई किये ? कितनी जगह लूट-पाट की ? तू अभी थाने चल !"

नाई को सिपाहियों द्वारा थाणे ले जाया गया और थाने में दरोगा साहेब को देखते ही दरोगा साहेब के पैरों पर नाई गिर पड़ा - "साहब बचा लो ! मैंने कुछ नहीं किया ! आपके ये सिपाही लोग जबरन हमें फंसा रहे हैं !" दरोगा ने नाई की तरफ देखा और फिर सिपाहियों से पूछा - "क्या हुआ ?" सिपाही ने वही जंग लगा असलहा दरोगा के सामने पेश कर दिया - "सर जी मुखबिर से पता चला था कि इसका गैंग है और ये बाल काटने की दुकान की आड़ में हथियार सप्लाई करता है इसकी दुकान से ही ये रिवाल्वर मिली है !"

दरोगा सिपाही से - "तुम जाओ मैं पूछ-ताछ करता हूँ !" सिपाही के जाते ही दरोगा हमदर्दी से बोले - "ये क्या किया तूने ?" नाई घिघियाया - "सरकार मुझे बचा लो !" दरोगा गंभीरता से बोला - "देख ये जो सिपाही हैं न साले एक नंबर के कमीने हैं। मैंने अगर तुझे छोड़ दिया तो ये साले मेरी शिकायत ऊपर अफसर से कर देंगे। इन कमीनो के मुंह में हड्डी डालनी ही पड़ेगी। मैं तुझे अपनी गारंटी पर दो घंटे का समय देता हूँ, जाकर किसी तरह बीस हजार का इंतजाम कर ले और लाकर हमें दे दो ताकि इन सिपाहियों का मुंह बंद करा दूं। पांच-पांच हजार चारों सिपाहियों को दे दूंगा तो साले मान जायेंगे !"

नाई रोता हुआ बोला - "हुजूर मैं गरीब आदमी ! बीस हजार कहाँ से लाऊंगा ?" दरोगा डांटते हुए बोला - "तू मेरा अपना है, इसलिए इतना सब कर रहा हूँ ! तेरी जगह कोई और होता तो अब तक जेल पहुँच गया होता जल्दी कर वरना बाद में मैं कोई मदद नहीं कर पाऊंगा !" नाई रोता - विलखता घर गया। नाई की अम्मा के कुछ चांदी के जेवर थे जिसे चौक में एक ज्वैलर्स के यहाँ सारे जेवर बेचकर किसी तरह बीस हजार लेकर नाई थाने में पहुंचा और सहमते हुए बीस हजार रुपये दरोगा जी को थमा दिए ! दरोजा जी ने रुपयों को संभालते हुए पूछा - "कहाँ से लाया ये रुपया ?"

नाई ने ज्वैलर्स के यहाँ जेवर बेचने की बात बतायी तो दरोगा जी ने सिपाही से कहा - "जीप निकाल और नाई को हथकड़ी लगा के जीप में बैठा ले ! दबिश पे चलना है !" पुलिस की जीप चौक में उसी ज्वैलर्स के यहाँ रुकी जिस ज्वेलर्स के यहाँ नाई अपनी अम्मा के जेवर बेंचे थे दरोगा और दो सिपाही ज्वैलर्स की दुकान के अन्दर पहुंचेदरोगा ने पहुँचते ही ज्वैलर्स को रुआब में ले लिया - "चोरी का माल खरीदने का धंधा कब से कर रहे हो ?" ज्वैलर्स सिटपिटाया - "नहीं दरोगा जी आपको किसी ने गलत जानकारी दी है !" दरोगा ने डपटते हुए कहा - "चुप....बाहर देख जीप में... हथकड़ी लगाए शातिर चोर बैठा है। 

सच बताऊँ ! कई साल से पुलिस को इसकी तलाश थी। इसने तेरे यहाँ जेवर बेंचा है कि नहीं ? तू तो जेल जाएगा ही साथ ही दुकान का सारा माल भी जब्त होगा !" ज्वैलर्स ने जैसे ही बाहर पुलिस जीप में हथकड़ी पहने नाई को देखा तो उसके होश उड़ गए !  तुरंत हाथ जोड़ लिए - "दरोगा जी जरा मेरी बात सुन लीजिये ! कोने में ले जाकर मामला एक लाख में सेटल हुआ ! दरोगा ने एक लाख की गड्डी जेब में डाली और नाई ने जो गहने बेंचे थे वो हासिल किये ! फिर ज्वैलर्स को वार्निंग दी - "तुम शरीफ आदमी हो और तुम्हारे खिलाफ पहला मामला था, इसलिए छोड़ रहा हूँ ! आगे कोई शिकायत न मिले !"

इतना कहकर दरोगा जी और सिपाही जीप पर बैठ के रवाना हो गए ! थाने में दरोगा जी मुस्कुराते हुए पूँछ रहे थे "साले तेरे को समझ में आया कि पुलिस वाले रस्सी का सांप कैसे बनाते हैं ?" नाई सिर नवाते हुए बोला - "हाँ माई-बाप समझ गया !" दरोगा हँसते हुए बोला - "भूतनी के ले संभाल अपनी अम्मा के गहने और एक हजार रुपया और जाते-जाते याद कर ले ! हम रस्सी का सांप ही नहीं, बल्कि नेवला, अजगर और मगरमच्छ सब बनाते हैं बस आदमी बढ़िया होना चाहिए"। यही हमारे देश का कटु सत्य है। यही आज का कटु सत्य है। सिस्टम इसी तरह चल रहा है। इस कहानी को अवश्य पढ़े और समझे कि आज पुलिस की वास्तविकता इससे कितनी मेल खाती है ?

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