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बुधवार, 8 जुलाई 2020

एडीएम प्रतापगढ़ शत्रोहन वैश्य ने जीती कोरोना से जंग

10दिन पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे, एडीएम प्रतापगढ़ शत्रोहन वैश्य...


जिला अस्पताल,प्रतापगढ़ में कोरोना संक्रमण के बाद भर्ती हुए ADMप्रतापगढ़ शत्रोहन वैश्य को कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने पर जिला अस्पताल के CMS डॉ पी पी पाण्डेय और CMO प्रतापगढ़ डॉ AK श्रीवास्तव उन्हें गुलदस्ता भेंट करके कोरोना से जंग जीतने की बधाई देते हुए... 
आपदा प्रबंधन के प्रभारी एवं नोडल अफसर एडीएम प्रतापगढ़ शत्रोहन वैश्य ने एक हफ्ते में कोरोना वायरस के संक्रमण से जंग जीत ली है। उनकी दुबारा टेस्टिंग कराई गई तो कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव आई जिसके चलते उन्हें स्वास्थ्य उन्हें डिस्चार्ज कर दिया है। कोविड-19 कोरोना वायरस से संक्रमित हुए एडीएम की जांच रिपोर्ट उस समय पॉजिटिव आ गई जब उन्हें बुखार आने पर उनकी कोरोना वायरस की टेस्टिंग हुई। 

अपर जिलाधिकारी प्रतापगढ़ आपदा प्रबंधन के प्रभारी हैं और उन्हें ही नोडल अफसर बनाया गया है। वो आपदा प्रबंधन का कार्य अपने आवास से लेकर जिलाधिकारी आवास में बने कम्प कार्यालय से अपने दायित्वों का निर्वहन बखूबी निभाते रहे। लॉकडाउन पीरियड में भी ई-पास सहित सभी प्रशानिक सेवा का कार्य अपर जिलाधिकारी शत्रोहन वैश्य ही देखते रहे। कार्य की अधिकता की वजह ई-पास का कार्य मुख्य राजस्व अधिकारी, प्रतापगढ़ को सौंपा गया, परन्तु उनकी तुगलकी नीति और अब्यवहारिकता की वजह से कुछ ही दिनों में आम जनमानस में उनके ढुलमुल रवैये से हो रही शिकायत के क्रम में जिलाधिकारी प्रतापगढ़ ने ई-पास का कार्य वापस लेकर अपर जिलाधिकारी शत्रोहन वैश्य को पुनः सौंप दिया।

जिलाधिकारी प्रतापगढ़ डॉ रूपेश कुमार के असल में राइट हैंड के रूप में अपर जिलाधिकारी प्रतापगढ़ शत्रोहन वैश्य ही हैं। दोनों अधिकारियों में आपसी सामंजस्य भी है प्रशासनिक अफसर की सारी जिम्मेदारी का निर्वहन एडीएम प्रतापगढ़ ने कोरोना संक्रमण काल में डटकर किया। परछाई की तरह एडीएम प्रतापगढ़ शत्रोहन वैश्य डीएम प्रतापगढ़ डॉ रूपेश कुमार के साथ लगे रहते थे। जब एडीएम को कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो डीएम बहुत असहाय और थके-थके नजर आ रहे थे। जिलाधिकारी अपना भी कोरोना वायरस संक्रमण का टेस्ट कराया हालांकि डीएम की रिपोर्ट निगेटिव आई, फिर भी उन्होंने स्वयं को अपने सरकारी आवास पर ही क्वारन्टीन कर लिया। चूँकि डीएम और एडीएम साथ-साथ रहते थे, इसलिए नियमतः उन्होंने अपने को क्वारन्टीन कर लिया था

मजेदार बात ये रही कि कल जब मानधाता के बेलखरी गाँव में उ प्र के जलशक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कहने पर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर एक करोड़ रुपये का चेक कानपुर के बिकरु गाँव में 2जुलाई को एनकाउंटर में शहीद हुए दरोगा अनूप सिंह के परिजनों को देने पहुँचे तो वहाँ क्वारन्टीन हुए डीएम प्रतापगढ़ डॉ रुपेश कुमार भी चहलकदमी करते दिखे। जबकि डीएम साहेब 14दिनों के लिए स्वयं को क्वारन्टीन किये थे। उन्हें देखकर उपस्थित लोगों में इसकी चर्चा जमकर हुई। एडीएम साहेब कल जिला अस्पताल में बने कोविड-19 अस्पताल से डिस्चार्ज हुए और सात दिनों तक घर पर ही क्वारन्टीन रहने की जानकारी दी जा रही है। अब देखना है कि क्वारन्टीन हुए डीएम साहेब और CMO साहेब की तरह एडीएम साहेब भी तो क्वारन्टीन पीरियड को अलविदा कहकर टहलने-घूमने तो नहीं लगते

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