भूमाफियाओं और प्रतापगढ़ के भ्रष्ट अफसरों की मिलीभगत से खुद की जमीन के लिए मोहताज हो गया बेल्हा में मोहताजखाना

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प्रयागराज-फैजाबाद NHपर स्थित है,बेशकीमती मोहतजखाना के प्रकरण में नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत चरितार्थ हो रही है...
मोहताजखाना के जालसाज सचिव के विरुद्ध हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र ने कोतवाली नगर में लिखा दी थी गंभीर धाराओं में मुकदमा, फिर भी पुलिस की विवेचना चढ़ावे की भेंट चढ़कर रह गई...


तत्कालीन विधायक संगम लाल गुप्ता की शिकायत के बाद दर्ज हुई थी,सचिव डॉ अरविन्द कुमार पर FIR
भूमाफियाओं के द्वारा ट्रस्ट की जमीन पर कब्जा करने के लिए एक रणनीति के तहत पहले ट्रस्ट में मोहताजखाने का सचिव बना और फिर कूट रचित दस्तावेज तैयार कर करा लिया स्वयं और पत्नी समेत मित्र की माँ के नाम बैनामा करा लिया पूरे मामले में सबसे खास बात ये है ये कब्जा उस ट्रस्ट के खिलाफ हुआ,जिसके अध्यक्ष खुद है जिलाधिकारी। वर्ष-2000 में तत्कालीन डीएम ने देखरेख के लिए चिकित्सक अरविन्द कुमार श्रीवास्तव को मोहतजखाने का सचिव नामित किया था। मोहताजखाने के सचिव ने ही करोड़ो रुपये की बेशकीमती जमीन पर राजस्व व नगरपालिका प्रशासन की मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसका स्वामी बन बैठा है। 

 बेल्हाघाट के लेखापाल सुशील कुमार मिश्र ने दर्ज कराई थी मोहताजखाना के सचिव पर FIR...
मोहताज खाने के सचिव के साथ निबंधन विभाग के एआईजी स्टाम्प अरिवंद सिंह एवं पंकज सिंह निवासी गजरिया, पट्टी, प्रतापगढ़ ने अपनी माँ के नाम बैनामें में सहयोगी हैं। धन और प्रभाव में नगरपालिका प्रशासन ने मोहताज खाने का नाम काटकर बैनामा लेने वालों के नाम नामांतरण कर डाला।जबकि मोहताजखाना की तरफ से प्रॉपर्टी नहीं बिकी तो कैसे सरकारी अभिलेखों में नगरपालिका और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मोहताज खाने का नाम किस आधार पर खारिज कर बैनामे के आधार पर उसमें रहे क्रेताओं का नाम दर्ज कर डाला ? इस सवाल का नगरपालिका प्रशासन और जिला प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है। कई शिकायतों के बावजूद भी कोई कार्यवाही नही हुई। अगर हुई निष्पक्ष जांच हुई तो कई चेहरे बेनकाब होंगे।

 मोहताजखाना का सचिव मोहताज खाना कब्जाने के बाद भी धर्मादा वाला धन भी करता है,कैश...
प्रतापगढ़ जिला प्रशासन के निकम्मेपन की वजह से जिस तरह प्रतापगढ़ में करोड़ों रुपये बेशकीमती ट्रस्ट की जमीन और विद्यालय की भूमि और भवन का बयानानामा एग्रीमेंट लेकर उस पर भूमाफियाओं द्वारा कब्जा कर लिया जा रहा हैं और जिला प्रशासन उस भूमाफिया के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहा है,बल्कि हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। हाँ,तहसील प्रशासन और उप जिलाधिकारी सदर,प्रतापगढ़ कार्यवाही के नाम पर अपनी बचत के लिए उस शिकायकर्ता पर शांति भंग की कार्यवाही करके अपने हाथों से अपनी पीठ भले ही थपथपा ले। प्रशासन के निकम्मेपन की वजह से जिस तरह प्रतापगढ़ में करोड़ों रुपये बेशकीमती ट्रस्ट की जमीन और कार्यालय का बैनामा हो जाए और उसकी खारिज दाखिल भी कर दी जाए। 


संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज है,मोहताजखाना...
ये जिला प्रशासन की नकारेपन का ही नतीजा है कि अरबों रुपये की ट्रस्ट की बेशकीमती सम्पत्ति, जिसका अध्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी हो फिर भी उस सम्पत्ति मोहताजखाना/खैरातखाना को, उस ट्रस्ट का सचिव ही उसका क्रेता बनकर Non ZA आबादी की भूमि दिखाकर उसका जमींदार से बैनामा लिखा ले। मजे की बात ये कि मोहताजखाना का सचिव सरकारी चिकित्सक है और उसी मोहताजखाना में रहकर मोहताजखाना की बिल्डिंग भी लिखा लिया। चूँकि जमींदार के नाम सिर्फ जमीन आबादी खसरा व खतौनी में दर्ज है। सबसे विचारणीय बिंदु ये है कि मोहताजखाना की कुल भूमि एक बीघा से अधिक है और मोहताज खाना के सचिव अपने नाम व अपने पत्नी के नाम व अपने सहयोगी AIG स्टाम्प अरविन्द सिंह एवं पंकज सिंह की माँ के नाम सिर्फ 5बिस्वा खरीदा और नगरपालिका के अभिलेख में मोहताजखाना के नाम पड़ाव वार्ड के डिमांड रजिस्टर में खैरातखाना ट्रस्टी जिलाधिकारी का नाम पूरी तरह से उड़ा दिया और विधि विरुद्ध ढंग से पैसे के बल पर प्रतापगढ़ के भूमाफियाओं ने अपना नाम दर्ज करा लिया। यानि 5बिस्वा खरीदकर एक बीघा पर कब्जा करके भी मोहताजखाना का सचिव डॉ अरविंद कुमार वर्मा हरिश्चन्द्र बना हुआ है..."
जिले के वरिष्ठ पत्रकार मोज त्रिपाठी की लाइव टुडे की कवरेज...

जिलाधिकारी आवास से 500मीटर दूर महिला क्लब की करोड़ों रुपये की सम्पत्ति भी माननीय न्यायालय में नूराकुश्ती करके जिला प्रशासन को धता बताकर वो भी बिक गई। गायघाट रोड़ पर बंजर जमीन पर तत्कालीन जिलाधिकारी विद्या भूषण ने शहर से जुड़ा होने के कारण उसको डेवलप कराया और पिकनिक स्पॉट बनाने के लिए सिंचाई विभाग से लाखों रुपये खर्च भी हुए थे,परंतु भूमाफियाओं ने राजस्व विभाग को मिलाकर उसकी प्लांटिंग कर उसे भी बेंच खाया। अम्बेडकर चौराहा से मदर हॉस्पिटल वाली सड़क पर सरकारी भूमि पर प्रतापगढ़ के भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया। सैंयाबांध पर नाले पर कब्जाकर उस पर मल्टीपल कॉम्पलेक्स बिल्डिंग भाजपा नेता नपाध्यक्ष रहते हरि प्रताप सिंह बनवा लिए। तीन वर्ष से उसे तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी कमेटी गठित कर उसका मेरिट पर निर्णय लेते उसे उक्त बिल्डिंग को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया,परंतु उस आदेश पर अमल न हुआ।

चिलबिला ओवरब्रिज के पूरब दिशा में रंजीतपुर चिलबिला की गाटा संख्या-2256 मि. एवं गाटा संख्या-2257 मि. सरकारी भूमि पर भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह और उनके सगे भाईयों अरुण प्रताप एवं विनय प्रताप उर्फ बब्बू ने नगरपालिका का कूड़ा पाटकर कब्जा कर लिया है। महुली में सरकारी तालाब को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताते हुए नगरपालिका ने पटवा दिया। नगरपालिका क्षेत्र में विवेक नगर और चिलबिला के प्राथमिक स्कूल पर भी कब्जा हो रहा है। अब शहर के अंदर सिर्फ सरकारी दफ्तर बचे हुए हैं जो Non ZA पर निर्मित हैं। भूमाफियाओं के हौसले और जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए ये सोचना गलत न होगा कि यही स्थिति रही तो वो दिन दूर नहीं जिस दिन प्रतापगढ़ का कलेक्ट्रेट परिसर सहित अन्य सरकारी दफ्तर और भवन पर भी भूमाफियाओं का कब्जा न हो जाए। 

rameshrajdar

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