श्रीलंका में भारतीय सैनिक भेजने के फैसले के विरोध में विजिथा रोहन विजेमुनी ने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को गार्ड ऑफ ऑनर देते समय अपनी राइफल के बट से किया था,सिर पर प्रहार

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"राहुल गांधी के बाप राजीव गांधी ने 1200 भारतीय सैनिकों की बलि चढ़ाकर "बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना" और "तू कौन मैं ख़ामख्वाह" सरीखे मुहावरों को तुगलकी शैली में चरितार्थ क्यों किया था ? 30 जुलाई, 1987 को श्रीलंका पहुंचे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को गार्ड ऑफ ऑनर देते समय श्रीलंका की नौसेना के एक नौजवान नौसैनिक ने राजीव गांधी के सिर पर अपनी राइफल के बट से भरपूर प्रहार किया था। राजीव गांधी द्वारा श्रीलंका में भारतीय सैनिक भेजने के फैसले के विरोध में उस नौसैनिक ने वह प्रहार किया था..." 
श्रीलंका पहुंचे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को गार्ड ऑफ ऑनर देते समय श्रीलंका की नौसेना के एक नौजवान नौसैनिक ने राजीव गांधी के सिर पर अपनी राइफल के बट से किया था,भरपूर प्रहार...
यह घटना राजीव गांधी की तुगलकी राजनीतिक सोच के विरुद्ध एक गम्भीर चेतावनी तो थी ही साथ ही साथ राजीव गांधी की अधकचरी अपरिपक्व कूटनीतिक समझबूझ का शर्मनाक उदाहरण भी थी। क्योंकि राजीव गांधी के सिर पर अपनी राइफ़ल का बट मार कर उस नौसैनिक ने जब विरोध जताया था उस समय राजीव गांधी उस समझौते पर दस्तखत करने श्री लंका गए थे, जिसके अनुसार श्रीलंका के तमिलों से लड़ने के लिए भारत को अपनी फौज श्रीलंका भेजनी थी यह विचित्र स्थिति थी कि जिनसे लड़ने के लिए भारतीय सेना को श्रीलंका भेजा जा रहा था, वो तमिल तो इस फैसले का विरोध कर ही रहे थे, लेकिन जिन श्रीलंकाई सैनिकों नागरिकों (सिंहली) की सहायता के लिए भारतीय फौज भेजने का दावा राजीव गांधी ने किया था वो श्रीलंकाई नागरिक व सैनिक (सिंहली) भी राजीव गांधी के उस तुगलकी फैसले का जबर्दस्त विरोध कर रहे थे स्वयं भारत में भी राजीव गांधी के उस फैसले की तीखी आलोचना हो रही थी राजीव गांधी की प्रचंड कूटनीतिक मूर्खता से लथपथ उस फैसले का भयंकर दुष्परिणाम भारतीय सेना को भोगना पड़ा था। 

श्रीलंका में नौसैनिक विजिथा रोहन विजेमुनी ने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को गार्ड ऑफ ऑनर देते समय अपनी राइफल के बट से किया था,सिर पर प्रहार...
राजीव गांधी ने श्रीलंका के तमिलों से लड़ने के लिए 20 हजार भारतीय सैनिक श्रीलंका भेज दिये थे. वह सैनिक 2 वर्ष सात महीने 24 दिन तक श्रीलंका में लड़े थे और बेनतीजा ज़ंग लड़ कर खाली हाथ वापस लौटे थे उस युद्ध में 1200 भारतीय सैनिक मौत के घाट उतर गए थे लगभग 7 हज़ार सैनिक बुरी तरह घायल हुए थे उसी दौरान भारतीय सेना को जाफना की घेराबंदी का आदेश दिया गया था परिणामस्वरूप 12 अक्टूबर 1987 को भारतीय सेना ने यह अभियान शुरू किया था 15 दिन की इस असफल घेराबंदी में कर्नल रैंक के दो अधिकारियों समेत 15 सैन्य अधिकारी व 199 सैनिक शहीद हुए थे और 36 जवानों को लिट्टे आतंकवादियों ने बंधक बना लिया था और उन्हें राक्षसी यातनाएं देकर उनकी हत्या कर दी थी उन 36, भारतीय सैनिकों के शव तक सेना को नहीं मिले थेजिनसे लड़ने गए और जिनके लिए लड़ने गए, अगर दोनों ही पक्ष विरोध प्रारम्भ कर दें तो विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेना की भी वही गति होगी जो श्रीलंका में भारतीय सेना की हुई थी लेकिन राजीव गांधी की ज़हरीली जिद्द अन्त तक जारी रही थी। दिसम्बर 1989 में राजीव गांधी की सत्ता से विदाई के बाद फ़रवरी 1990 में भारतीय सेना श्रीलंका से लौट सकी थी। 

श्रीलंका में भारतीय सेना भेज कर भारत का क्या और कौन सा हित हुआ था ? क्योंकि श्रीलंका की सरकार से लड़ रहे तमिल गुटों ने उस समय तक भारत के विरुद्ध एक शब्द तक नहीं बोला था अतः राजीव गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका भेज कर 1200 भारतीय सैनिकों की बलि क्यों और किसके कहने पर चढ़ा दी थी ? लिट्टे द्वारा बंधक बनाने के बाद राक्षसी यातनाएं देकर मौत के घाट उतारे गए 36 सैनिकों के शवों को अंतिम संस्कार तक नहीं नसीब नहीं हुआ था। भारतीय सेना के साथ हुए उस महापाप का जिम्मेदार अपराधी कौन था उन 1200 सैनिकों की मौत का जिम्मेदार कौन था ? देश की सीमा की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले 20 बलिदानी सैनिकों के बलिदान पर गम और गुस्से की राजनीतिक नौटंकी कर रहे राहुल गांधी और कांग्रेस को बताना चाहिए कि "बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना" सरीखे मुहावरे को तुगलकी शैली में चरितार्थ करते हुए राजीव गांधी ने 1200 भारतीय सैनिकों की बलि क्यों चढ़ा दी थी...???

प्रस्तुति : - सतीश मिश्र  

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