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शुक्रवार, 19 जून 2020

सीएम अशोक गहलोत की परीक्षा में फिर खरे उतरे डिप्टी सीएम सचिन पायलट

राजस्थान में कांग्रेस को राज्यसभा की दो सीटें, भाजपा को एक पर ही संतोष करना पड़ेगा...

 डिप्टी सीएम सचिन पायलट को समझाते हुए सीएम अशोक गहलोत...
19 जून को राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से मतदान हुआ और परिणाम सामने आ रहे हैं। कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी राज्यसभा के सांसद बन रहे हैं। जबकि भाजपा के राजेन्द्र गहलोत ही जीत की ओर है। भाजपा के दूसरे उम्मीदवार औंकार सिंह लखावत को अपनी हार का पहले ही अनुमान था, इसलिए लखावत के चेहरे पर हार की सिकन नहीं देखी गई। चूंकि केन्द्र में भाजपा की सरकार है, इसलिए लखावत को हार का राजनीतिक मुआवजा जल्द मिलेगा। संघ पृष्ठ भूमि के लखावत शुरू से ही पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सक्रियता से राजस्थान में राज्यसभा के चुनाव रौचक हो गए। गहलोत ने शुरू से ही ऐसा माहौल बनाया जिससे लगे कि भाजपा वाले कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों को 25-25 करोड़ रुपए में खरीद रहे हैं। माहौल को और गर्माने के लिए गहलोत ने 10 जून से ही विधायकों की बड़ाबंदी कर दी। यानि करीब 122 विधायक जयपुर की होटलों में बंधक रहे

भाजपा के नेता किसी कांग्रेसी विधायकों को न भगा सके, इसके लिए 11 जून को अचानक राजस्थान की सीमा सील कर दी गई। इतना ही नहीं सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी की शिकायत पर एसओजी ने विधायकों की खरीद फरोख्त की जांच भी शुरू कर दी। कांग्रेस के विधायकों के भागने पर बगावत करने की जब भी चर्चा होती है तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट पर ही शक जाता है। हालांकि पायलट कई बार कह चुके हैं कि वे कांग्रेस की सरकार को गिराने का काम नहीं करेंगे, लेकिन फिर भी पायलट को हर बार सफाई देनी होती है। 12 जून को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पायलट को कहना पड़ा कि कांग्रेस विधायकों में कोई फूट नहीं है ओर पार्टी के दोनों उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे। ऐसे ही परिणाम अब सामने आ रहे हैं। यानि अशोक गहलोत ने राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर सचिन पायलट के लिए परीक्षा का जो राजनीतिक माहौल बनाया उसमें पायलट खरे उतरे हैं। 

स्वभाविक है कि अब गहलोत की रणनीति को सफल बताया जाएगा और सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी की ओर से शाबाशी भी मिलेगी। गहलोत भी कह सकेंगे कि यदि सीमा सील करने से लेकर विधयकों की बाडाबंदी नहीं की जाती तो भाजपा वाले 25-25 करोड़ रुपए में विधायकों को खरीद लेते। यह बात अलग है कि अब तक 13 निर्दलीय और 107 कांग्रेस के विधायकों में से एक ने भी 25 करोड़ रुपए के प्रस्ताव मिलने की बात स्वीकार नहीं की है। किसी विधायक ने भाजपा के नेताओं द्वारा सम्पर्क किए जाने की बात भी नहीं की है। लेकिन इसके बावजूद भी सचिन पायलट को अशोक गहलोत की परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ी है। वफादारी पर कोई शक नहीं हो, इसलिए 19 जून को मतदान के समय पायलट और उनके समर्थक माने जानेवाले मंत्रियों एवं विधायकों ने कांग्रेस के एजेंट को मतपत्र दिखाकर बॉक्स में डाला। 

पूरा हुआ सतीश पूनिया का राजनीतिक मकसद...

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया...
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने ओंकार सिंह लखावत के तौर पर भाजपा का दूसरा उम्मीदवार खड़ा कर जो राजनीतिक चाल चली वो पूरी तरह सफल रही। पात्र उम्मीदवारी से पूनिया ने राजस्थान कांग्रेस की सरकार और संगठन को परेशानी में डाल दिया। पूनिया ने बगैर कोई प्रयास किए कांग्रेस में हलचल करवा दी। कांग्रेस की अंतर्कलह से ऐसा लगा जैसे 30-40 विधायक टूट जाएंगे। सीएम गहलोत को भाजपा से ज्यादा अपने विधायकों से खतरा नजर आने लगा। सीएम गहलोत 10 जून से कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के साथ होटलों में टिके रहे। सतीश पूनिया को भी पता है कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को धराशाही करने के लिए कम से कम 30 विधायक चाहिए। मौजूदा समय में कांग्रेस खेमे से 30 विधायकों को तोडऩा आसान नहीं है। राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस खेमे में जो कुछ भी हुआ, उससे राजनीतिक अनुमान तो लगाया ही गया है। इससे कांग्रेस के असंतुष्टों की ताकत का अंदाजा भी लग गया है। पूनिया ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं, जिनके परिणाम आने वाले दिनों में सामने आएंगे। 

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