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शुक्रवार, 19 जून 2020

नहीं भूल रहा है एक्टर सुशान्त सिंह राजपूत का चेहरा

आज भी बॉलीवुड में माफियागीरी का नहीं खत्म हो पाया राज...

एक्टर सुशान्त सिंह राजपूत की आत्महत्या की मिस्ट्री समझ के परे...
फिल्म जगत की कहानी भी अजीब है जैसे फिल्मों में नायक और खलनायकों का रोल दर्शकों को चलचित्र के जरिये दिखाया जाता है ठीक वैसे ही फिल्म जगत के अन्दर का स्वरूप है जिसे आम जनता न तो जानती है और न ही समझती ही है राजनीतिक क्षेत्र की तरह फिल्मी दुनिया में भी वंशवाद का जमकर बोलबाला रहा है बाहरी लोगों के लिए बॉलीवुड भी महफ़ूज नहीं है इतनी प्रतिस्पर्धा है कि जान भी देना पड़ता है चाहे आत्म हत्या के जरिये और चाहे हत्या के जरिये बॉलीवुड का असल नियंत्रण महाराष्ट्र की सरकार के हाथ में नहीं है आज भी उसका नियंत्रण माफियाओं के हाथों में है 

बॉलीवुड में वही सफल हुआ जो माफियाओं की दासता को कबूल लिया जो नहीं कबूल किया उसे दुनिया से उठाने का पूरा प्रयास किया गया। उदाहरण के लिए उभरते सितारे ऋतिक रोशन का नाम लिया जा सकता है। ऋतिक रोशन माफियाओं के प्रकोप से बच गया, क्योंकि खुद के पिताजी का प्रोडक्शन हाउस और घर का ही डायरेक्टर भी है बॉलीवुड के खान-माफिया गठबंधन ने ऋतिक को रिजेक्ट किया और वो पिता राकेश रोशन के कारण तीन बार लांच हुआ। किस्मत अच्छी है, वरना पहली फिल्म "कहो न प्यार है" के बाद हुए हमले में गोली बारी से राकेश रोशन बच गए। वही ऋतिक की आखिरी फिल्म होती 

तीन बॉलीवुड हस्ती जो दुबई के इन्वेस्टर और खान गैंग के लिए चुनौती बन गए थे हर तरह से उनको दाऊद- दुबई के सहायता से कैसे खत्म किया या कोशिश किया ? सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो मुंबई में बॉलीवुड के अंदर शिवसेना के सुप्रीमों बाल ठाकरे यानि बाला साहेब का दबदबा हुआ करता था उनके बाद से तो बॉलीवुड में माफिराज का बोलबाला बढ़ता ही गया जब भी खान गैंग के अतिरिक्त अन्य नायक और नायिकाओं सहित बॉलीवुड के क्षेत्र से जुड़े लोगों पर आफत विपत आई तो वह बाला साहेब के शरण में जाकर पनाह लिया करता था और उसका समझौता माफियाओं से बाला साहेब ही कराते रहेएनसीपी सुप्रीमों शरद पवार भी बॉलीवुड के हस्तियों और इन माफियाओं में बात बिगड़ने पर एक माध्यम हुआ करते थे सुपर स्टार अमिताभ बच्चन का भी माफिया दाउद से विवाद गहराने पर बाला साहेब ने मध्स्थता की थी ऐसी ख़बरें प्राकश में भी आई थी परन्तु महाराष्ट्र की सरकार कभी इस पर नियंत्रण नहीं लगा सकी 

1- गुलशन कुमार की दाऊद गैंग द्वारा हत्या - नदीम जिसने गुलशन कुमार न सिर्फ लांच किया बल्कि कैरियर भी बनाया वो दाउद से मिल गया और गुलशन के हत्या का भागीदार रहा 
2- राजीव गुलशन राय - त्रिदेव, विश्वात्मा, मोहरा और गुप्त जैसी हिट फिल्म बनाने वाले राजीव गुलशन राय पे हमला हुआ, किस्मत अच्छी थी बच गए बॉलीवुड छोड़ना पड़ा और यूरोप में छिपकर कई वर्ष काटने पड़े जब वो कई वर्ष बाद वापस आये तो दो फिल्में बनाई जो नहीं चलीं अगली फिल्म बनाते उससे पहले ही माफिया से धमकी मिली और उन्होंने बॉलीवुड से पूरी तरह किनारा कर लिया 
3. राकेश रोशन - "कहो न प्यार है" के बाद हमला ऋतिक का करियर खान गैंग ने बॉलीवुड से खत्म करने का पूरा प्रयास किया, लेकिन राकेश रोशन के समझौते के नीति और बचने के लिए खान गैंग के रास्ते कभी नहीं आने के कंडीशन पे चल निकले 

आज तक किसी खान गैंग या या दाऊद और दुबई के सामने नतमस्तक हो जाने वाले के ऊपर कोई हमला नहीं हुआ है खान गैंग को चुनौती देने वाले हर एक्टर को खत्म कर दिया गया दाऊद - माफिया के दम पर ! जिसने इन लोगों के सामने घुटने टेके वो बच गया जैसे गोविन्दा को दाऊद के पार्टियों में नाचने जाना पड़ता था ऊपर से फिल्म का परिवारवाद जिसने बाहर वालो को कोई मान्यता नहीं देने और खुद का करियर सुरक्षित रखने के लिए परिवार से बाहर वालों को हर समय निचले स्तर का दिखाते हैं इनके पाले हुए फिल्म समीक्षक तो हैं ही जो इनके आगे नतमस्तक नहीं होने वालों को सीधे नकार ही देते हैं 

खान गैंग को एक्टिंग, डांस, लुक और सामूहिक अनुरोध के मामले में सीधे चुनौती देने वाला सुशांत तो अभी बालक था इस समय बॉलीवुड अनुपम खेर, मोहन जोशी, मुकेश तिवारी, रणवीर शोरी, रणदीप हुड्डा जैसों को काम नहीं दे रहा है प्रियांशु चटर्जी, हिमांशु मलिक, नील नितिन मुकेश, अरुणोदय सिंह कहाँ है ? सिद्धार्थ मल्होत्रा कहाँ है ? ये लोग सीधे खान गैंग को चुनौती देने वाले एक्टर थे परिवार में पैदा हुए एक्टर इनके आगे कहीं नहीं टिकते थे। परन्तु अब ये गायब हो चुके हैं। इनके पास कोई काम नहीं है या दक्षिण का रुख कर चुके हैं

बॉलीवुड की सच्चाई यही है !
पहली - खान गैंग के नीचे रहो !
दूसरी - परिवार के गुलाम बनके रहो !
तीसरी - टुकड़े टुकड़े गैंग का समर्थन करो - 
चौथी - दुबई के भाई लोग से बचे रहो !
पाँचवी  - देश और धर्म की बात नहीं करने का !

ये समय गोली बन्दूक का नहीं तो मेन्टल शोषण करके, फिल्म से बाहर करके और रिजेक्ट करके काम चलता है सुशान्त सिंह राजपूत बॉलीवुड के खान गैंग और परिवारवाद का शिकार हुआ हाँ इन सबको टक्कर देती अकेले लड़ रही है, कंगना राणावत ! जिसको कम्युनिस्ट गैंग ने मणिकर्णिका के समय खूब विचलित करने की कोशिश किया उसके नकली घोड़े के शूटिंग वाले सीन को शेयर करके खूब ताने मारे ! जैसे ये खान गैंग और परिवार वाले घोड़े के पीठ और शेर की खाल ओढ़कर ही पैदा हुए हों ! लड़ती रहो कंगना ! लोग तुम्हारी पिक्चर जरूर देखेंगे 

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