Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

मृतक आश्रितों को नौकरी के बजाय विशेष पैकेज दिया जाए

कोर्ट ने कहा कि आश्रितों की भारी संख्या होने के कारण अगर सभी की नियुक्ति कर दी गई तो प्रतियोगिता से खुली भर्ती के लिए अवसर नहीं बचेगा...!!! 
'मृतक आश्रितों को नौकरी के बजाय विशेष पैकेज दिया जाए'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक कर्मचारी आश्रितों के हित में ऐतिहासिक पहल की है. सरकारी सेवा में समान अवसर व सामाजिक न्याय में सामंजस्य स्थापित करने के लिए कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक आश्रितों को विशेष पैकेज देने का सुझाव दिया है. कोर्ट ने कहा है कि मृतक आश्रितों की भारी संख्या और पदों की कमी को देखते हुए सरकार ऐसा तरीका अपनाए, जिससे खुली प्रतियोगिता से योग्यों की नियुक्त हो और आश्रितों को भी सामाजिक न्याय मिल सके.
कोर्ट ने सुझाव दिया है कि सरकार आश्रित परिवार को मृत कर्मचारी की सेवा निवृत्ति या अचानक आई आपत्ति से उबरने के लिए 3 से 5 वर्ष तक कर्मचारी को मिल रहे वेतन का भुगतान करने का कानून बनाए. ऐसा करने से खुली प्रतियोगिता से नियुक्ति के अवसर बढ़ेंगे और आश्रित को भी सहायता मिल सकेगी.
कोर्ट ने पुलिस विभाग में सीधी भर्ती कोटे के 5 फीसदी पदों पर आश्रितों की नियुक्ति के नियम को वैध करार दिया है. और कहा है कि ऐसा न करने से आश्रितों की संख्या अधिक होने से सीधी भर्ती के अवसर कम होंगे. कोर्ट ने प्रदेश के सभी विभागों के लिए आश्रितों को सामाजिक न्याय के कानून बनाने के लिए आदेश की प्रति मुख्य सचिव को प्रेषित करने का आदेश दिया है.
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने अंकुर गौतम व अन्य की याचिका को ख़ारिज करते हुए दिया है.
तो प्रतियोगिता से खुली भर्ती के लिए अवसर नहीं बचेगा
याचिका पर अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी ने बहस की. इनका कहना था कि नियम 5(1) अनुच्छेद 14 व 16 के विपरीत है, क्योंकि यह केवल 5 फीसदी रिक्तियों पर ही आश्रित की नियुक्ति की अनुमति देता है. इससे बहुत से आश्रित नियुक्ति नहीं पा सकेंगे. इस नियम के अनुसार, सीधी भर्ती के 5 फीसदी रिक्तियों पर आश्रितों की संख्या ज्यादा होने पर टेस्ट से मेरिट पर चयन किया जाएगा

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Top Ad

Your Ad Spot

अधिक जानें