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सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

वह हिंदुस्तानी खिलाड़ी जो पाकिस्तान का बना फर्स्ट कैप्टन बना

पहले ही भारत-पाक सीरीज में अपने ही जन्मभूमि देश को दी थी मात,उसे कहा जाता है पाकिस्तान के क्रिकेट का "पितामह"
1958 में सन्यास लेने वाले पाक क्रिकेट के "पितामह"अब्दुल हाफ़िज़ करदार ने लिखी थी 11किताबें,अंतिम थी "Failed Expectaitions"
इस ऐतिहासिक खेल के लिए भारतीय क्रिकेट टीम की कमान मिली थी लाला अमरनाथ को...!!! 
पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने जून 2019 में होने वाले क्रिकेट विश्वकप में टीम इंडिया को पाकिस्तान के साथ खेलने से कर दिया है मना ...!!! 
पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद होने के बाद जहाँ देश मे पाकिस्तान व उसके पालतू आतंकियों के प्रति जबरदस्त क्रोध फैला है तो वहीं मोदी सरकार भी इस बार पाकिस्तान को ऐतिहासिक सबक सिखाने की घोषणा के तहत कठोर क़दम उठाती जा रही है।जिसमे केंद्र सरकार ने परसो BCCI को निर्देशित कर दिया है कि जून 2019 के विश्वकप में भारत को पाकिस्तान के साथ कत्तई क्रिकेट मैच नही खेलना है। उधर ये जानना बेहद दिलचस्प रहेगा कि India-Pakistan के बीच कब और कैसे क्रिकेटीय खेल के रिश्ते का श्रीगणेश हुआ था।
भारत-पाकिस्तान के मैच में हायपर टेन्शन रोमांच बंटवारे के पश्चात प्रथम क्रिकेट मैच से प्रारम्भ हुआ जो दिनोदिन उसने अपनी हायपर गेम एक्साइटमेंट  की चपेट में आज पूरी दुनियां के खेल प्रेमियों को मोहपाश में बांध लिया है परन्तु शायद ही लोग होंगे जिनको इस ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय दो देश जिनको एक को दुनियां एक को पैदा करने वाला जन्मदाता तो दूसरे को औलाद मानती है। पाकिस्तानी क्रिकेट के पितामह माने जाने वाले "अब्दुल हाफिज करदार" ही वो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे, जिनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराकर इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली जीत हासिल की थी। करदार उन तीन क्रिकेटर्स में शामिल हैं, जिन्होंने बंटवारे से पहले भारतीय टीम की तरफ से भी क्रिकेट खेला था।करदार के अलावा अमीर इलाही और गुल मोहम्मद ने भी बंटवारे से पहले भारतीय टीम की तरफ से क्रिकेट खेलते थे। पाकिस्तान में अब्दुल करदार को क्रिकेट का ‘पितामाह’ माना जाता है| 17 जनवरी 1925 को जन्मे एएच करदार की 21 अप्रैल 1996 में 71 साल की उम्र में मौत हो गई थी।
भारत पाकिस्तान की पहली क्रिकेटीय टक्कर...
1947 में बंटवारे के बाद भारत पाकिस्तान दोनों की अलग अपनी क्रिकेट टीमें बन चुकी थीं,उस दौर में टी-20, वनडे मैच नहीं होता था। ‘खेल’ होता था, सिर्फ टेस्ट मैच फॉरमेट में। बंटवारे की टीस दोनों मुल्कों के बीच थी क्रिकेट से कुछ कड़वाहट कम करने की कोशिश की गई थी, जिसकी वज़ह से टेस्ट सीरीज रखी गई।
कुल मैच होने थे पांच,भारतीय टीम की कमान मिली लाला अमरनाथ को..
वहीं पाकिस्तानी टीम की कमान मिली 27 साल के अब्दुल हाफिज करदार को।
इंडिया में पाकिस्तान को 5 टेस्ट मैच खेलने थे दिल्ली, लखनऊ, बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता में। पहले और तीसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तानी हारे। करदार ने पहले टेस्ट में 2 विकेट लेकर पहली पारी में 4 और दूसरी पारी में नाबाद 43 रन बनाए। दूसरा टेस्ट लखनऊ में हुआ। करदार ने मैच में एक भी विकेट नहीं लिया, न ही बहुत ज्यादा रन बनाए,लेकिन बाजी पलटी पाकिस्तानी बल्लेबाज नजर मोहम्मद की नाबाद 124 रन की पारी ने। पाकिस्तान ने इंडिया को पहली बार हराया। जीत का फासला था 43 रनों का। कादर बाएं हाथ के बल्लेबाज और स्लो आर्म ऑर्थोडोक्स स्पिन बॉलर थे। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में करदार ने 6832 रन और 344 विकेट लिए।तीसरे टेस्ट में इंडिया ने पाकिस्तान को मुंबई में हराया। 5 मैचों की सीरीज में दो टेस्ट जीतकर भारत सीरीज जीत चुका था, बाकी के दो मैच ड्रा रहे।
करदार की कप्तानी में पाकिस्तान ने पहली सीरीज जीती साल 1954 में...
ओवल में पाक ने इंग्लैंड को हराया।लखनऊ में पाकिस्तान को मिली जीत से अब नए किस्से लिख रही थी।करदार की कप्तानी में पाकिस्तान ने 23 टेस्ट मैच खेले थे, जिसमें पाकिस्तान को 6 मैचों में जीत मिली और 6 में हार। करदार की कप्तानी में खेले 11 मैच ड्रा रहे,1958 में करदार ने क्रिकेट से संन्यास लिया था।
करदार की किताब...
करदार ने अपनी जिंदगी के अनुभवों को किताब की शक्ल भी दी।करदार की पहली किताब ‘Inaugural Test Matches’ साल 1954 में आई। करदार ने कुल 11 किताबें लिखी,इंतेक़ाल से पूर्व अब्दुल हाफिज करदार की 1995 में आई आखिरी किताब थी Failed Expectations, यानी उम्मीदों का फेल होना। लेकिन पाकिस्तानी क्रिकेट में एएच करदार ने उम्मीदों की जो मशाल जलाई थी, उसे आज दुनिया देख रही है। भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान रास्ते सन्नाटे से भर जाते हैं। उसी पाकिस्तानी क्रिकेट की नींव रखी थी अब्दुल हाफिज करदार ने।

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