भितरी का मार दहिजरवा जाने

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भाजपा संगठन और उत्तर प्रदेश की सरकार की वास्तविक स्थिति से आगामी लोकसभा चुनाव-2019 में हो सकता है,भारी नुकसान...!!!
सैंया भयेन कोतवाल तों आब डर काहें का...की बात मानने वाले समर्थक भाजपा पदाधिकारियों से खा सकते हैं,गच्चा...!!!
भितरी का मार दहिजरवा जाने... ये कहावत भाजपा संगठन और उनके सांसदों और विधायकों पर फिट बैठती है,क्योंकि उनकी शिकायत को कोई तरजीह नहीं मिलती। वो भ्रष्ट ब्यूरोकेट्स की शिकायत करते रहे कि अमुक विभाग का विभागाध्यक्ष जनता की समस्या नहीं सुनता। अपनी मनमानी चलाता है। यहाँ तक कि विधायकों और सांसदों की किसी भी सिफारिश को नहीं सुनता। फिर भी कोई ऐक्शन नहीं होता। जिस जनता के बल पर उसे सत्ता मिली उसका भी काम नहीं होता। जिस बूथ प्रभारी को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी रीढ़ की हड्डी बताते हैं उनकी असल औकात इतनी भी नहीं कि वो अपने बूथ के मतदाताओं की कोई समस्या का निवारण करा सकें। संगठन की कमान जिलाध्यक्ष के कंधे पर होती है,उसकी भी शिकायत को योगी सरकार में नजर अंदाज कर दिया जाता है। फिर भी योगी सरकार का दावा है कि लोकसभा चुनाव में 2014 के अपेक्षा 73 सीट के बजाय 74 सीट जीतकर मोदी को पुनः देश का प्रधानमंत्री बनायेंगे। जबकि वर्तमान में इसी बड़बोलेपन का नतीजा है कि 73 सीट पाने वाली NDA ने अपनी तीन महत्वपूर्ण सीट उपचुनाव में गंवा चुकी है...!!
ये तीन सीट सबसे महत्वपूर्ण गोरखपुर,फूलपुर और कैराना की है। जिसमें गोरखपुर संसदीय सीट,स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई सीट रही। जो भाजपा और गौरक्षा पीठ की परम्परा वाली रही जो आपसी खींचतान की वजह से वो भी हाथ से निकल गई। ठीक इसी तरह से फूलपुर से योगी सरकार में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की खाली हुई सीट भी बड़बोले के कारण और बाहरी और सर्व स्वीकार बेहतर उम्मीदवार देने के निर्णय से उप चुनाव में विफलता हाथ लगी। फिर भी योगी सरकार का बड़बोलापन नहीं गया। भाजपा के बड़े नेता हुकुम सिंह के दिवंगत होने के बाद कैराना की सीट भी भाजपा लूज कर गई। योगी सरकार की तीनों सीट जाने पर बहुत किरकिरी हुई थी। तीनों सीटों के परिणामों से गदगद बसपा और सपा के मुखियाओं ने आम चुनाव-2019 में गठबंधन कर भाजपा को शिकस्त देने की ठानी है। योगी सरकार में बेलगाम और भ्रष्ट नौकरशाही की हिटलरशाही ने आम जनता का जीना दुश्वार कर दिया है। भ्रष्ट और निरंकुश नौकरशाही पर योगी सरकार का कोई अंकुश नहीं रह गया है। आम जनता को ऐसा लगने लगा है कि स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी उन पर कोई भय और अंकुश नहीं रहा...!!!
आखिरकार आम जनता के मन में ये सवाल पैदा होने लगा है कि उ प्र सरकार पर फिर किसका नियंत्रण है ? संगठन में अंदरखाने की आवाज पर ध्यान दें तो योगी सरकार में सबसे ताकतवर संगठन महामंत्री सुनील बंसल जी हैं जिनके सिर पर स्वयं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का हाथ हैं। इसीलिए मेरठ में सार्वजनिक रुप से स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने स्वीकार किया था कि स्वास्थ्य विभाग में जबरदस्त भ्रष्टाचार व्याप्त है। उनके विभाग में वो भले ही कैबिनेट मंत्री हैं,परन्तु असलियत यही है कि वो अपने विभाग में एक बाबू का तवादला तक नहीं कर सकते ! यदि स्वास्थ्य मंत्री का बयान सत्य मान लिया जाये तो आखिर योगी सरकार में सत्ता की असल चाबी किसके हाथ में है ? उत्तर प्रदेश की जनता आखिर अपनी समस्या किससे कहे ? भ्रष्टाचार में लिप्त और निरंकुश हुई नौकरशाही की शिकायत किस फोरम से करे ? हिटलरशाही रवैया वाले अफसर तो आम जनता को निगल जाने तक की ताकत रखते हैं। वो जानते हैं कि आम जनता जो शिकायत करेगी उसका ईलाज वो पंचम तल तक बैठे हाकिमों से करा लेंगे। फिर कोई क्या करेगा...???
थकहारकर शिकायतकर्ता भी बैठ जायेगा। परंतु लोकसभा चुनाव में वो इसका बदला अपने मत के हथौडे़ से कर सकता है। इसका एहसास शायद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नहीं है। तभी तो योगी सरकार को निरंकुश छोड़ दिया गया है और सत्ता की चाभी संगठन महामंत्री सुनील बंसल के हाथ में दे दी है। उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे ओम माथुर जी इसी वजह से नाराज होकर उत्तर प्रदेश का प्रभारी पद छोड़ दिया। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी अपने खास रहे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव जे पी नड्डा जो मोदी सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी हैं,उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है और संगठन महामंत्री सुनील बंसल के पॉवर्स को कम करने का कार्य किया है। परन्तु आज भी भाजपा संगठन की दशा में सुधार नहीं हो पा रहा है। नाराज कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को नए-नए पद सृजित कर उनकी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास तो किया गया। परन्तु सारी कवायदें सिर्फ दिखाने के लिए की जा रही हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से भाजपा शीर्ष नेतृत्व सारे दायित्वों का निर्वहन कराना तो चाहती है,परन्तु उनकी शिकायतों को नजरंदाज करना पार्टी शीर्ष नेतृत्व और योगी सरकार की प्रथम वरीयता होती है...!!!
योगी और मोदी सरकार चुनावी मूड में आ चुकी है। लगातार भूमि पूजन, शिलान्यास और लोकार्पण जैसे आयोजन में दिन रात एक कर दी है। अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों का जिस तरह दोंनो सरकारें ढिंढोरा पीट रही हैं उससे जनता में कोई विशेष फर्क नहीं पड़ रहा। हाँ देशहित में लिए गए फैसले जो पिछली सरकारों में नहीं लिए गए थे वो निर्णय लेकर प्रधानमंत्री के रुप में नरेन्द्र मोदी जी पहला स्थान बनाये हुए हैं। पर आम जनता का ये सवाल भी लाजमी है कि देश में सिर्फ मोदी जी के नाम पर एक वोट देश के नाम माँगकर भाजपा कब तक शासन सत्ता पर कायम रहेगी ? योगी सरकार और मोदी सरकार का दावा है कि उसकी सरकार में पारदर्शिता आई है और भ्रष्टाचार कम हुए हैं। परंतु सच्चाई कुछ और ही है। भ्रष्टाचार में योगी सरकार में भी कोई कमी नहीं आई है। दावे करने से बात नहीं बनती। विकास के लिए अरबों खरबों रुपये आवंटित हो रहे हैं और योगी सरकार में हर विभाग उनके विभागाध्यक्ष ही डकैती डाल रहे हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा और विद्युत सहित खनन विभाग में तो लूट मची हुई है। चंद दिनों पहले स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी चिकत्सकों और CMO की संयुक्त लूट को स्वीकारा था और बयान भी दिया था..!!!
प्रधानमंत्री आवास और स्वच्छता अभियान में लूट मची हुई है। बी डी ओ और सेक्रेटरी एवं ग्राम प्रधानों पर मुकदमें लिखे जा रहे हैं। रिकवरी के आदेश भी जारी हो रहे हैं,परन्तु न तो रिकवरी हो रही है और न ही भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी जिन पर मुकदमा दर्ज हुआ है,वो जेल भेजा जा रहा हो। सिर्फ दिखावा हो रहा है। योगी और मोदी जी जिस जिले में जा रहे हैं वहाँ फरियादी अपनी फरियाद लेकर जाये तो उसका पिछवाड़ा लाल करा दिया जाता है। जनता के पैसे से हो रहे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के दौरे में फरियादियों की शिकायतों का कोई स्थान नहीं है,जबकि एक आयोजन में करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ रहने वाले निजी सचिवों द्वारा यदि फरियादियों की फरियाद भी सुनने की व्यवस्था हो तो आम जनता को बहुत सहूलियत मिल जाये। परन्तु आकंठ डूबे भ्रष्ट नौकरशाही ऐसा होने नहीं देती। क्योंकि उसके काले कारनामों की पोल खुल जाने का भय रहता है। उसके इस खेल में विधायकों और सांसदों सहित मंत्रियो का भी सहयोग रहता है। चूँकि भ्रष्ट नौकरशाही की प्रत्येक लूट में उनकी भूमिका भी रहती है। इसलिए चोर-चोर मौसेरे भाई वाली कहावत को अपनाकर अपना काम साध रहे हैं। उनको अपने विकास से मतलब है। उनके लिए आम जनता भाड़ में जाये...!!!
भाजपा का दावा है कि उसका दल विश्व के सभी राजनीतिक दलों में प्रथम स्थान पर पहुँच चुका है। उसका संगठन बहुत मजबूत हो चुका है। उसकी पकड़ सीधे प्रत्येक बूथ पर सीधे बूथ प्रभारियों के माध्यम से मतदाताओं तक है। ये बातें उस सिद्धांत की तरह सुनने में बहुत सटीक और सुंदर लगती हैं,परन्तु हकीकत में अंदर से उतनी ही खोखली और कमजोर लगती हैं। पार्टी कार्यकर्ता अपना काम कराने के लिये भी इस भ्रष्ट और निरंकुश व्यवस्था का शिकार है तो वो कैसे और किस मुँह से मतदान के दिन मतदाता को घर से निकालकर मतदान स्थल तक ले जाकर भाजपा के पक्ष में मतदान करायेगा ? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी, उत्तर प्रदेश प्रभारी जे पी नड्डा जी एवं सूबे के मुखिया स्वयं योगी आदित्यनाथ जी को इस विषय पर गंभीर चिंतन करना होगा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की बातों और शिकायतों पर समय रहते ध्यान न दिया गया तो राष्ट्रवाद और देशप्रेम के नाम पर लोकसभा के आम चुनाव में वर्ष-2014 वाले मतदाता वर्ष-2019 के आम चुनाव में "एक वोट देश के नाम नहीं देंगे"। फिर तो नतीजे उपचुनाव गोरखपुर,फूलपुर और कैराना जैसे हीे होंगे...!!!

rameshrajdar

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