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रविवार, 19 जुलाई 2020

कुंडा के बाहुबली निर्दलीय विधायक एवं जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया के भाजपा कनेक्शन...

स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह भी राजा भईया से मिलने पहुँच गए,उनके कोठी...

जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा भईया और कैबिनेट मंत्री मोती सिंह के बीच आधे घंटे तक हुई थी,मुलाकात। इस दौरान बेंती कोठी के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ भी आई,नजर...
 योगी के कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह कुंडा के बेंती कोठी राजा भईया से पहुँचे थे,मिलने...
योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री मोती सिंह जब जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया से मिलने उनकी बेंती कोठी पर पहुंचे तो कयासबाजी की अटकलों का दौर शुरू हो गया। जितनी मुंह उतनी बातें होने लगी कैबिनेट मंत्री मोती सिंह और कुंडा विधायक राजा भईया के बीच इस मुलाकात से जिले का सियासी पारा चढ़ गया अटकलों का बाजार भी गर्म हुआ था दोनों नेताओं के बीच आधे घंटे तक मुलाकात हुई इस दौरान बेती कोठी के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ भी नजर आई इतना ही नहीं यह मोती सिंह की राजा भईया के साथ ये पहली मुलाकात थी। इसलिए राजनीतिक दृष्टि से देखा जाना स्वाभाविक है। 

"योगी सरकार दरअसल रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" पर योगी सरकार इतनी मेहरबान कैसे हो गई कि उन्होंने उनके खिलाफ दर्ज मुकदमें ही जड़ से खत्म कर दिए ? क्या यह चुनाव से पहले की तैयारी तो नहीं ? चूंकि वर्ष- 2022 में विधान सभा के चुनाव होने हैं। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी से बेहतर सम्बन्ध हैं। योगी जी की चली होती तो आज राजा भईया उनके मंत्रिमंडल का हिस्स्सा होते और सांसद संगम लाल गुप्ता की जगह अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी " आज प्रतापगढ़ के सांसद होते बात बिगड़ गई सिर्फ कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र की सीट को लेकर ! नहीं तो आज जनसत्ता दल लोकतांत्रिक राजग का घटक दल होता ! ऐसा कहा जा रहा है कि "राजा भईया" के खिलाफ दर्ज मुकदमों को सरकार ने चुनाव से पहले वापस ले लिए हैं ताकि उत्तर प्रदेश में आगामी विधान सभा-2022 की चुनावी बिसात बिछाई जा सके..."

राजा भईया और मोती सिंह की इस मुलाकात के सियासी मायने भी निकाले जाने लगे है आने वाले वक्त में जिला पंचायत अध्यक्ष, एमएलसी और विधानसभा का चुनाव होना है जिसकी वजह से इस मुलाकात को सियासी चश्मे से देखा जा रहा। एक बार फिर राजा भईया का रुख भाजपा की तरफ होने से भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। गौरतलब है कि कुंडा के निर्दलीय विधायक राजा भैया ने लोकसभा चुनाव से पहले जनसत्ता पार्टी का गठन कर चुनाव लड़ा था हालांकि उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली अब दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को वर्ष-2022 के विधानसभा चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। 
अभी मोती सिंह की मुलाकात का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि प्रतापगढ़ आये स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह भी राजा भईया से मिलने उनके कोठी पहुँच गए। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री और राजा भईया की मुलाकात को औपचारिक मुलाकात और शिष्टाचार का नाम दिया गया और सफाई दी गई कि राजा भईया और स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह रिश्तेदार हैं। इस मुलाकात को सिर्फ एक शिष्टाचार ही माना जाए। इससे इतर और कुछ नहीं। फिलहाल राजनीतिक लोग तब तक खिचड़ी पकाते रहते हैं जब तक मामला पूरी तरह पक नहीं जाता। दो मंत्रियों की मुलाकात के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद की खंडपीठ लखनऊ ने योगी सरकार से पूँछा है कि राजा भईया के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमें को किस वजह से उत्तर प्रदेश सरकार ने वापस लिया है ? अब कोर्ट के जवाल के बाद तो राजनीति में मानों तूफान आ गया हो !

राजा भईया लगातार कुंडा से कई बार विधायक हैं वर्ष-1993 से वह कुंडा विधानसभा से निर्दलीय जीतते आ रहे हैं। वर्ष-1997 में बीजेपी की कल्याण सिंह की सरकार में वह पहली बार मंत्री बने थे वर्ष-2002 में बसपा सरकार में विधायक पूरन सिंह बुंदेला को धमकी देने के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था। बाद में राजा भईया पर मायावती की सरकार में पोटा कानून के तहत कार्यवाही की गई थी और भाजपा के भूतल परिवहन मंत्री रहे राजनाथ सिंह ने राजा भईया का समर्थन करना चाहा तो तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ने हस्तक्षेप करते हुए राजनाथ सिंह को बैकफुट पर जाने का फरमान सुना दिया गया। जबकि राजनाथ सिंह के ही उकसाने पर राजा भईया मायावती सरकार के खिलाफ बिगुल बजाया था। 

बसपा-सपा गठबंधन के बाद अखिलेश से राजा भईया की बन गई थी,दूरी...
दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन के बाद अखिलेश यादव और राजा भैया के बीच दूरी बढ़ गई। इस बात की तस्दीक उस वक्त हो गई जब राज्य सभा चुनाव हुए राजा भैया ने सपा-बसपा कैंडिडेट की जगह बीजेपी उम्मीदवार को अपना वोट दिया इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद अटकलों का बाजार गर्म हुआ कि राजा भईया बीजेपी की तरफ जा सकते हैं हालांकि अब तक निर्दल राजनीति करते आ रहे राजा भईया ने अपनी खुद की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक बना ली है। 

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