मायावती सरकार में भी अनुसूचित जाति का पद, DIOS प्रतापगढ़ ने अपने पुत्र को विद्यालय अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता से दिलवा दिया...!!!

शिक्षा जगत में माफियाओं का है बोलबाला...!!!
राजनीति की आड़ में शिक्षा माफियाओं ने बना रखा है शिक्षा विभाग पर काकस...!!!
माध्यमिक शिक्षा विभाग के इतिहास का यह सबसे बड़े भ्रष्टाचारों में से एक भ्रष्टाचार है...!!!
सूबे के जनपद प्रतापगढ़ में सबसे अधिक शिक्षा माफिया...!!!

प्रतापगढ़। माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रबंधतंत्र और जिला विद्यालय निरीक्षक की मिलीभगत का खेल लंबे समय से चल रहा है। प्रतापगढ़ में स्वामी करपात्री इंटर कॉलेज रानीगंज के प्रवक्ता भूगोल के पद से दिनांक 26 जनवरी,2010 को हरिश्चंद्र लाल श्रीवास्तव शिकोहाबाद में प्रधानाध्यापक के पद पर चले गये। पद अल्पकालिक रूप से रिक्त हो गया और विद्यालय प्रबंधतंत्र 30 जून, 2010 तक के लिए किसी को भी नियुक्त कर सकता था और उसके बाद पद मौलिक रूप से रिक्त हो जाता तो चयन बोर्ड से अनुसूचित जाति का शिक्षक आता। परंतु प्रबन्धक ने अल्पकालिक रिक्त पद पर ही अधियाचन भेजकर कोर्ट से चयन बोर्ड से शिक्षक आने तक के लिए वेतन का आदेश करा लिया। चयन बोर्ड से अनुसूचित जाति का शिक्षक आता उसके पहले ही भूल से अल्पकालिक रिक्ति पर अधियाचन भेजना बताकर अधियाचन निरस्त करा लिया। जबकि अधियाचन निरस्त कराने के बाद कोर्ट का आदेश भी स्वतः निरस्त हो गया,क्योंकि कोर्ट अधियाचन देखकर ही चयन बोर्ड से शिक्षक आने तक के लिए वेतन का आदेश करती है। जब अधियाचन ही निरस्त हो गया तो चयन बोर्ड शिक्षक कैसे भेजती ?
इस तरह मायावती सरकार में भी दिग्गज कांग्रेसी ने जिला विद्यालय निरीक्षक के बेटे को नौकरी देकर अनुसूचित जाति का हक डकार लिया। भाजपा सरकार में क्या मुनीश्वर दत्त उपाध्याय द्वारा स्थापित विद्यालयों में हुई अवैध नियुक्तियों की जांच हो पाएगी ? योग्य बेरोजगार और अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जातियों को उनका हक मिल सकेगा ? या फिर कांग्रेसियों का तिलिस्म भाजपा के योगी सरकार में भी कायम रहेगा ? स्वामी करपात्री इंटर कॉलेज रानीगंज,प्रतापगढ़ के भूगोल प्रवक्ता का पद हरिश्चंद्र लाल श्रीवास्तव के प्रधानाचार्य बन जाने के कारण रिक्त हुआ तो तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ओम प्रकाश मिश्र अपने ही पुत्र की अल्पकालिक रिक्त पद पर प्रबंधतंत्र से नियुक्ति करा ली और सत्र समाप्त हो जाने के बाद नियुक्ति समाप्त हो जानी चाहिए थी,लेकिन 8 वर्ष से अनवरत तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ओम प्रकाश मिश्र के पुत्र पंकज कुमार मिश्र भूगोल प्रवक्ता के रूप में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। उच्च न्यायालय में तथ्य छिपाकर सहायक अध्यापक एलटी का वेतन का आदेश कराकर प्रवक्ता का वेतन पंकज कुमार मिश्र द्वारा लिया जा रहा है,जो नियमत: उचित नहीं है।
विद्यालय के तत्कालीन अध्यक्ष कांग्रेस नेता श्याम किशोर शुक्ल ने अल्पकालिक रिक्ति का अधियाचन भेजकर बाद में सेटिंग-गेटिंग के आधार पर अधियाचन निरस्त करा लिया। इस प्रकार अनुसूचित जाति आरक्षित के पद पर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक प्रतापगढ़ ओम प्रकाश मिश्र के बेटे की नियुक्ति बरकरार रखकर योग्य बेरोजगारों का हक खाया जा रहा है। आखिर जब अधियाचन ही चयन बोर्ड को न भेजा जाएगा तो चयन बोर्ड कैसे शिक्षक भेजेगा ? न्यायालय चयन बोर्ड से शिक्षक आने तक के लिए एलटी शिक्षक के रूप में वेतन का आदेश कर रहा है,नियुक्ति प्रवक्ता पद पर हुई है और अल्पकालिक रिक्त पद दिखाकर अधियाचन भी निरस्त करा लिया जा रहा है तो चयन बोर्ड कैसे शिक्षक भेजेगा ? मुनीश्वर दत्त उपाध्याय द्वारा स्थापित सत्रह अशासकीय विद्यालयों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल द्वारा गरीब बेरोजगारों का हक रिश्तेदारों और अधिकारियों के करीबियों में बांटा गया है। इसी तरह के मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक,जौनपुर निलंबित हो गए। लेकिन प्रतापगढ़ में खुलेआम वर्तमान जिला विद्यालय भी स्वीकार कर रहे हैं कि प्रबंधतंत्र के विज्ञापन में सबसे योग्य आवेदक तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक,प्रतापगढ़ रहे ओम प्रकाश मिश्र के बेटे पंकज कुमार मिश्र ही थे।
अगर चयनबोर्ड के पास DIOS प्रतापगढ़ के दफ्तर से रिक्त पद का अधियाचन गया होता तो विज्ञापन 2011, 2013 में चयन बोर्ड से शिक्षक आ गया होता। इस तरह योग्य बेरोजगार महानगर में धक्के खा रहा है और प्रबंधतंत्र अपने चहेतों और अधिकारियों के बेटों से नौकरी करा रहा है और अधियाचन भी दबाकर बैठा हुआ है। जब तक बेरोजगार आगे आकर बगावत नहीं करेगा तब तक उसे धूल ही फांकना होगा। तमाम बेरोजगार हजार,दो हजार रुपये में निजी विद्यालय में पढ़ा रहे हैं तो अयोग्य लोग रुपये के बल पर योग्य बेरोजगारों का हक डकारकर बैठे हैं। इस तरह प्रतापगढ़ में शिक्षा के दूसरे मालवीय मुनीश्वर दत्त उपाध्याय द्वारा स्थापित संस्थाओं को वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल दूसरे दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार की शह से सरकारी नौकरी को धनपशु और रिश्तेदारों को बांटकर बैठे हैं। इसके बदले में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल ने दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार को अपने विरासत में मिले दर्जनों अशासकीय विद्यालयों में से आधा दर्जन शिक्षण संस्थानों को उन्हें सौंप दिया।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल एवं उनके पालनहार दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार...
अब तो दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार खुलकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल के बचाव करने लगे। यही नहीं दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद कुमार वर्ष-2012के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह की नाराजगी के बाद भी सदर विधानसभा क्षेत्र-248 से कांग्रेस पार्टी से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल को उम्मीदवार बनाकर एक एहसान उन पर और थोप दिया। जबकि सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह अपना खास उम्मीदवार विजय सिंह "राजू" (मुम्बई के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कृपा शंकर सिंह के दामाद)को बनाना चाहती थी। उस दौरान राजकुमारी रत्ना सिंह और प्रमोद कुमार में कुछ दिनों के लिए अनबन भी हुई थी। आज भी कांग्रेसी दिग्गज नेता प्रमोद कुमार अपने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल का बचाव करते रहते हैं। जिससे उनकी दुकान आज भी शिक्षा जगत में फल फूल रही है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम किशोर शुक्ल द्वारा जो नियुक्तियां की गई हैं,ये नियुक्तियां वास्तव में चयन बोर्ड से शिक्षक आने तक के लिए ही की गयी हैं,लेकिन चयन बोर्ड को इन रिक्तियों की सूचना ही नहीं है। अतः चयन बोर्ड शिक्षक नहीं भेज रहा है। जबकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश की अंतिम लाइन में लिखा है कि चयन बोर्ड से शिक्षक आने पर प्रबंधतंत्र द्वारा की गयी अल्पकालिक नियुक्ति के शिक्षक स्वतः हट जाएंगे । जबकि अल्पकालिक पद पर कोर्ट से वेतन का आदेश नहीं कराया जाता है । ऐसी नियुक्ति मात्र एक सत्र के लिए ही होती है। मौलिक पद पर अधियाचन जाते ही 2011 और 2013 की भर्ती से शिक्षक आ जाता।

rameshrajdar

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