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बुधवार, 9 मार्च 2022

उत्तर प्रदेश के चुनाव में जिनसे थी, सबसे ज्यादा उम्मीद, उन्होंने किया निराश, पहली बार वोट करने वालों ने मतदान से बनाई दूरी

मतदाता जागरूकता अभियान और उसके ब्रांड अम्बेसडर ने मतदाताओं को मतदान के लिए नहीं कर सके प्रेरित, इसलिए कम हुआ मतदान...

पहली बार वोट करने वालों ने मतदान से बनाई दूरी...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया हैं। कल 10 मार्च गुरुवार को चुनाव का परिणाम आ जाएगा। चुनाव परिणाम आने के बाद उत्तर प्रदेश में नई सरकार का गठन भी हो जाएगा। इस बीच एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है जो एक अच्छे भविष्य और अच्छे लोकतंत्र के लिहाज से बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। भारत में युवा आबादी किसी भी देश की तुलना में सर्वाधिक है। ऐसे में युवाओं से उम्मीद होती है कि वो देश के भविष्य को अच्छा बनाने के लिए अपना योगदान दें और इस दिशा में सबसे अहम कदम है कि मतदान में हिस्सा लेना, लेकिन उत्तर प्रदेश के युवाओं ने इस लिहाज से बहुत निराश किया है।


उत्तर प्रदेश में युवा मतदाताओं जिनकी उम्र 18-29 साल है, उनकी संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। साल-2017 के विधानसभा चुनाव में कुल 14.12 मतदाता थे, जिनकी संख्या में इस बार विधानसभा चुनाव में 90.30 लाख की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन 18-29 साल के मतदाताओं की बात करें तो साल- 2017 में इनकी कुल संख्या 4.06 करोड़ थी जो कम होकर इस बार 3.44 करोड़ पहुंच गई। साल- 2017 की तुलना में इस बार 18-29 साल के मतदाताओं की संख्या में 61.28 लाख ही रही। साल- 2017 की तुलना में 18-29 साल के मतदाताओं की कुल संख्या में तकरीबन 5 फीसदी की गिरावट आई है। साल- 2017 में 18-29 साल के कुल मतदाताओं का प्रतिशत 28.73 था जो कि साल- 2022 में 22.93 फीसदी हो गया।


आंकड़ों को खंगाले तो यह बात सामने आती है कि इसमे सर्वाधिक गिरावट पहली बार के मतदाताओं की संख्या में आई है। साल- 2017 के विधानसभा चुनाव में कुल 24.25 लाख मतदाता ऐसे थे जिन्होंने पहली बार मतदान किया था, जबकि 2022 में यह संख्या कम होकर 17.95 फीसदी हो गई। साल- 2017 में पहली बार मतदान करने वालों की कुल संख्या 24.25 लाख थी जो कि साल- 2022 में 19.89 लाख पहुंच गई। पहली बार के मतदाताओं का इस बार कुल फीसदी 1.32 रहा जो कि साल- 2017 में 1.72 था। चुनाव आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो 18-29 साल के मतदाताओं की औसत संख्या में 15205 की गिरावट हुई है। वहीं अगर हर सीट पर जीतने वाले उम्मीदवार के औसत अंतर की बात करें तो यह 29505 है। न सिर्फ यूपी बल्कि झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल में इसी तरह के आंकड़े देखने को मिले थे और युवा मतदाताओं की संख्या में गिरावट हुई थी। झारखंड में 14.03 फीसदी, बिहार में 12.48 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 1.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी।


सर्वाधिक वोट फीसदी की बढ़ोतरी की बात करें तो यह 30-39 साल के आयु वर्ग में हुई है। 57.15 लाख तकरीबन 16.39 फीसदी की बढ़ोतरी इस वर्ग में हुई है। साल-2017 में इसकी कुल संख्या 3.48 करोड़ थे जो कि साल-2022 में बढ़कर 4.06 करोड़ हो गई है। कुल मतदाता की तुलना में इस आयु वर्ग का मतदाता 24.69 फीसदी से बढ़कर 27.01 फीसदी हो गया है। जो कि सबसे बड़ा मतदाता वर्ग है। इससे पहले 20-29 साल के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक थी लेकिन अब इसमे गिरावट देखने को मिली है। साल- 2017 में इस वर्ग के कुल मतदाता 3.81 करोड़ थे जो कि साल- 2022 में कम होकर 3.24 करोड़ रह गए हैं। इसमें 56.92 लाख और 14.92 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। साल- 2017 में 27.02 फीसदी के साथ यह इस आयु वर्ग में सबसे अधिक मतदाता थे। इस बार 20-29 साल के मतदाताओं का कुल 21.60 फीसदी है।

 

अगर 50-59 साल के मतदाताओं की बात करें तो इसमे भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। इसमे 37.41 लाख नए मतदाता जुड़े हैं। यह 19.71 फीसदी है। 2017 में इस वर्ग के कुल मतदाता 1.89 करोड़ थे जो कि साल- 2022 में बढ़कर 2.27 करोड़ हो गए हैं। 40-49, 60-69, 70-79 और 80 साल से अधिक उम्र के मतदाता में 6.29 से लेकर 25.23 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला है। माना जा रहा है कि 29 साल से कम उम्र के मतदाता की संख्या में गिरावट की बड़ी वजह बेरोजगारी दर है। यूपी में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय स्तर से भी अधिक है। एनएसओ और पीएलएफआरएस के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी-मार्च 2021 के बीच यूपी में 15-29 साल के युवाओं में शहरी बेरोजगारी दर 23.2 फीसदी है जो कि 2020 में इसी क्वार्टर में 21.8 फीसदी थी। वहीं राष्ट्रीय बेरोजगारी दर की बात करें तो यह 10.6 फीसदी है।


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