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रविवार, 6 मार्च 2022

पूर्वांचल में जौनपुर की मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट से इस बार भाजपा के प्रत्याशी अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया हैं और समाजवादी पार्टी उम्मीदवार पंकज पटेल में हैं, सीधी टक्कर

एक आंकड़े के मुताबिक 3.86 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर ब्राह्मण वोट करीब 80 हजार हैं, पटेल 65 हजार, यादव 44 हजार हैं, अनुसूचित जाति का वोटर करीब 70 हजार है, क्षत्रिय 30, वैश्‍य 26 हजार और मुस्‍लिम वोटर 22 हजार है...

जौनपुर की मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट का समीकरण...

यूपी विधानसभा चुनाव- 2022 के तहत सातवें चरण में पूर्वांचल में जौनपुर की मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट से इस बार भाजपा के प्रत्याशी अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया हैं तो समाजवादी पार्टी उम्मीदवार पंकज पटेल हैं। बसपा ने अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए दिनेश शुक्ला पर दांव लगाया है और कांग्रेस से प्रमोद कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। अज्जू भइया ने खुद के लिए कांग्रेस से ज्यादा सुरक्षित मान कर भाजपा में आ गए।मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा के प्रत्याशी अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी पंकज पटेल के बीच लड़ाई होती नजर आ रही है बसपा के प्रत्याशी दिनेश शुक्ल वोट कटवा साबित हो रहे हैं। चूँकि दिनेश शुक्ल भाजपा से बसपा में शामिल हुए हैं और कांग्रेस से प्रत्याशी रहे अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया इस बार भाजपा में शामिल हुए हैं। फिलहाल क्षेत्र में दोनों का अपना-अपना प्रभाव है।  


भाजपा के प्रत्याशी अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया साल-2017 में कांग्रेस से प्रत्याशी रहे इसलिए भाजपा में आने के बाद मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट के मतदाता उनसे जुड़ता गया, क्योंकि वहां भाजपा उम्मीदवार रही सीमा द्विवेदी बसपा की उम्मीदवार सुषमा पटेल के सामने चुनाव हार गई थी और उन्हें भाजपा शीर्ष नेतृत्व राज्य सभा सांसद बनाकर दिल्ली भेज दिया। इसलिए भाजपा को भी नए उम्मीदवार की तलाश थी और उस तलाश में अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया चयनित किये गए वर्ष- 2008 के निर्वाचन आयोग के परिसीमन के बाद अस्‍तित्‍व में आई मुंगराबादशाहपुर सीट पर वर्ष- 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में सीमा द्विवेदी ने बसपा को समाजवादी पार्टी की लहर में जीत दर्ज की थी। मुंगराबादशाहपुर विधानसभा की पहली विधायक बनने का गौरव प्राप्त है वह कम समय में जननेता के रूप में ख्याति प्राप्ति कर ली थी और तेजतर्रार महिला नेत्रियों में से एक रही और पार्टी के प्रति वफादार रही, जिससे पार्टी ने उन्हें हारने के बाद भी राज्यसभा सांसद बना दिया  


विधानसभा चुनाव वर्ष- 2017 में जातीय समीकरण और सोशल इंजीनियरिंग के आधार पर बसपा ने पिछड़ा वर्ग के सुषमा पटेल पर दांव लगाकर प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा था और 'मोदी लहर' में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। बसपा उम्मीदवार सुषमा पटेल ने इस इलाके में भाजपा की कद्दावर नेता सीमा द्विवेदी को हराया था इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़कर आये अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया को प्रत्याशी बनाया तो वहीं पर बसपा ने अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए भाजपा से बगावत कर आये दिनेश शुक्ला पर दांव खेला है। समाजवादी पार्टी ने यह सीट हासिल करने के लिए इस बार जातीय समीकरण और सोशल इंजीनियरिंग का ट्रम्पकार्ड खेलते हुए पिछड़ा वर्ग के पंकज पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया है। बसपा से सुषमा पटेल विधायक तो बनी परन्तु वह अपनी बसपा की हाथी से उतरकर चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार हो गई 


इस बात से मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र में लोग बसपा से नाराज हैं और सत्ताधारी दल से विधायक न होने की वजह से मुंगरा बादशाहपुर क्षेत्र में विधायक सुषमा पटेल के कामकाज से लोग नाराज हैं मुंगरा बादशाहपुर की सियासी जंग का बादशाह कौन होगा, यह कह पाना कठिन है मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा पर 7 मार्च को मतदान होना है यहाँ लड़ाई भाजपा और सपा के बीच आमने-सामने है। फिलहाल अज्जू भइया के झंडे का रंग इस बार बदला हुआ है तो दिनेश शुक्ल ने भाजपा से टिकट न मिलने पर बसपा के हाथी पर सवार होकर चुनावी मैदान में झंडा बुलंद किये हैं अब मुंगरा बादशाहपुर क्षेत्र  की जनता किसके संग है, इसको लेकर गुणा-भाग व दौड़-भाग चल रही है। राजनीतिक पंडित अपनी-अपनी भविष्यवाणी करने में जुटे हुए हैं सोशल मीडिया पर अपने-अपने उम्मीदवार को जिताने की गुणा-गणित समर्थक भी लगाने में पीछे नहीं हैं परन्तु हकीकत यह है कि असल लड़ाई समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार पंकज पटेल और भाजपा उम्मीदवार अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया के बीच ही है   


सबसे महत्वपूर्ण मतदाता ब्राह्मण है। यदि वह एकजुटता दिखाई और भाजपा के अज्जू भईया के पक्ष में मत दिया तो वह चुनाव जीत जायेंगे और यदि बसपा उम्मीदवार दिनेश शुक्ल और भाजपा उम्मीदवार अज्जू भईया के बीच ब्राह्मण मतदाता विभाजित हुआ तो सपा के पंकज पटेल की साइकिल को विधानसभा लखनऊ पहुँचने से कोई रोक नही सकता। जातीय समीकरण के हिसाब से अज्जू भइया और पंकज पटेल में ही लड़ाई बनती नजर आ रही है। मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट पर ब्राह्मण वोटरों का वर्चस्‍व है एक आंकड़े के मुताबिक 3.86 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर ब्राह्मण वोट करीब 80 हजार हैं। पटेल 65 हजार, यादव 44 हजार हैंअनुसूचित जाति का वोटर करीब 70 हजार है क्षत्रिय 30, वैश्‍य 26 हजार और मुस्‍लिम वोटर 22 हजार है। इसलिए सबसे मजबूत स्थिति में भाजपा उम्मीदवार अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भइया ही नजर आ रहे हैं। देखना है कि 10 मार्च को जीत का सेहरा किसके सिर पर बाँधा जाता है और किसकी होली बदरंग होती है ? यह सब मुंगर बादशाहपुर की जनता के दिलोदिमाग पर निर्भर करता है।  

 

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