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मंगलवार, 15 फ़रवरी 2022

अगड़ी-पिछड़ी जातिवादी जहर घोलकर अपनी राजनीति चमकाने वाले विधायक डॉ आर के वर्मा की रानीगंज में नहीं गल रही है, दाल

जब कभी कोई पद बिना किसी मेहनत किये ही प्राप्त हो जाता है तो उसकी कीमत उस ब्यक्ति को नहीं हो पाती, ऐसा ही विश्वनाथगंज से अपना दल एस के विधायक रहे डॉ आर के वर्मा के साथ हुआ, वह मोदी की सुनामी में लोकसभा उम्मीदवार रहे कुंवर हरिवंश सिंह के चुनाव में उनके चुनाव निशान से विधायकी के चुनाव की बाजी मार ले गए और बिना मेहनत किये बन गए माननीय...


विश्वनाथगंज विधानसभा से विधायक रहे डॉ आर के वर्मा के बिगड़े बोल...


उत्तर प्रदेश का चुनाव हो और उस चुनाव में जातिवाद और संप्रदायवाद की बात न की जाए, ऐसा तो हो नहीं सकता। चुनाव की अधिसूचना से पहले चुनाव के लिए नेताओं द्वारा विकास और बेरोजगारी सहित महंगाई एक बड़ा मुद्दा होता है, परन्तु चुनाव की घोषणा के साथ ये मुद्दे गौड़ हो जाते हैं। फिर से वही जातिवाद और संप्रदायबाद की बात शुरू होती है। सत्तापक्ष के नेता हों या विपक्ष के, सबकी राजनैतिक रोटी जाति और मज़हब की भट्ठी पर ही सेंकी जाती है। ऐसे ही एक विधायक डॉ आर के वर्मा हैं जो बसपा से राजनीति की शुरुआत किये और लोकसभा चुनाव के साथ हुए विश्वनाथगंज विधानसभा के उपचुनाव-2014 में ब्राह्मण और क्षत्रिय का वोट पाकर भाजपा अपना दल के गठबंधन पर चुनाव जीते थे। मोदी लहर में वर्ष- 2017 में भी चुनाव यह जीत गए थे। 


जब अपना दल एस से उनका बिगाड़ हो गया तो अब वे समाजवादी हो गए और रानीगंज विधानसभा से सपा उम्मीदवार होते ही अब वह ललकार रहे हैं कि ब्राह्मण और क्षत्रियों को मैंने दो बार विश्वनाथगंज में हराया। अब ऐन चुनाव के वक्त जातिवादी मानसिकता का जहर घोलकर यह समाज में जो एकरूपता है, उसे तोड़ना चाहते हैं। अभी इन्हें समाजवाद का ककहरा भी नहीं मालूम। छोटे लोहिया के नाम से मशहूर जनेश्वर मिश्र जी ने अपने खून पसीने से समाजवादी पार्टी को खड़ा किया था। अभी पिछले चुनाव में यह ब्राह्मण और क्षत्रियों के तलवे चाट रहे थे। दो मुंह वाले सांप की तरह आज डॉ आर के वर्मा उन्हीं का विरोध कर रहे हैं। विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र में इन्होंने ब्राह्मणों, दलितों, यादव एवं मुसलमानों के गांव में विकास का कोई भी कार्य नहीं किया। 


सच बात तो यह है कि देश में कोविड-19 वैश्विक महामारी कोरोना काल में ऐसा विधायक कोई भी न रहा होगा जो अपने विधानसभा क्षेत्र में भ्रमण न किया हो ! परन्तु प्रतापगढ़ के विश्वनाथगंज विधानसभा के विधायक डॉ आर के वर्मा एक दिन भी क्षेत्र में नहीं दिखाई पड़ा था। रानीगंज की जनता इतनी मूर्ख नहीं है कि इन्हें जातिवाद के नाम पर अपना कीमती मत देकर फिर से विधानसभा पहुंचाए और वहाँ पहुंचकर पुनः जातिवाद का खेल खेले। इन्हें जातिवादी कीड़ा काट चुका है। बसपा उम्मीदवार अजय यादव के पक्ष से पिछड़ी जाति और दलित वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए विश्वनाथगंज विधानसभा की तर्ज पर रानीगंज विधानसभा में भी जातिवादी बीज बोकर उसका लाभ उठा सके। डॉ आर के वर्मा यह कार्य सिर्फ चुनाव में मतदान होने तक करते हैं। 


अपना दल एस के विधायक रहे डॉ आर के वर्मा के विषय में ईमानदारी से बात करें तो कोरोना संक्रमण काल में लोग ऑक्सीजन और जीवन रक्षक रेमडेशिविर इंजेक्शन के लिए जब भटक रहे थे तो यह घोर जातिवादी विधायक डॉ आर के वर्मा उस भीड़ में से स्वजातीय लोगों की छटनी कर स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखता था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रतापगढ़ के कार्यालय में विधायक डॉ आर के वर्मा के पत्र निकाल कर इस सच्चाई से लोग अवगत हो सकते हैं। डॉ आर के वर्मा में जनप्रतिनिधि होने के एक भी लक्षण विद्यमान नहीं हैं यह समाज का विदूषक है। इन्हें जनप्रतिनिधि ही कहना पाप है। इन्हें वोट देना तो दूर की बात होगी। आइये हम सुनाते हैं, इस जातिवादी नेता की असल विचारधारा की एक झलक, जिसके दम पर यह विधायक बनना चाहता है। 


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