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शनिवार, 8 जनवरी 2022

षड्यंत्रकारी, जालसाज का माहिर खिलाड़ी भूमाफिया जावेद अहमद का ठिकाना बना लेखपाल राम सिंह का सदर तहसील के पीछे संचालित दफ्तर

प्रतापगढ़ सदर तहसील के लेखपालों को भूमाफिया पालने का बढ़ा शौक, भूमाफियाओं से होते हैं लेखपालों के तालुकात, उनके साथ करते हैं शहर में प्रापर्टी का बेनामी धंधा...

 लेखपाल राम सिंह और उनके बगल खड़ा उनका चहेता भूमाफिया जावेद अहमद...

प्रतापगढ़। शहर प्रतापगढ़ बेल्हाघाट और सहोदरपुर सहित शहर सीमा से सटे क्षेत्र की लेखपाली करके सदर तहसील के लेखपालों ने प्रापर्टी का धंधा करके देखते ही देखते चंद दिनों में करोड़पति बन गए। सदर तहसील के कुछ लेखपाल तो स्वयं प्रापर्टी का धंधा शुरू कर दिए और कुछ बड़े भूमाफियाओं के साथ जुड़कर प्रापर्टी का बेनामी धंधा शुरू किये। बेल्हाघाट और सहोदरपुर के हल्का पाने के लिए सदर तहसील के लेखपाल साम, दाम, दंड, भेद तक का इस्तेमाल करके अपना हल्का बचाने में माहिर हो चुके हैं। जिले के जिलाधिकारी को हटाना आसान है, परन्तु अंगद की तरह पैर जमाये इस क्षेत्र के लेखपाल को सामान्यता हटाना बहुत ही कठिन और दुरूह कार्य है। उसे हटाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं, तब कहीं जाकर शहर बेल्हाघाट और सहोदरपुर के लेखपाल को हटते हैं। यदि दबाव में हट भी गए तो कितने दिनों के लिए हटे हैं, यह कह पाना भी मुश्किल है। अभी कुछ माह पहले सदर तहसील से हल्का बेल्हाघाट के लेखपाल सुशील कुमार मिश्र का तावादला कुंडा के लिए किया गया। अंत तक वह कुंडा जाने के लिए तैयार न थे। बड़े दबाव में वह कुंडा ज्वाइन किये। विधानसभा चुनाव बाद वह फिर से सदर तहसील आने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। क्योंकि जो मलाई यहाँ है वह कहीं नहीं है।            


ऐसे ही शहरी क्षेत्र के लेखपाल राम सिंह हैं जो देखने में बहुत सीधे और सरल एवं बहुत ही महीन हैं। उन्हें भी भूमाफिया पलने का शौक है। यह कोई आरोप नहीं बल्कि हकीकत है मुझे भी एक बार विश्वास नहीं हो रहा था कि लेखपाल राम सिंह भी भूमाफिया से सांठगांठ करते होंगे। परन्तु हकीकत जानकर मेरी भी आँखें खुली की खुली रह गई हिंदुस्तान बीज भंडार के उदघाटन के मौके पर शहर प्रतापगढ़ के हल्का सहोदरपुर लेखपाल राम सिंह जी भी पहुँचे थे। यह बात उस समय सार्वजनिक हुई जब लेखपाल राम सिंह के खासमखास भूमाफिया जावेद अहमद एक फोटो अपने फेसबुक टाइमलाइन पर अपलोड किया। भूमाफिया लेखपाल राम सिंह के सम्बंध को समझने के लिए सदर तहसील के पीछे कर्मचारियों के लिए बने आवास तक जाना होगा। सदर तहसील के पीछे कर्मचारियों का आवास है। सभी जर्जर आवास तो ध्वस्त कर दिए गए, परन्तु लेखपाल राम सिंह सहित आधा दर्जन लेखपालों के दबाव में एक जर्जर आवास को ध्वस्त नहीं किया गया। उसकी मरम्मत करके उसमें आधा दर्जन लेखपाल और राजस्व निरीक्षक राहुल सिंह अपना दफ्तर चलाते हैं। इसी दफ्तर में सुबह से शाम तक लेखपाल राम सिंह का चहेता षड्यंत्रकारी, कूट रचना का महारथी भूमाफिया जावेद अहमद भी आकर अपनी दुकान लगा लेता है। उसकी दुकान चलाने में लेखपाल राम सिंह की अग्रणी भूमिका है।


स्वभव से अत्यंत सरल और सादगी भरे अंदाज वाले लेखपाल राम सिंह अपने सदर तहसील के पीछे बने दफ्तर पर तो षड्यंत्रकारी, कूट रचना का माहिर खिलाड़ी भूमाफिया जावेद अहमद को अपने तख्त पर दिन भर लेटे रहने की इजाजत मानो दे दिया हो। बीच-बीच में भूमाफिया जावेद अहमद बाबागंज आकर चाय पान और नाश्ते की ब्यवस्था लेखपाल सिंह राम सिंह के लिए करता है। ऐसा भूमाफिया जावेद अहमद स्वयं कहता है। इसी ब्यवस्था के दम पर भूमाफिया जावेद अहमद लेखपाल राम सिंह के नाम को बेंच रहा है, जिसे लेखपाल राम सिंह समझ नहीं पा रहे हैं। जबकि ऐसी ही गलत निर्णयों की वजह से लेखपाल राम सिंह पर कुछ मामलों में कोतवाली नगर में मुकदमें भी दर्ज हो चुके हैं। फिर भी लेखपाल राम सिंह की आँख नहीं खुली। लगता है कि भूमाफिया जावेद अहमद जब तक लेखपाल राम सिंह के मान सम्मान का बेड़ागर्क नहीं कर देता तब तक उनकी आँख नहीं खुलेगी। क्योंकि जब बेल्हाघाट के हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र सदर तहसील के अपने कक्ष में होते थे तो भूमाफिया जावेद अहमद उनका भी दरबारी हुआ करता था। वर्कलोड़ बढ़ने पर लेखपाल सुशील कुमार मिश्र शहरी क्षेत्र के देवकली में अपने दूसरे आवास पर सारी सुख सुविधा से लैश एक आलीशान दफ्तर संचालित करते थे और भूमाफिया जावेद अहमद वहाँ तक की दरबारगीरी करता रहा। उनके कुंडा चले जाने से अब सिर्फ और सिर्फ लेखपाल राम सिंह का दफ्तर ही उसका ठिकाना है

  

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