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बुधवार, 5 जनवरी 2022

स्वीट्स हाउस यानि मिठाई की दुकानों के साथ-साथ किराना ब्यापारियों में भी रेडीमेड मिठाइयों को बेंचने की रहती हैं, होड़

मिठाई के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप...

सड़कों पर खुले में ठेले पर भी बिकती है,रेडीमेड मिठाइयां...

सरकार का आदेश है कि मिठाई की दुकानों पर बिकने वाली मिठाइयों की मैन्यूफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट लिखकर लगाए रखने का राज्य सरकार ने आदेश दे रखा है। ऐसे में किराना ब्यापारी और ठेलेवाले कैसे करेंगे राज्य सरकार के आदेश का अनुपालन ? सड़कों पर ठेले पर भी खुलेआम रेडीमेड मिठाइयां बिकती है। अधिकारियों के नाक के नीचे चल रहा रेडीमेड मिठाइयों का गोरखधंधा। चिराग तले अंधेरा की कहावत को सिद्ध कर रहे हैं, खाद्य औषधि प्रशासन विभाग से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी...


बिना खाद्य औषधि प्रशासन से लाइसेंस प्राप्त किये ही किराना ब्यापारी रेडिमेड मिठाइयों की खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। सुल्तानपुर, फैज़ाबाद और जौनपुर की रेडीमेड मिठाइयों की बिक्री का प्रतापगढ़ जिला गढ़ बन गया है।पड़ोसी जनपदों से रेडीमेड मिठाईयां डीसीएम ट्रक से लदकर आती हैं। जिला मुख्यालय सहित तहसील मुख्यालयों पर किराना की दुकानों पर अलग-अलग तरीके की मिठाइयां बेची जा रही हैं। रेडीमेड मिठाईयां यहां पर 200 से लेकर 300 रूपये प्रति किलो ग्राम तक बेची जा रही हैं। जिले का खाद्य औषधि प्रशासन विभाग अनजान बना हुआ है। मौका किसी खास खुशी का हो अथवा त्योहारों का, मिठाई न हो तो सारा मजा किरकिरा हो जाता है। मिठाई का नाम आते ही मुंह में पानी आना भी स्वाभाविक है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि मिठाई प्रेम की प्रतीक है। इन सबके वर्तमान में यदि आप मिठाई के शौकीन हैं और खरीदने जा रहे हैं तो थोड़ा सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि हो सकता है कि आपकी पसंदीदा मिठाई आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो। खरीदने से पहले यह परखना और जानना जरूरी है कि जो मिठाई आपको आकर्षित कर रही है हो सकता है वह खतरनाक रसायनों से तैयार हो अथवा सिंथेटिक हो। कहीं दुकानदार रेडीमेड मिठाई तो नहीं बेंच रहा है। 


जी हां ! आज कल कई मिठाईयों की दुकानों पर कुछ ऐसा ही हो रहा है। जहां सिंथेटिक छेना और रेडीमेड मिठाइयों के कारोबार का मकड़जाल बाजार पर हावी हो गया है। ऐसा नहीं कि हम आपको मिठाई न खाने की सलाह दे रहे हैं, बल्कि आपके स्वास्थ्य के प्रति आपको आगाह कर रहे हैं। इसी के साथ ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों को भी आगाह करने का प्रयास कर रहे हैं जो दुकानों पर सैंपल तो लेते हैं, लेकिन स्वार्थ में कार्यवाही करने से गुरेज कर जाते हैं। शायद यही वजह है कि आजकल सिंथेटिक दूध से बने छेने और रेडीमेड मिठाइयों से बाजार पटा पड़ा है और हम अत्याधुनिक होने की सनक में मिठाई के नाम पर सीधा जहर खरीदने और खाने के आदी होते जा रहे हैं। यह भी सही है कि बिना मेहनत के कम पूंजी में अधिक आय के चक्कर में पड़कर अच्छे से अच्छे दुकानदार भी अपने यहां मिठाई न बनवा कर रेडीमेड मिठाइयां सीना तान कर बेंच रहे हैं। वर्तमान में जनपद के साथ-साथ पड़ोसी जनपदों के कुछ व्यापारी जिले को निशाना बनाए हुए हैं। जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्र की बाज़ारो में मिठाई की दुकानों पर यह कारोबार खूब फल-फूल रहा है। जबकि प्रत्येक जिले में खाद्य औषधि प्रशासन का कार्यालय होता है और उसकी निगरानी स्वयं जिलाधिकारी करते हैं, फिर भी प्रत्येक जनपदों में मिलावट की मिठाइयाँ जिस तरह खुलेआम बेंची जा रही हैं, वह समूचे सिस्टम को मुंह चिढ़ाने जैसा है।  


बताते हैं कि जिला मुख्यालय पर भी कुछ ऐसी थोक की दुकानें हैं, जहां रेडीमेड मिठाइयां मिलती है। छोटे दुकानदार इसे अपने शोरूम में ले जाकर महंगे दामों पर बेच रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यदि देखा जाए तो सिंथेटिक और रेडीमेड छेना 80 रुपये में खरीद कर ढाई से 300 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं। इसके अलावा तमाम अन्य तरह की मिठाइयां भी रेडीमेड और सिंथेटिक मिल रही है। जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक साबित हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन मिठाइयों से धीरे-धीरे शरीर खोखला हो जाता है। सबसे बड़ी बात यह कि ऐसे खाद्य पदार्थों को बाजार में पहुंचने से रोकने के लिए बकायदा टीम बनी है। जो समय-समय पर दुकानदारों के यहां जाकर सैंपलिंग भी करती है। बावजूद इसके यह गोरखधंधा पूरी तरह बाजार पर हावी है। शर्मनाक पहलू यह कि विभागीय अधिकारी सेम्पल तो लेते हैं, लेकिन दुकानदारों पर कार्यवाही क्या होती है, यह कहना बहुत मुश्किल है। समूचे उत्तर प्रदेश में सिर्फ छः प्रयोगशालाएं हैं और मजेदार बात यह है कि इन प्रयोगशालाओं पर जो प्रभारी तैनात हैं वह राजधानी लखनऊ में भी कार्य देख रहे हैं और गोरखपुर की प्रयोगशाला का प्रभार संभाले हुए हैं। जरा सोचिये कि राजधानी लखनऊ से गोरखपुर तक एक ब्यक्ति दो प्रयोगशालाओं का चार्ज कैसे संभाल पायेगा ? कितनी इमानदारी से लिए गए सैम्पल की जाँच होगी ? यह बात स्वतः स्पष्ट है, समझाने की जरुरत नहीं है 


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