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सोमवार, 10 जनवरी 2022

प्रतापगढ़ के 248 सदर व 247 विश्वनाथगंज सीट इस बार बीजेपी गठबंधन तोड़कर खड़ा कर सकती है, अपना उम्मीदवार

कुंडा को छोड़कर भाजपा इस बार विधानसभा के चुनाव में बाबागंज व रामपुरखास विधानसभा में भी कमल खिलाने की कर ली है, तैयारी...

प्रतापगढ़ जनपद में कुल 7 विधानसभा सीटें...

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव- 2022 में भाजपा व अपना दल एस के बीच जिले की सीटों के बंटवारे को लेकर उलटफेर हो सकता है। अपना दल एस से सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा मंथन कर रही है। संघ और पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे के बाद 248- सदर व 247- विश्वनाथगंज विधानसभा सीट भाजपा के खाते में जाने की चर्चाओ ने जोर पकड़ लिया है। वहीं, रामपुरखास व बाबागंज (बिहार) में भी कमल खिलाने की रणनीति बनाई जा रही है। वर्ष- 2012 के विधानसभा चुनाव में जिले की सातों सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी मैदान में थे। हालांकि सभी सीटों पर भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। सदर, रानीगंज, पट्टी, विश्वनाथगंज सहित जिलेे की चार विधानसभा सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। वर्ष- 2013 में सपा के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री और विश्वनाथगंज विधायक राजाराम पांडेय का निधन हो गया। वर्ष- 2014 के लोकसभा चुनाव के साथ विश्वनाथगंज की सीट पर उपचुनाव हुआ था। जिसमें अपना दल एस ने भाजपा के सामने अपना प्रत्याशी उतारा था। जबकि लोकसभा चुनाव में अपना दल से भाजपा का गठबंधन हुआ था। 

प्रतापगढ़ की पांच विधानसभाओं के नाम...

विश्वनाथगंज विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में अपना दल के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। हालांकि उस समय अपना दल था और माँ व बेटी की एक ही पार्टी थी। परन्तु वर्ष- 16 में माँ-बेटी का वाक युद्ध भारत निर्वाचन, नई दिल्ली के दरबार में पहुँच गया। हालांकि विधानसभा चुनाव- 2017 के पहले भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बड़ी चालाकी के साथ माँ-बेटी के झगड़े को कैश करते हुए अपना दल एस का रजिस्ट्रेशन भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली में करा दिया और उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रयागराज के फूलपुर निवासी जवाहर लाल पटेल को बना दिया। यह सब कार्य अनुप्रिया पटेल की इच्छा पर होता गया और वर्ष-2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अमित शाह से अपना दल एस के साथ गठबंधन करके कृष्णा पटेल को ढक्कन बना दिया। इस कार्य के बदले अनुप्रिया पटेल से 248- प्रतापगढ़ विधानसभा की सीट भाजपा के खाते से अपने ब्यवसायिक रिश्ते से नजदीक हुए संगम लाल गुप्ता को दिला दिया। भगवा और मोदी लहर में प्रतापगढ़ से चार सीटें प्रतापगढ़, पट्टी, रानीगंज व विश्वनाथगंज पर भाजपा और गठबंधन दल अपना दल एस ने जीत दर्ज कर ली। 

प्रतापगढ़ की विधानसभा की सीट कुंडा व बाबागंज...

लोकसभा चुनाव-2019 में भाजपा ने अपना दल एस से प्रतापगढ़ की सीट वापस ले ली और भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने चहेते संगम लाल गुप्ता को भाजपा से लोकसभा उम्मीदवार बना दिया और प्रतापगढ़ के बदले सोनभद्र में अपना दल एस को एक सीट दे दी। सीट बदलने की खास वजह यह थी कि अपना दल से सांसद कुंवर हरिवंश सिंह का अनुप्रिया पटेल से ३६ का आकड़ा था। कुंवर हरिवंश सिंह, कृष्णा पटेल के गुट के माने जाते थे। इस तरह अमित शाह ने एक तीर से दो निशाना मारा। महज दो वर्ष में संगम लाल गुप्ता को अमित शाह ने विधायक से सांसद बना दिया। विधानसभा और लोकसभा में संगम लाल गुप्ता के नामांकन में एक खास बात देखने को मिली। महज दो वर्ष में विधायक संगम लाल गुप्ता की 2 करोड़ की सम्पत्ति कम हो गई।चर्चा तो यह भी हुई थी कि संगम लाल गुप्ता ने अपनी मुंबई की एक सम्पत्ति बेंचकर लोकसभा का टिकट खरीदा था।क्योंकि भाजपा से संगम लाल गुप्ता को कोई नहीं चाहता था कि वह अपना दल एस विधायक रहते हुए सांसद पद का उम्मीदवार उन्हें बनाया जाए। परन्तु किस्मत के धनी संगम लाल गुप्ता की लाटरी वर्ष-2019 में भी लग गई और मोदी के नाम पर प्रतापगढ़ की जनता ने उन्हें अपना भाग्य विधाता बना लिया।          


इस बार विधानसभा के चुनाव में भी भाजपा लोकसभा की तरह प्रतापगढ़ की दोनों सीटें अपना दल एस से वापस लेकर किसी दूसरी सीट पर उसे देकर विश्वनाथगंज और प्रतापगढ़ सदर की सीट पर जीत सुनिश्चित कराना चाहती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार भाजपा पट्टी विधानसभा को अपना दल एस को देना चाहती है भाजपा इस बात पर मंथन कर रही है कि प्रतापगढ़ से इस बार छः सीट उसके पक्ष में आ सके। इसके लिए भाजपा पिछले एक साल से मंथन कर रही है पिछले दिनों संघ व भाजपा की टीम के द्वारा किए गए सर्वे में मिले फीडबैक के बाद इसे लेकर चर्चा तेज है। पार्टी में जिले के पदाधिकारी भी इसके लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं। वह सदर व विश्वनाथगंज सीट को पाले में लाने के लिए पार्टी आलाकमान को यहां के समीकरण से भी उन्हें अवगत करा रहे हैं। प्रदेश कार्यकारिणी से आने वाले पदाधिकारियों के साथ भी बैठकों में सीटों के उलटफेर को लेकर मंथन हो रहा है। जिलाध्यक्ष हरिओम मिश्र ने बताया कि सदर व विश्वनाथगंज सीट को भाजपा के खाते में लाने के लिए प्रयास चल रहा है। पार्टी आलाकमान को भी इससे अवगत कराया गया है। इन दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी है।

 

भाजपा की निगाह इस बार बाबागंज व रामपुर खास विधानसभा सीट पर भी गड़ी हुई है। बाबागंज, विधानसभा सीट आरक्षित है। यहां से राजा भईया समर्थक विनोद सरोज निर्दल विधायक हैं। लंबे समय से यह सीट राजा भईया के कब्जे में है। इसके अलावा रामपुरखास विधानसभा सीट पर कांग्रेस से आराधना मिश्रा "मोना" विधायक हैं। वर्षों से यह सीट कांग्रेस के कब्जे में हैं। इस बार भाजपा इन दोनों सीटों पर कमल खिलाने की तैयारी में जुटी हुई है। बाबागंज में लगातार बैठक व सभाएं भी की गई हैं। रामपुरखास में मुख्यमंत्री ने भी जनसभा की थी। उधर कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" वर्ष-2019 में लोकसभा चुनाव से पहले अपने समर्थकों के कहने पर एक राजनीतिक दल का गठन किया और नाम रखा जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) रखा। भाजपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन के लिए कई बार की बैठक के बाद भी समझौता न हो सका। प्रतापगढ़ और कौशाम्बी लोकसभा चुनाव में राजा भईया ने उम्मीदवार उतारे परन्तु दोनों सीटों पर उनके उम्मीदवार मुंह की खा गए। दोनों की जमानत तक जब्त हो गई। विधानसभा चुनाव-2022 के लिए राजा भईया और उनके समर्थक भाजपा से गठबंधन बनाने के लिए परेशान है। भाजपा पर दबाव बनाने के लिए राजा भईया ने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से कुल 16 उम्मीदवार अभी तक उतार चुके हैं 


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