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गुरुवार, 16 दिसंबर 2021

सपा सुप्रीमों अखिलेश और प्रसपा मुखिया शिवपाल मिलकर लड़ेंगे आगामी उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव, बड़ी जद्दोजहद के बाद चाचा और भतीजे में हुआ गठबंधन

न न करते प्यार तुझी से हो गया,करते रहे इंकार मगर इकरार तुम्ही से हो गई की बोल को चरितार्थ कर गए चचा-भतीजा...

चाचा-भतीजा मिलकर लड़ेंगे आगामी विधानसभा-2022 का चुनाव...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश वर्ष-2022 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर गुरुवार को चाचा शिवपाल से भतीजे अखिलेश यादव ने मुलाकात की। लगभग डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में हुई गुफ्तगू के बाद चाचा और भतीजे ने गठबंधन पर सहमति जताई। अखिलेश ने सपा और प्रसपा के बीच गठबंधन होने की जानकारी फेसबुक और ट्वीटर पर पोस्ट डालकर दी। अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मुलाकात हुई और गठबंधन की बात तय हुई। क्षेत्रीय दलों को साथ लेने की नीति सपा को निरंतर मजबूत कर रही है और सपा और अन्य सहयोगियों को ऐतिहासिक जीत की ओर ले जा रही है।


गुरुवार को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष चाचा शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात करने पहुंचे थे। सूत्रों के मुताबिक अखिलेश दोपहर बाद लखनऊ शिवपाल के आवास पर मिलने पहुंचे। चाचा और भतीजे के बीच बंद कमरे में मुलाकात हुई। दोनों लोगों के बीच लगभग डेढ़ घंटे तक गुफ्तगू हुई। प्रसपा के एक नेता ने बताया कि अखिलेश के साथ सपा का कोई नेता साथ नहीं है। समझा जाता है कि अखिलेश और शिवपाल ने अर्से बाद हुई इस मुलाकात में एक दूसरे के प्रति गिले शिकवे दूर करने अलावा आगामी चुनाव में सीटों के बंटवारे पर भी विचार विमर्श किया। आपको बता दें कि यूपी विधानसभा के पिछले चुनाव के समय से ही अखिलेश और शिवपाल के रिश्तों में आई तल्खी का दौर जारी था। 


हालांकि शिवपाल ने आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होने पर पांच साल पुरानी तल्खी को दूर करने की शुरुआती पहल करते हुए अखिलेश से गठबंधन कर चुनाव लड़ने की पेशकश की थी। शिवपाल ने सपा में प्रसपा के विलय का विकल्प भी खुला रखते हुए कहा था कि अखिलेश को ही आगे की रणनीति के लिए कोई पहल करनी होगी। पिछले कुछ समय से अखिलेश भी शिवपाल की पहल पर सकारात्मक टिप्पणी करते हुए समय आने पर उनसे बात करने की बात कह रहे थे। वर्ष- 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश द्वारा सपा से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद शिवपाल ने प्रसपा का गठन कर चुनाव लड़ा था। इसका सीधा असर सपा के परांपरागत वोटबैंक में बंटवारे के रूप में पड़ा था। सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। परन्तु अहम् की लड़ाई ने सबकुछ बर्बाद करके रख दिया।   


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