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शनिवार, 4 दिसंबर 2021

योगी सरकार के दावे को झूठा साबित करती प्रतापगढ़ पुलिस, न्याय के लिये हप्ते भर से थाना व अधिकारियों के चक्कर लगा रही पीड़िता, नहीं लिखी गयी रिपोर्ट

मारने पीटने वालों की ओर से पुलिस ने दर्ज कर ली है रिपोर्ट,गिरफ्तारी के लिये पुलिस दे रही दबिश 

जानलेवा मामले में पुलिस ने नहीं लिखी रिपोर्ट,रक्तस्राव होने से महिला की बिगड़ रही हालत 


न्याय के लिये हप्ते भर से थाना व अधिकारियों के चक्कर लगा रही पीड़िता...

जनपद प्रतापगढ के अपराधी पुलिस से याराना सम्बन्ध होने से जहां वह उनसे बेखौफ रहते है वही गरीब व असहज लोग पुलिस को ही गुंडा मान उनसे खौफजदा बने रहते है, ऐसा जो लोगों का मानना है वह कदाचित अनुचित नही है। अक्सर देखने को मिला है कि असहज लोगों का ही उत्पीड़न पुलिस करती आ रही है। ऐसा ही एक मामला जेठवारा थाना का है जिसकी कहानी सुनकर हर कोई खाकी से नफरत भरी नजरों से देखने को मजबूर हो जायेगा। दहेज उत्पीडन से पीड़ित महिला मिथलेश पाल(30) पत्नी सुरेश पाल जेठवारा थाना अन्र्तगत भुवालपुर डोमीपुर(गौरबारी) को सास-ससुर, पति व देवर आदि ने मारपीट कर घर से भगा रखा है। 


खेत में मेहनत मजदूरी कर किसी तरह अपने एकलौते नाबालिक बच्चे के साथ रह उसका पालन पोषण करती है। यह हमेशा-हमेशा के लिये अपने मायके चली जाये इसके लिये उसे परिवार के लोग उसे मारते पीटते व प्रताड़ित करते रहे है। थकहार कर न्यायालय में दहेज उत्पीड़न का वाद दायर कर रखा है। जब से दहेज का मामला न्यायालय में दायर हुआ तब से उसके परिवार के लोग आये दिन किसी न किसी बहाना बनाकर मारते पीटते रहे है। तीन सालों में छह बार पीड़िता का मारा पीटा गया पर आज तक उसकी रिपोर्ट थाने में नही दर्ज की गयी। रिपोर्ट न दर्ज होने व पुलिस की अनदेखी से ससुरालीजनों के हौसले बुलंद रहे। नया मामला 25 नवम्बर की सुबह का है। देवरानी उर्मिला पाल पत्नी रमेश कुमार ने खेत के आलू के पौधे उखाडने का आरोप लगाते हुये गाली गलौज करने लगी। उसकी आवाज को सुनकर सास-ससुर, देवर देवरानी पट्टीदार उसके घर पर आ धमके। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ससुर सहदेव पाल ने पीछे से पीड़िता बहु मिथलेश के सिर पर डण्डे से प्रहार किया जिससे वह जमीन पर गिर गयी। 


तभी सास व उसकी अन्य दो बहु, देवर एक जुट होकर गाली देते हुये लात, घूसा से मारने पीटने लगे। किसी तरह उठ पाई तो गुहार लगाते हुये घर में भागी। तभी देवर ने उसके घर में घुसकर उसकी टांग घसीटते हुये बाहर ले आया। फिर उस तनहा अबला पर सहदेव एवं उनके दो अन्य भाइयों की बहु, बेटियां आदि उस अर्धनग्न जमीन पर पड़ी असहज महिला पर सभी दर्जन भर से अधिक महिलाओं के साथ अन्य लोग भी टूूट पड़े। लात, घूसा, अध्धा से उपरोक्त लोग पीटते रहे। वही पट्टीदार अन्य ललकारते रहे कि आज यह बचने न पाये। चिल्लाता हुआ बच्चा अपनी मां को पिटता देख वीडियो बना रहा था। जिसे बाद में इन्हीं लोगों ने मारपीट कर छीन लिया। उसकी व उसके बेटे की चीख पुकार सुनकर गांव वाले दौड़े तब उपरोक्त लोग उसे अधमरा अवस्था में छोड़कर भागे, तब महिला की जान बची। सिर, पेट, कमर व पीठ के साथ गुप्तांग में काफी चोट आने से वह कराह रही थी। उसी दिन पीड़िता किसी तरह थाने पहुंची। 


प्रार्थना पत्र लेने के बाद एसओ ने कार्यवाही करने व जांच करवाने की बात कहकर उसको वापस घर भेज दिया। वही मार पीट करने वाले दर्जनभर से अधिक लोगों की तरफ से उर्मिला पत्नी रमेश कुमार की तहरीर पर रिर्पाट दर्ज कर ली। अगले दिन फिर पीड़िता थाने गयी। एसओं ने तहरीर बदलने के बाद रिपोर्ट दर्ज करने की बात कही। फिर तहरीर बदल कर उसने थाने में दी। अगले दिन एफआइआर की कापी मिलने की बात कही। तीसरे दिन जब थाने गयी तब एसओ अवकाश पर चले गये। प्रभारी एसओ ने कहा कि एसओ आयेगे तब रिपोर्ट लिखी जायेगी। थकहार कर पीड़िता सीओ सदर के पास जाकर अपना दुखड़ा रोया। वहां से उसे थाने जाने की बात कही गयी। शुक्रवार को पुनः पीड़िता थाने गयी। तब एसओ ने स्वतः जांच करने व आवश्यक कार्यवाही करने की बात कही। दोपहर तक पीड़िता को थाने पर बैठाये रखने के बाद उसे कहा कि आज जो तहरीर दी हो इसे बदलो और दूूसरी दो फिर तुम्हारा एनसीआर दर्ज कर मेडिकल करवाता हूं। 


तहरीर बदलने से मनाकर पर एसओ ने रिपार्ट दर्ज करने से मना कर दिया। तब पीड़िता असहज वापस घर लौट आई। उसने तहरीर में सिर, गले, कमर में काफी चोट आने के साथ गुप्तांग में काफी चोट आने से रक्तस्राव होने की बात कही। पर एसओ के द्वारा अनसुनी करन पर पीड़िता अपने बच्चे के साथ वापस लौट आई। वही दूसरी ओर जेठवारा थाने के क्षेत्रीय दरोगा बरबचाव करने के लिये दौड़े ग्रामीणों का धड़पकड़ करने के लिये ताबड़तोड़ दबिश दे रही है। दिनभर में तीन से चार बार दबिश देने से गांव के लोगों के साथ बच्चे भी सहमें हुये। खैर पुलिस की माया पुलिस ही जाने गरीब और असहज इनकी माया को शायद कभी नही जान सकता। यही कारण है कि दबंग लोगों को पुलिस थाने बुलाती है तो वह शान से जाते है वही गरीबों का जब बुलावा आता है तो वही डर से कांपते नजर आते है। और महिलाओं की सुरक्षा व उनके सम्मान का दंभ बेशक सरकार भरती नजर आती है पर पुलिस महकमा उनके इस दावे को खोखला साबित करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड रही है। 


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