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मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

बेसिक शिक्षा विभाग की दोषपूर्ण नीति से प्रतापगढ़ में छः महीने से खाली है, बीएसए का पद

प्रतापगढ़ से दो खण्ड शिक्षा अधिकारियों का तबादला हुआ था, एक को रोक कर कार्यवाहक बीएसए का चार्ज मिला तो दूसरे को कार्यमुक्त कर उसकी कर दी गई, विदाई 

कैबिनेट मंत्री मोती सिंह का चहेता प्रभारी BSA सुधीर कुमार सिंह 

प्रतापगढ़ में बेसिक शिक्षा विभाग में बीएसए का पद 6 महीने से खाली है कहते हैं कि प्रतापगढ़ जनपद में कोई अफसर आना नहीं चाहता, परन्तु मेरा कहना है कि जो अफसर प्रतापगढ़ आ गया और यहाँ का खारा पानी चख लिया तो वह प्रतापगढ़ से जाना भी नहीं चाहता यदि मेरी बातों पर भरोसा नहीं तो पूर्व बीएसए अशोक कुमार सिंह को ही देख लीजिये प्रतापगढ़ में बीएसए रहे डॉ ब्रजेश मिश्र दूसरी बार प्रतापगढ़ आये और जिला विद्यालय निरीक्षक पद पर रहे। ये सारे अफसर शिक्षा विभाग से करोड़ों रूपये ऊपरी आमदनी करके गए। प्रतापगढ़ जनपद में बीएसए रहे अशोक कुमार सिंह के जाने के बाद अमित कुमार जी आये, परन्तु उन पर विभागीय कार्यवाही हुई और वह भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित हो गए तो कैबिनेट मंत्री मोती सिंह के दरबारी खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर सिंह को बीएसए का चार्ज कई महीनों से मिला हुआ है 


कैबिनेट मंत्री की मेहरबानी से बीएसए प्रतापगढ़ का चार्ज पाकर खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह फूले नहीं समा रहे हैं वह स्वयं कहते हैं कि वह योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री के चहेते हैं खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह जाति से क्षत्रिय है जो खंड शिक्षा अधिकारी रहकर विगत छः महीने से प्रतापगढ़ में कार्यवाहक बीएसए का चार्ज लेकर मलाई काट रहे हैं इसलिए प्रतापगढ़ को नया बीएसए नहीं मिल सका। विधानसभा चुनाव-2022 एकदम सन्निकट है और अधिसूचना कहीं जारी हो गई तो प्रतापगढ़ को नया बीएसए मिलने से रहा प्रभारी बीएसए सुधीर कुमार सिंह ही चुनाव का भी बजट आसानी से खा सकेंगे लगता है कि अपनी पकड़ और सेटिंग के बल पर खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह प्रतापगढ़ के प्रभारी बीएसए बने रहेंगे उनका कहना है कि जब अशोक कुमार सिंह "यादव" होकर जिले में बीएसए पद पर सालों रह सकते हैं तो हम क्या साल भर भी प्रभारी बीएसए नहीं रह सकते। 


योगी सरकार के ढुलमुल रवैये से प्रतापगढ़ में अभी तक नए बीएसए के न आने से बेसिक शिक्षा विभाग का हाल बेहाल है। रसूखदार खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह प्रतापगढ़ में कई सालों से जमे हैं। अशोक कुमार सिंह जब प्रतापगढ़ में बीएसए के पद पर तैनात थे तो उनके कार्यकाल में मंगरौरा में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी सुशील कुमार कनौजिया और सदर में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी राम शंकर चहेते खण्ड शिक्षा अधिकारियों में से रहे, परन्तु दोनों खंड शिक्षा अधिकारियों को रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने धर दबोचा और दोनों को जेल भेज दिया था। उस समय बीएसए रहे अशोक कुमार सिंह के ये दोनों खंड शिक्षा अधिकारी दोनों भुजाओं के रूप में मशहूर थे।खंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार तिवारी का सिद्धार्थनगर के लिए तवादला हुआ था तो सुधीर कुमार सिंह का अमेठी के लिए तबादला हुआ। परन्तु कैबिनेट मंत्री मोती सिंह ने दोनों खण्ड शिक्षा अधिकारियों का तबादला रोक रखा था। 


तत्कालीन बीएसए प्रतापगढ़ अशोक कुमार सिंह के जनपद से जाने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह को कार्यवाहक बीएसए प्रतापगढ़ का चार्ज मिला तो संतोष कुमार तिवारी को कार्यमुक्त कर दिया गया। उन्होंने किसी तरह अपना तबादला आजमगढ़ कराया, परंतु खुद को मंत्री मोती सिंह का चहेता कहने वाले खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह जनपद में प्रभारी बीएसए के रूप में जमें हुए हैं। प्रतापगढ़ का खारा पानी खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह को अधिक शूट कर रहा है। योगी सरकार में वैसे भी क्षत्रिय अधिकारियों की बल्ले-बल्ले है। उन्हें लगता है कि योगी राज में वह भी अपना भाव सातवें आसमान पर रखे रहने में क्यों चूके ? क्योंकि अखिलेश यादव के कार्यकाल में सारे यादव अफसर अपनी मनमानी करने से बाज़ नहीं आते थे। यादव अफसरों को लगता था कि मानों वही मुख्यमंत्री हों ! उदाहरण के लिए प्रतापगढ़ में अखिलेश यादव कार्यकाल में एक प्रभारी डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव थे जिनके जलवे लोगों को आज भी याद हैं। यही हाल मायावती के कार्यकाल में दलित अफसरों के हो जाते हैं वो तो स्वयं को हिटलर मान बैठते हैं। इस तरह जातीय समीकरण वाली नौकरशाही से जनपद और प्रदेश को कब मुक्ति मिलेगी...???


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