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शनिवार, 4 दिसंबर 2021

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव-2022 में 257 प्रत्याशी नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, भारत निर्वाचन आयोग ने किया अयोग्य घोषित

आगामी विधानसभा चुनाव-2022के चुनावी खर्च पर चुनाव आयोग रखेगा, विशेष निगरानी...

भारत निर्वाचन आयोग ने दिया अहम् फैसला... 

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 के चुनाव में इस बार राज्य के कुल 257 लोग चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने इन लोगों को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिया है। चुनाव आयोग ने पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में इन लोगों द्वारा चुनाव लड़ने और परिणाम आने के एक महीने बाद समय से और सही ढंग से अपने चुनावी खर्च का ब्यौरा आयोग को नहीं दिया। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इन 257 लोगों में से 34 लोग वर्ष-2019 का लोकसभा का चुनाव लड़े थे, बाकी 213 लोग 2017 में विधान सभा चुनाव के प्रत्याशी थे।


चुनाव लड़ने के लिए बरसाती मेढ़क सरीखे बहुत से लोग फुदकते रहते हैं, परन्तु चुनाव में होने वाले खर्च को चुनाव आयोग द्वारा दिए रजिस्टर में भरकर देने से भाग खड़े होते हैं। कई बार चुनाव आयोग की नोटिस के बाद भी चुनावी खर्च रजिस्टर जमा न करना यह दर्शाता है कि वह चुनाव के लिए कितने जागरूक हैं ? चुनाव के दौरान चुनाव आयोग एक ब्यय प्रेक्षक अलग से जिले में तैनात करता है और वह ब्यय प्रेक्षक पूरे चुनाव उम्मीदवारों पर निगरानी रखता है। उसके बाद भी ये उम्मीदवार अपना चुनावी ब्यय रजिस्टर जमा नहीं किये और चुनाव आयोग ने अंततः निर्णय लिया कि इस बार विधानसभा चुनाव-2022 में 257 लोग चुनाव लड़ने की अर्हता खो दी है


हालांकि इन 257 लोगों में सर्वाधिक संख्या निर्दलीय उम्मीदवारों की ही है मगर कुछ प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने भी पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद अपने चुनावी खर्च का ब्यौरा आयोग को समुचित ढंग से नहीं दिया या बिल्कुल नहीं दिया। इन प्रमुख दलों में सर्वाधिक 12 उम्मीदवार राष्ट्रीय लोकदल के थे। इसके बाद छह उम्मीदवार पीस पार्टी के, पांच एनसीपी के, चार-चार उम्मीदवार सीपीआई और बसपा के थे। जबकि एआईएमआईएम के दो व निषाद पार्टी के दो उम्मीदवार थे। सीपीआईएमएल के भी दो उम्मीदार थे। कांग्रेस पार्टी के भी एक उम्मीदवार को चुनाव खर्च का विवरण न जमा किये जाने पर आयोग्य घोषित किया गया है। इन सभी को एक साल के लिए चुनाव लड़ने से रोका गया है यह अवधि अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही खत्म होगी।

इस बार के चुनाव में चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के चुनाव खर्च की रोजाना मानीटरिंग किये जाने के लिए चुनाव खर्च पर्यवेक्षक के साथ ही आयकर विभाग के अधिकारियों के विशेष जांच दल भी सक्रिय किये जाने की व्यवस्था की है। मतदाताओं को वोट के बदले नोट और शराब के प्रलोभन आदि दिये जाने की भी सख्त निगरानी की जाएगी। चुनाव में धनपशु उम्मीदवार मतदाताओं से मत देने के बदले उन्हें प्रलोभन के तौर पर नगदी और गिफ्ट आदि देकर उनका मत अपने पक्ष में पाना चाहते हैं भारत के किसी भी चुनाव की बात करें तो उसकी हकीकत यह कि जो उम्मीदवार चुनाव लड़ता है, वह न नामांकन अपना भरता है और न ही चुनावी खर्च का ब्यय रजिस्टर ही तैयार करता है चुनाव में नामांकन से लेकर चुनावी ब्यय रजिस्टर तैयार करने के लिए उम्मीदवार एक जानकर टीम की सहायता से उसका निष्पादन करता है वह तो सिर्फ हस्ताक्षर करता है

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