Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

शनिवार, 18 दिसंबर 2021

लड़कियों के शादी की न्यूनतम उम्र सीमा 21 वर्ष होना लैंगिक समानता का अहम कदम : मंत्री स्वाती सिंह

बाल विवाह से बालिग विवाह शुरू हुआ,अब बालिग उम्र हो जाने के बाद 3वर्ष लड़कों की तरह लड़कियों की उम्र का निर्धारण कर देने से लड़के और लड़कियों में समानता तो आयेगी,परन्तु उसके लिए अभिभावकों के साथ समाज को भी लड़कियों के प्रति अपनी धारणा में करना होगा बदलाव और लड़कियों को भी अपनी सोच में करना होगा,परिवर्तन 

मंत्री स्वाती सिंह...

समाज में पहले बाल विवाह हुआ करता था। आज भी जहाँ शिक्षा का अभाव है और कानून का डर नहीं है, वहाँ बाल विवाह होते हैं। परन्तु शिक्षा की वजह से समाज में 90 फीसदी लड़कियों की शादी अब बालिग होने पर ही हो रही है। इसी बीच मोदी सरकार ने लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने की पहल की है। मौजूदा कानून के मुताबिक, देश में पुरुषों की विवाह की न्यूनतम उम्र 21 और महिलाओं की 18 साल है अब सरकार बाल विवाह निषेध कानून, स्पेशल मैरिज एक्ट और हिन्दू मैरिज एक्ट में संशोधन करने पर विचार कर रही है। जिसके लिए टास्क फोर्स गठित किया जा चुका है टास्क फोर्स का कहना था कि पहले बच्चे को जन्म देते समय बेटियों की उम्र 21 साल होनी चाहिए विवाह में देरी का परिवारों, महिलाओं, बच्चों और समाज के आर्थिक सामाजिक और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है


देखा जाए तो ये वाकई लैंगिक समानता के लिए अहम कदम है। परन्तु समाज के सभी वर्ग को इसके दुष्परिणाम पर भी नजर रखना होगा क्योंकि देश में जब अपराध की समीक्षा की जाती है और नाबालिग लड़कियों के भागने और थानों में दर्ज पास्को एक्ट सहित गुमशुदगी अथवा अपहरण के मामले में लड़की की बरामदगी के बाद पता चलता है कि लड़की नाबालिग है और स्वतः अपने मन से किसी बालिग अथवा नाबालिग लड़के के साथ जानबूझकर चली गई थी पुलिस बरामदगी के बाद नाबालिग लड़की यदि अपने घरवालों के साथ जाने से मना कर देती है तो उसे नारी निकेतन भेज दिया जाता है और लड़के को जेल भेज दिया जाता है। इस जटिल समस्या से भी देश की सरकार और राज्य सरकारों सहित न्यायालयों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। चूँकि ऐसे मामले इधर बीच अधिक संख्या में देखने व सुनने को मिल रहे हैं। जहाँ लड़कियों की शादी वाली उम्र बढ़ाने से उनके फायदे हैं,वहीं उसके दुष्परिणाम भी देखने को मिलेंगे, जिस पर अभी से विचार करना होगा।     


देश में लड़कियों की शादी के मामले में 21 वर्ष की उम्र में उनकी शादी करने से उनको अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए अच्छा मौका तो मिलेगा। परन्तु उसकी संख्या नगण्य होगी। उसके लिए समाज में जागरूकता अभियान चलाना होगा। जिस तरह देश में स्वच्छता अभियान की मुहीम चलाई गई, ठीक वैसे ही लड़कियों को बालिग होने तक उन्हें हर जोखिम से बचाने के लिए उन्हें जागरूक करना होगा मंत्री स्वाती सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी जो कहते हैं, वह करते हैं। इसके साथ ही मातृ मृत्युदर में भी कमी आएगी। ये बातें उत्तर प्रदेश सरकार में बाल विकास एवं महिला कल्याण  राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) स्वाती सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री जी हर कदम पर आधी आबादी की प्रगति की बात सोचते रहते हैं। इसी के तहत उन्होंने तीन तलाक पर कानून लाकर मुस्लिम महिलाओं को अधिकार दिया। इससे वे भी आज अपने हक की बात करने लगी हैं। लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने पर सर्वप्रथम बच्चियों में समानता का बोध होगा, क्योंकि लड़कों के शादी की उम्र पहले से ही 21 वर्ष है। 


श्रीमती सिंह ने कहा कि वर्ष- 2018 में ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दोनों की शादी की न्यूनतम उम्र एक समान करने की सिफारिश की थी। इसके लिए कई महिला संगठन भी सिफारिश कर चुके हैं। लड़कियों के शादी की न्यूनतम उम्र कम होने से उनके उच्च शिक्षा में भी बाधक बनता है। इस नये कानून के बन जाने से लड़कियों की अच्छी शिक्षा भी मिलने की दर बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि 18 की उम्र में तो बच्चे अभी उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे होते हैं। परिवार के गार्जियन इसी उम्र में शादी की सोचने लगते हैं। इससे अधिकांश बच्चियों की उच्च शिक्षा का सपना अधूरा रह जाता है। श्रीमती सिंह ने कहा कि यह महिलाओं के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे उनके विकास का रास्ता प्रशस्त होगा। समानता के बोध के साथ ही उनके आर्थिक विकास में भी बांधाओं को दूर करेगा।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Top Ad

Your Ad Spot

अधिक जानें