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गुरुवार, 18 नवंबर 2021

बेल्हा शहर प्रतापगढ़ में सदर तहसील के बेल्हाघाट के लेखपाल रहे सुशील कुमार मिश्र का कारनामा, भूमिधरी जमीन को नियम विरुद्ध नॉन जेड ए भूमि के रूप में बाँध दिया खाता

मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री सहित प्रमुख सचिव राजस्व, उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से प्रतापगढ़ के मोहर अली ने दर्ज कराई शिकायत...!!!


प्रतापगढ़ शहरी क्षेत्र के लोग होशियार हो जाएं, वह अपना खसरा और खतौनी एक बार जरूर देख लें कि कहीं उनके भूमिधरी खाते की जमीन को नॉन जेड ए की जमीन में कन्वर्ट कर किसी दूसरे ब्यक्ति के नाम खाता तो नहीं बाँध दिया गया है...!!!

पूर्व लेखपाल सुशील कुमार मिश्र के कारनामें की CMसे हुई शिकायत...

राजस्व विभाग में हेरफेर और गड़बड़ी करने का मामला आज जो सार्वजनिक किया जा रहा है, वह प्रतापगढ़ सदर तहसील के बेल्हाघाट शहरी क्षेत्र का है। जहाँ के हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र का तवादला पिछले माह बड़ी शिकायत के बाद कुंडा तहसील के लिए कर दिया गया और बिना समय दिए बेल्हाघाट हल्के का चार्ज दूसरे लेखपाल को दे दिया गया। बेल्हाघाट के रहने वाले मोहर अली ने उपजिलाधिकारी सदर, प्रतापगढ़ को शिकायती पत्र देकर पूर्व हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र और वर्तमान राजस्व निरीक्षक राहुल सिंह पर आरोप लगाया है कि उसकी भूमिधरी खाते की जमीन को दूसरे के नाम नॉन जेड ए के खतौनी में लगभग 10 खण्डों में खाता बाँध दिया और खतौनी जारी कर दी है शिकायतकर्ता मोहर अली का कहना है कि 1369 फसली से आजतक उसके नाम चली आ रही है, परन्तु तत्कालीन हल्का लेखपाल और कानून गो ने बेल्हाघाट में खाता संख्या- 00697 की गाटा संख्या- 157 के सम्बन्ध में अवैध रूप से सुविधा शुल्क लेकर भूमिधरी खाते की जमीन के सम्बन्ध में दिनांक-01-01-2020 को अपनी आख्या में उक्त भूमि को केवल तीन ही खातेदारों के नाम नॉन जेड ए के रूप में दर्शाया था, उन्हीं दोनों लोगों ने दिनांक-21-10-2021 को 10 खंडों में भिन्न-भिन्न लोगों के नाम से नॉन जेड ए में फेंक इन्द्राज कर दिया और बदले में मोटी रकम वसूल की है

भूमिधरी जमीन में से नॉन जेड ए में कन्वर्ट कर खाता बाँध देने का है,आरोप...

जबकि बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना उद्धरण खतौनी में कोई भी अमलदरामद लेखपाल और राजस्व निरीक्षक को अधिकार नहीं है कि वह उसमें इन्द्राज कर दें। उक्त कृत्य उ प्र शासन द्वारा शासनादेश का उल्लंघन है। प्रतापगढ़ जनपद के सदर तहसील में नॉन जेड ए की खतौनी सन 1422 फसली के बाद से नहीं बनाई गई है, जबकि नियमानुसार नॉन जेड ए की खतौनी प्रत्येक वर्ष बनाना चाहिए नॉन जेड ए की खतौनी सन 1423 से लेकर सन 14239 फसली तक नहीं बनाई गई हैसदर तहसील में तैनात हल्का लेखपाल और कानून गो का सम्बन्ध भूमाफियाओं से है और भूमाफियाओं से सांठ गांठ करके मोटी रकम वसूल करने का आरोप शिकायतकर्ता ने लगाया है शिकायत कर्ता की बातों पर यकीन करें तो डीएम और एडीएम साहेब के नाम से भू राजस्व निरीक्षक के द्वारा वसूली की जा रही है उक्त शिकायत मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री सहित प्रमुख सचिव राजस्व, उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से भी मोहर अली ने दर्ज कराई है और माँग किया है कि वर्ष-1422 फसली की खतौनी को अविलम्ब सील कराकर पिछले अभिलेखों के आधार पर 1422 फसली के बाद की खतौनी बनाई जाए, ताकि अभिलेखों में हेरफेर न किया जा सके

एक ही गाटा संख्या-157में ZA और NON ZAकी बनी खतौनी...

प्रतापगढ़ के सदर तहसील में बेल्हाघाट हल्का बड़े विवादों में रहा है यहाँ के हल्का लेखपाल करोड़ों रूपये कमाकर रसूखदार बन गए। उनके सामने एक जिलाधिकारी की माली हालत उनसे कमतर होगी एक लेखपाल के पास इतनी बेशुमार दौलत कहाँ से आयी यह सवाल सिसटम में बैठे अफसर नहीं पूँछते। जानते हो क्यों ? क्योंकि उन अफसरों को भी ये हल्का लेखपाल उनका हिस्सा पहुँचाया करते हैं। इसलिए प्रतापगढ़ के बेल्हाघाट हल्के में कई लेखपाल अपनी तैनाती कराने के लिए परेशान रहते हैं। प्रतापगढ़ को बेल्हा भी कहते हैं और सदर तहसील में एक मौजा राजस्व गाँव बेल्हाघाट है। बेल्हाघाट में हल्का लेखपाल स्व रियाज अहमद कई वर्षों तक अपना जलवा बिखेर रखे थे और लेखपाल होते हुए अरबों रुपये अर्जित किये। रियाज अहमद के बाद अरुण सिंह को बेल्हाघाट पर तैनाती मिली। अरुण सिंह के बाद राम सिंह को बेल्हाघाट में तैनात किया गया। रामसिंह को शहर के दूसरे राजस्व गाँव सहोदरपुर में तैनात करके वहाँ के हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र को बेल्हाघाट का लेखपाल बनाया गया। संयोग से सुशील कुमार मिश्र के पिता और बाबाजी दोनों राजस्व विभाग में लेखपाल रहे। लेखपाल पद पर मृतक के रूप में सुशील मिश्र को नियुक्ति मिली थी।


राजस्व विभाग की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हल्का लेखपाल की होती है। सच तो यह है कि यही हल्का लेखपाल ही सारी गड़बड़ी के जनक होते हैं। राजस्व विभाग में रिश्वत की प्रथम सीढ़ी लेखपाल को कहा गया है। सारे झगड़े इन्हीं लेखपालों की वजह से शुरू होते हैं। जमीन जायदाद में हेरफेर करके दो पक्षों को लड़ाना हल्का लेखपाल की नियत होती है। यह समस्या उत्तर प्रदेश की प्रत्येक तहसीलों में है। फर्क सिर्फ इतना हो सकता है कि कहीं कम है तो कहीं अधिक। शहर और कस्बे के लेखपालों की बात करें तो वहाँ लूट खसोट करने का अधिक मौका होता है। शहरी क्षेत्र होने के कारण शहर की जमीने अधिक भाव की होती हैं। इसलिए वहाँ के हल्का लेखपाल अधिक रिश्वतखोर होता है

 

जनता को हड़काने के लिए लेखपाल सुशील कुमार मिश्र कहते थे कि हमें नहीं जानते, हम खानदानी लेखपाल हैं। हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। हम सारे अधिकारियों को मैनेज करके रखते हैं। सुशील कुमार मिश्र की बात को लोग सही भी मान लेते थे, क्योंकि कई लोग सामूहिक रूप से लगकर शिकायत किये और उन्हें हटाने का प्रयास भी किये, परन्तु असफल रहे। एक जिलाधिकारी को हटाना आसान था, परन्तु बेल्हाघाट पर कुण्डली मारकर बैठा हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र को बेल्हाघाट से हटाना कठिन था। फिर भी सुशील कुमार मिश्र का तवादला सदर तहसील से कुंडा तहसील किया गया जो एक तरह से सुशील कुमार मिश्र को दंड स्वरूप दिया गया है। बेल्हाघाट हल्के से सुशील कुमार मिश्र के हटते ही शिकायतों का दौर शुरू हुआ जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुशील कुमार मिश्र ऐसे लेखपालों में हैं जो बिना किसी आधार और साक्ष्य के खतौनी में नया खाता बाँध देते हैं और खतौनी जारी कर देते हैं। कुछ लेखपाल तो इतने ढीठ और निरंकुश हैं कि वह जमीन यानि भूमि की नवैयत ही बदल देते हैं।


शहर प्रतापगढ़ में 99 फीसदी तालाबी आराजी की नवैयत बदलकर हल्का लेखपालों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत करके उसे बेंच खाया। ऐसे ही जगलर लेखपालों में सुशील कुमार मिश्र का नाम आता है। शहरियों को सुशील कुमार मिश्र से बहुत शिकायत थी। शिकायत की वजह से जिलाधिकारी प्रतापगढ़ डॉ नितिन बंसल ने सुशील मिश्र का सदर तहसील से कुंडा तहसील में तवादला कर दिया है। शहरवासी बेल्हाघाट के हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र के क्रिया कलापों से तंग हो गए थे। लेखपाल सुशील मिश्र पर क्षेत्र में खसरा, खतौनी में हेरफेर करने के आरोप लगते रहे हैं। मुँह माँगी रकम बिना वसूल किये सुशील कुमार मिश्र कोई काम नहीं करते थे। पूर्व में लगाई गई अपनी ही रिपोर्ट को झूठी बता देते थे। दूसरे पक्षकार के हक में फिर से धन लेकर रिपोर्ट लगा देने की विशेषज्ञता सुशील कुमार मिश्र में समाहित थी। नॉन जेड ए की खतौनी में हल्का लेखपाल सुशील कुमार मिश्र खेल करने के उस्ताद बन चुके थे। उनकी तैनाती सदर तहसील प्रतापगढ़ में 12वर्षों से अधिक समय से थी। बेल्हाघाट से पहले सुशील कुमार मिश्र सहोदरपुर शहरी क्षेत्र के हल्का लेखपाल थे। शहर बेल्हाघाट की लेखपाली करने के लिए दो प्राइवेट मुंशी रखे थे। सुनकर ताज्जुब की बात लगती है कि एक हल्का लेखपाल सरकारी कार्य निपटाने के लिए दो प्राइवेट मुंशी रखे।


शहर के लेखपालों को तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम, सीआरओ सहित जिलाधिकारी को मैनेज करते हुए डाक बंगले के खर्च को अलग से देखना पड़ता है। जिले में आये VVIP को सारी सुख सुविधा का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। लेखपाल सुशील मिश्र बेशकीमती जमीन के विवाद में जमकर वसूली करते थे। पूर्व सदर एसडीएम मोहनलाल गुप्ता और पूर्व एडीएम प्रतापगढ़ शत्रोहन वैश्य के चहेते लेखपालों में सुशील मिश्र की गणना होती थी। तहसील सदर में घुसते ही बाएं हाथ पर एक कमरा कब्जा कर रखा था। उस कमरें में इनवर्टर आदि सुविधाओं की विशेष सुविधा थी। चलने के लिए लग्जरी कार, शहर में अचलपुर विकास कालोनी में बंगला और देवकली में प्राइवेट दफ्तर बनाकर महीने में लाखों रुपये का वारा न्यारा करते थे। जिलाधिकारी, मंडलायुक्त सहित राजस्व परिषद एवं उत्तर प्रदेश शासन से लगातार शिकायत हो रही थी। एसडीएम सदर और अपर जिलाधिकारी प्रतापगढ़ सहित मुख्य राजस्व अधिकारी भी सुशील कुमार मिश्र का सपोर्ट कर देते थे, जिससे सुशील कुमार मिश्र बच जाया करते थे। शिकायतों के मद्देनजर जिलाधिकारी प्रतापगढ़ डॉ नितिन बंसल ने सुशील कुमार मिश्र का सदर तहसील से कुंडा तहसील में तवादला कर दिया।


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