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बुधवार, 3 नवंबर 2021

निजी अस्पतालों में मरीजों और उनके तीमारदारों की जेब पर डकैती डाली जाती है,विरोध करने पर कई तरीके से करते हैं,परेशान

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत से निजी अस्पताल द्वारा की जाती है,मनमानी 


निजी अस्पताल बना लूट का अड्डा,स्थानीय लोगों की बढ़ी मुसीबतें...

रायबरेली महराजगंज क्षेत्र में कुकुरमुत्ते सरीखे जगह-जगह सीएमओ दफ्तर से लाइसेंस लेकर निजी अस्पताल  तो खुल गए हैं, परन्तु उन पर नियंत्रण करने के लिए सिस्टम में कोई आगे नहीं आ रहा है। प्राइवेट अस्पताल लूट का अड्डा बन गए हैं। जिले में इन दिनों निजी अस्पताल में बिना किसी रेट बोर्ड के ही मनमानी तरीके से मरीजों और उनके तीमारदारों से निजी अस्पताल वाले धन उगाही कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी जांच का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ते लेते हैं। ऐसा ही एक हॉस्पिटल महराजगंज कस्बे के हैदरगढ़ रोड़ पर लोक सेवा हॉस्पिटल के नाम से संचालित किया जा रहा है। जहां ऑपरेशन से लेकर हर प्रकार के मर्ज का इलाज कुशल चिकित्सकों द्वारा किये जाने का दावा किया जाता है और मरीजों एवं उनके तीमारदारों से मनमाने ढ़ंग से सुविधाओं के नाम पर धन उगाही की जाती है। 


आरोप है कि लोक सेवा हॉस्पिटल में मामूली मर्ज को डॉक्टर द्वारा गंभीर बीमारी बताकर अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता है भर्ती के करने के बाद मरीज और उसके तीमारदारों से खेल शुरू किया जाता है और डिस्चार्ज होने तक लाखों रुपए की उनसे धन उगाही की जाती है। आरोप तो यह भी है कि मरीज के परिजनों को इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती है। छह-सात दिन बीत जाने के बाद परिजनों के हाथ में लाखों रुपए इलाज का बिल थमा दिया जाता है। क्षेत्र में चर्चा तो यह भी है कि जब मरीज के परिजन द्वारा बिल अदा नहीं किया जाता है तो मरीज को बंधक बना लिया जाता है। लोक सेवा हॉस्पिटल में बाउंसर रखे गए हैं और मरीज अथवा उनके साथ तीमारदार पैसा देने में जरा भी आनाकानी करते हैं तो वह गुंडे जैसा बर्ताव करते हैं। इसके लिए वह स्थानीय स्तर पर पुलिस महकमें को पटा रखे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तो वही करते हैं जो निजी अस्पताल वाले चाहते हैं। क्योंकि निजी अस्पताल वाले सीएमओ दफ्तर में माहवारी सुविधा शुल्क जो अदा करते हैं। 

   

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