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गुरुवार, 18 नवंबर 2021

उत्तर प्रदेश में माफियाओं के जनक रहे मुलायम सिंह सूबे की सत्ता पर काबिज होने में लेते थे, उनकी मदद और बदले में आतंक पैदा करने के लिए देते थे पर्याप्त छूट

विधानसभा चुनाव-2022में मुख़्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे सूबे के माफियाओं की और होगी दुर्गति 


प्रतापगढ़ में बाहुबली रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" प्रयागराज के विजय मिश्र, फैजाबाद के अभय सिंह, जौनपुर के धनंजय सिंह, सुल्तानपुर के सोनू और मोनू सिंह पर भी योगी सरकार और भाजपा नहीं देना चाहती, कोई छूट 


सूबे के दो बड़े माफियाओं को योगी बाबा ने किया नेस्तनाबूत...

पूर्वांचल में बड़े-बड़े ब्राह्मण, ठाकुर, यादव, राजभर, राय साहब जैसे अनेकों माफिया हैं, लेकिन जब वर्ष-2006 में मुख्तार अंसारी मऊ में सभी जाति के हिन्दुओं को घूम-घूम कर कटवा रहा था, सबकी दुकान जलवा रहा था तो किसी के मुंह से चूं तक नहीं निकला। निकलता भी कैसे, क्युंकि सबके तार कहीं न कहीं मुख्तार से जुड़े थे। मुख्तार के सामने न किसी को ब्राह्मणवाद याद आता था, न किसी को ठाकुरवाद, न अहीरवाद, न दलितवाद। बस सब मुख़्तार भाई के गुलाम थे। मुख़्तार भाई की बात करें तो वह अधिकांश लोगों की जमीनों पर कब्जा कर चुका है, कई घरों को उजाड़ चुका है। कई घरों को बर्वाद कर दिया है। आज योगी सरकार में मुख़्तार वही दंड भोग रहा है। अपने गुनाह पूंछ रहा है और अपने जीवन की भीख मांग रहा है। उसकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुकी है। परन्तु मुख़्तार को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी जेल में समय काट रहा है आतंक का पर्याय बना मुख़्तार अब जेल में बैठकर यही सोच रहा होगा कि पुरुष बली नहीं हॉट हैं, समय हॉट बलवान...!!!



सुना है कि पूर्वांचल में एक यादव जी, जो पूर्वांचल के बड़े नेताओं में शुमार हैं, उनको डेढ़ घंटा तक अपने घर में मुख्तार अंसारी ने मुर्गा बना कर रखा था। यही नहीं पूर्वांचल में मुख़्तार अंसारी बंधुओं को विधायक कृष्णानंद राय टक्कर देते थे, परन्तु पूर्वांचल के कुछ हिन्दू जयचंदों ने मुख़्तार अंसारी की दासता कबूलकर कर विधायक कृष्णानंद राय की हत्या करवाने में मुख़्तार अंसारी की मदद की थी साक्ष्य और सबूत के आभाव में माफिया मुख़्तार सहित कई दोषी हत्यारे विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में शामिल होने के बाद भी अदालत से बरी हो गए क्योंकि पूर्वांचल में माफिया मुख़्तार अंसारी के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। हद तो तब हो गई जब अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की वर्ष- 1991 में मुख्तार अंसारी और उनके लोगों द्वारा कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई और बाद में राजनीतिक लाभ के मद्देनजर उसी मुख़्तार के साथ अजय राय भी दोस्ती कर ली क्योंकि जिस समाजवादी पार्टी की सरकार में मुख़्तार माफिया बने उसी समाजवादी पार्टी में अजय राय भी शामिल हो गए थे, परन्तु कुछ ही दिनों बाद अजय राय कांग्रेस में चले गए अजय राय कांग्रेस से लोकसभा संसदीय सीट से वर्ष- 2014 और वर्ष-2019 का चुनाव देश के पीएम मोदी के खिलाफ लड़कर अपना कद बढ़ाने की कोशिश की, परन्तु वह नाकाम रहे 



विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दहशत फैलाने के इरादे से मुख्तार अंसारी उनकी चोटी तक कटवा लिया था। यह दुर्दांत अपराधी मुख्तार अंसारी ऐसे कई हिन्दुओं की हत्या करवा चुका है। तब तो किसी का ठाकुरवाद, किसी का ब्राह्मणवाद, किसी का यादववाद, किसी का पिछड़ावाद, किसी का दलितवाद नहीं जगा था। सभी जाति के हिन्दू मारे जा रहे थे सभी हिन्दुओं की दुकानें और घर जलाए जा रहे थे सब के सब दुम दबाकर कोने में खड़े थे अब योगी के सामने सब के सब चौड़े होकर खड़े हैं मऊ दंगे में सड़कों पर खुला खूनी खेल खेला जा रहा था, लेकिन मुलायम सिंह की निवर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार मूक-बधिर बनी हुई थी। प्रशासन से लेकर आला अफसरों तक किसी में भी इतनी कुव्वत नहीं थी कि मुख़्तार की जिप्सी में ब्रेक लगवा सकें ऐसे में गोरखपुर के निवर्तमान सांसद व गोरक्षपीठाधीस्वर योगी आदित्यनाथ ने मऊ जाने का ऐलान किया और एक भारी भरकम काफिले के साथ मऊ के लिए निकल पड़े। दोहरी घाट पहुंचते ही योगी व उनके समर्थकों को हिरासत में लें लिया गया था। योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप से ही पूर्वांचल में मुख़्तार के प्रकोप पर विराम लगा था। जबकि पूर्वांचल में गैंगवार की संभावना हर समय बनी हुई थी, परन्तु मुख़्तार के आगे किसी की एक न चली। चली तो सिर्फ और सिर्फ योगी आदित्यनाथ जी की चली



शासन और प्रशासन की ओर से भरोसा दिलाया गया कि अब मऊ में नंगा नाच बंद होगा। सरकार दबाव में आई, मुख्तार पर कार्यवाही हुई। योगी व मुख्तार की बस यहीं से दुश्मनी शुरू हुई थी। वर्ष-2008 में आजमगढ़ के डीएवी कालेज में 'हिन्दू युवा वाहिनी' का एक बड़ा प्रोग्राम था, योगी जी मुख्य अतिथि थे। आजमगढ़ में मुस्लिमों की संख्या व मुख्तार का प्रभाव किसी से छुपा नहीं हैं। योगी जी का प्रोग्राम सार्वजानिक था। मुख्तार ने योगी जी की हत्या का पूरा खाका तैयार कर लिया था। योगी जी आजमगढ़ शहर में घुसे ही थे कि तकिया में उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें योगी जी बाल-बाल बचे। लगभग 25 वर्ष के अपने राजनैतिक कार्यकाल में हजारों आंदोलन योगी जी ने माफिया तंत्र के खिलाफ किये, ऐसे कई हमले उन पर हुये, लेकिन योगी जी ने अपने सुर नहीं बदले।पूर्वांचल में जिस मुख्तार की तूती बोलती थी, उसी पूर्वांचल में मुख़्तार को बकरी बनाने का कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है। चूँकि भरी लोकसभा में योगी आदित्यनाथ वतौर सांसद अपनी पीड़ा और ब्यथा सुनाते हुते रो पड़े थे। वह दिन योगी जी को आज भी याद है। तभी बिना रुके, बिना थके और बिना डरे निर्भीक होकर माफियाराज पर अपना हथौड़ा चलाते जा रहे हैं  



मुख्तार अंसारी बंधुओं का पूर्वांचल में एकछत्र राज चलता था सरकार चाहे सपा की रही हो अथवा बसपा ! सच बात तो यह है कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर चाहे मुलायम सिंह आसीन हुए हों अथवा चाहे मायावती, सभी ने पूर्वांचल में मुख्तार को माफिया बनाने का कार्य किया। जिस मुख़्तार के सम्बन्ध माफिया डॉन दाऊद व आईएसआई से रहने की बात की जाती हो ! उसके खिलाफ दो शब्द कहने की किसी में हिम्मत नहीं थी, परन्तु एक सांसद के तौर पर ही योगी जी ने उस माफिया मुख़्तार की जड़ें हिला दी थीं अब उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद मुख्तार का क्या हुआ, उससे आप सब वाकिफ हैं जो मुख़्तार पूरे पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बना हुआ था, उस मुख़्तार की आज योगीराज में बोलती बंद है। सभी कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने माफिया मुख़्तार को पंजाब प्रान्त से लाकर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की बाँदा जेल में ठूस कर उसकी औकात की कचूमर निकाल दी है अब वह अपने और अपने साम्राज्य को बचाने की गुहार लगा रहा है और उसकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं है सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से माफिया मुख़्तार की पत्नी बाज़ नहीं आयी, परन्तु वहाँ से भी मुख़्तार को राहत नहीं मिल सकी   



से ही प्रयागराज का एक दुर्दांत अपराधी अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का आतंक सिर चढ़कर बोल रहा था, परन्तु सूबे में योगी सरकार बनते ही उन पर भी एक्शन शुरू हो गया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सूबे में माफियाओं को नेत्सनाबूत करने के वादे पर खरा उतरते हुए उनके साम्राज्य में ऐसी आग लगाई, जैसे बजरंगबली ने लंका में आग लगाकर रावण की सोने की लंका को तहस नहस कर डाला था उत्तर प्रदेश में जितने माफिया पैदा हुए इसके जनक समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव हैं। जिस तरह एक चोर एक चोर का सहयोग करता है, ठीक उसी तरह उत्तर प्रदेश में एक माफिया दूसरे माफिया का सहयोग किया मुलायम सिंह यादव स्वयं माफिया रहे। सच तो यह है कि सपा सुप्रीमों के सम्बन्ध चम्बल घाटी के डाकुओं तक से रहे तभी दस्यु सुन्दरी बीहड़ की डकैतों की सरगना फूलन देवी को मुलयम सिंह यादव अपनी पार्टी से टिकट देकर मिर्जापुर से सांसद बनवाया था। सूबे में चुनाव आते ही हिंदू जयचंदों द्वारा हिंदूवादी नेताओं को कोसा जाता है जबकि कोई मुस्लिम कभी भी अपने नेता की बुराई नहीं करता, बुराई करने का काम सिर्फ और सिर्फ हिंदू जयचंदो का ही है। हिन्दुओं को अपनी इस आदत को बदलना होगा। तभी हिंदुस्तान में हिन्दुओं का गुजारा हो सकेगा

 

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