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शनिवार, 2 अक्तूबर 2021

बच्चों को शिक्षा देने के बजाय विधायक मोना तथा प्रमोद के समर्थन में वित्तविहीन शिक्षकों ने भी भरी हुंकार, सौंपा ज्ञापन

शिक्षक भी अपनी राह से भटक कर सिर्फ राजनीति में मशगूल रहते हैं और सरकार की तनख्वाह के मुताविक नहीं करते अपने कर्तब्यों का निर्वहन 


सीओ लालगंज को ज्ञापन सौंपते वित्त विहीन शिक्षकों का प्रतिनिधि मंडल...

रामपुरखास की विधायक आराधना मिश्रा "मोना" तथा सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी के खिलाफ सांगीपुर से जुड़े मुकदमों को लेकर शुक्रवार को वित्तविहीन शिक्षकों ने भी भरी हुंकार नेता द्वय के समर्थन में सीओ लालगंज को ज्ञापन सौंपा। पूर्वाह्न वित्त विहीन शिक्षकों तथा प्रबंधकों व इन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का बड़ा जत्था सीओ कार्यालय पहुँच गया। सीओ कार्यालय में वित्त विहीन शिक्षकों का समूह क्षेत्रीय विधायक मोना के खिलाफ दर्ज मुकदमे की वापसी की माँग को लेकर प्रमोद व मोना के समर्थन में हुंकार भरते हुए जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित दिखा। जानकारी होने पर तहसीलदार जावेद अंसारी भी सीओ कार्यालय पहुँच गए। तहसीलदार तथा सीओ की मौजूदगी में दिए गए ज्ञापन में प्रमोद कुमार तथा विधायक मोना के खिलाफ दर्ज मुकदमे को बिना प्रारंभिक जांच के असंवैधानिक बताया। 


बच्चे देश के भविष्य हैं और उन्हें देश का कर्णधार कहा जाता है। परन्तु आधुनिक गुरुजन सिर्फ और सिर्फ राजनीति में अपना समय बिता रहे हैं। शिक्षणकार्य में उनकी रूचि ही नहीं रह गई है। जो थोड़ी रुची थी भी,वह कोरोना संक्रमण काल में समाप्त हो गई। शिक्षकों को कार्य न करना पड़े और बैठे बैठाये उन्हें वेतन मिला जाए तो वह बहुत खुश रहेंगे। क्षेत्रीय नेताओं के सम्पर्क में रहकर अपना भवाकाल बनाने में आधुनिक शिक्षक भी पीछे नहीं हैं। क्षेत्रीय नेताओं की चरण बन्दना शिक्षक इसलिए करता है, ताकि BSA और DIOS उनके ऊपर कोई कार्रवाई न कर सके। वह शिक्षण कार्य करें या न करें, परन्तु उन्हें कोई कुछ कहे न ! इसलिए क्षेत्रीय नेता के पक्ष में उनके जयकारे लगाने में शिक्षक भी पीछे नहीं रहते। सुबह शाम नेता जी का दरबार लगाना आधुनिक शिक्षकों की नियति बन चुकी है।       


कांग्रेस के कथित दिग्गज नेता प्रमोद कुमार और रामपुरखास की विधायक आराधना मिश्रा उर्फ मोना के समर्थन में वित्त विहीन शिक्षक भी दिखाने के लिए आ गए, परन्तु नेता द्वय के साथ मुकदमें में जिनके खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई की जा रही है, उसके पक्ष में अभी तक किसी ने एक शब्द नहीं बोले। हद है, समर्थक जो नेता के लिए उनके विरोधी से भिड़े वह तो जेल जाए, परन्तु नेताजी को आँच नहीं आनी चाहिए। ऐसे मानसिकता वर्तमान में लोगों की हो चुकी है। फिलहाल नेता द्वय के समर्थन में शिक्षक नेता सर्वेश मिश्र तथा प्रबंधक समूह के नेता धर्मेंद्र पांडेय एवं मंगलेश सिंह की अगुवाई में डीएम को संबोधित ज्ञापन में राज्यपाल से प्रदेश सरकार को काँग्रेस के दोनों नेताओं के खिलाफ सांसद समेत उनके समर्थकों द्वारा लिखाए गए मुकदमों को फौरन वापस किए जाने की माँग की गई। शिक्षक समूह ने मुकदमों की वापसी न होने पर वित्त विहीन विद्यालयों में शिक्षण कार्य ठप किए जाने की भी चेतावनी दी है। ज्ञापन देने वालों में द्वारिका प्रसाद तिवारी, दिनकर पांडेय, विवेक मिश्र, प्रदीप सिंह, रमाशंकर पांडेय, दिलीप मिश्र, आनंद सिंह, दिग्विजय सिंह, राजेश मिश्र, अमरनाथ पांडेय, धीरेंद्र पांडेय, रामशरण पांडेय आदि रहे। 

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