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गुरुवार, 21 अक्तूबर 2021

प्रतापगढ़ के थाना संग्रामगढ़ में दो समुदाय में हुआ खूनी संघर्ष, दोनों पक्ष को आई गंभीर चोटे,दर्ज हुआ मुकदमा

पैसे को लेकर दो समुदाय में हुआ खूनी संघर्ष में एक ब्राह्मण समुदाय के व्यक्ति ने दलित समुदाय के एक व्यक्ति को कुछ पैसे उधार दिया  और जब उस पैसे को कई बार मांगा तो इसे दलित समुदाय के कई लोगों ने मिलकर लाठी डंडों और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया और लहूलुहान कर दिया...!!!


दो समुदाय में हुआ खूनी संघर्ष आई गंभीर चोटे...

प्रतापगढ़ थाना संग्रामगढ़ में किसी भी देश में बनाए जाने वाले कानून उस देश की सुरक्षा, देश में रहने वाले लोगों की सुरक्षा व आम जनमानस की सहूलियत को ध्यान में रखकर बनाया जाता है और उस कानून को बनाने में एक निश्चित प्रक्रिया का पालन किया जाता है ऐसा ही एक कानून हमारे देश में है जो अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को सामाजिक सुरक्षा व समानता के पायदान पर खड़ा करने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज़ इसका दुरुपयोग जिस तरह से एक विशेष समुदाय को प्रताड़ित करने और दबंगई करने के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है उससे सवर्ण व ओबीसी समुदाय के लोगों में आक्रोश व असंतोष की भावना को जन्म दे रहा है। इसका हालिया उदाहरण है


जनपद प्रतापगढ़ के थाना संग्रामगढ़ में हुई एक घटना जिसमें एक ब्राह्मण समुदाय के व्यक्ति ने दलित समुदाय के एक व्यक्ति को कुछ पैसे उधार दिया था और जब उस पैसे को कई बार मांगा तो इससे खुन्नस खाए दलित समुदाय के कई लोगों ने मिलकर लाठी डंडों और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया और लहूलुहान कर दिया।पीड़ित पक्ष ने घटना के बारे में बताते हुए कहा कि मेरा नाम शिवा मिश्रा है मेरे पिताजी का नाम अनिल कुमार मिश्रा है मेरे भाई का नाम राधारमण मिश्रा है हम लोग अपने ट्यूबबेल फतेहशाहपुर पर बैठे हुए थे तभी संतोष गौतम पुत्र सुखराम गौतम अनिल सरोज पुत्र अमृत सरोज मिठाई सरोज पुत्र विश्राम सरोज उदय राज सरोज पुत्र छोटे लाल सरोज ने हमला कर दिया। 


पीड़ित ने आगे बताया कि मैं अपने गांव फतेहपुर में बैठा हुआ था नल की बोरिंग करवा रहा था उसके बाद संतोष गौतम आया मैंने उससे कहा कि मेरा पैसा वापस कर दो तो उसने कहा पैसा नहीं तुमको लात मिलेगी पंडित और अभी रुको तुमको 10 मिनट में बताता हूं फिर हम लोग बैठे रहे कुछ देर बाद अपने साथियों के साथ उदय राज सरोज अनिल सरोज मिठाई सरोज और इनके इनके घर की महिलाएं और बच्चे साथ में लाठी डंडा चक्कू फरसा कट्टा रोड लोहे की रॉड लेकर आए और बातचीत होते ही होते मेरी दुकान के पीछे से भी रास्ता है वहां से महिलाएं आए और उन्होंने हमारे ऊपर हमला बोल दिया उसके बाद नदी की तरफ से भी 5-7 लोग आए और हम दोनों भाइयों को बहुत बुरी तरीके से पीटा जिसके बाद आसपास के लोग सुनकर दौड़े फिर हम लोग को बीच बचाव किया और इसके बाद उन्हीं के लाठी-डंडों के साथ अपने बचाव के लिए हम लोग ने भी अपनी सुरक्षा के लिए हाथ पाव चलाया।


इस मामले के संबंध में थाना प्रभारी संग्रामगढ़ से बात करने पर पता चला कि पैसों के लेनदेन को लेकर मारपीट हुई है जिसमें एक पक्ष को गम्भीर रूप से तो दूसरे पक्ष को हल्की-फुल्की चोटें आईं हैं गम्भीर रूप से घायलों को इलाज के लिए भेजा गया है दोनों पक्षों से मिली तहरीर के आधार पर मुक़दमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्यवाही की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है, कि जब किसी कानून का इस तरह से दुरुपयोग हो रहा हो तो उससे समाज में फैलने वाली असमानता व आक्रोश का ज़िम्मेदार कौन होगा, शासन, प्रशासन या फिर कानून का गलत तरीके से इस्तेमाल करने वाले लोग

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