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बुधवार, 13 अक्तूबर 2021

आर्यन खान के केस ने धनाढ्य वर्ग को बता दिया है कि उसका पैसा, रुतबा और रसूख कोई मायने नहीं रखता है

देश में एक जैसे अपराध पर अलग-अलग जब कार्रवाई होगी तो सवाल उठेगा ही ! अडानी और आर्यन के मामले में दोहरी ब्यवस्था से लोग हतप्रभ हैं...

आर्यन खान का पैसा, रुतबा और रसूख नहीं आया कोई काम...

आर्यन खान के केस जितना हो हल्ला हुआ और शासन-प्रशासन सहित न्यायालय व मीडिया हाय तौबा मचाया, वहीं गुजरात के बंदरगाह पर अडानी के नियंत्रण के पोर्ट पर 22000 करोड़ की हेरोइन, ड्रग्स और अफीम पकड़ी गई थी, जो वहां 2 कंटेनर में मिली थी। उस पर मीडिया को भी साँप सूंघ गया। जबकि पूर्व विधायक प्रदीप ने कहा कि ऐसी आशंका है कि इसके पहले भी हेरोइन का यह अवैध कारोबार लगातार भारत में संचालित होता आ रहा था। देश में एक जैसे अपराध पर अलग-अलग जब कार्रवाई होगी तो सवाल उठेगा ही ! अडानी और आर्यन के मामले में दोहरी ब्यवस्था से लोग हतप्रभ हैं। इससे यह तय हो गया कि जब तक सत्ताधारी रसूख तगड़ा न हो, तब तक ऐसे भेद भाव देखने को मिलते रहेंगे 


अब सिर्फ आम आदमी ही नहीं, उच्च धनाढ्य वर्ग भी "कानूनी आतंकवाद" के भय के साये में ! अब आप भी डरों कि कहीं कोई आपको या आपके परिवार को किसी झूठे मुकदमे में न फंसा दे ! 5000 करोड़ रुपए का बॉलीवुड सुपर स्टार, शाहरुख खान ऊँची पहुँच, रसूख ! इस देश को अपनी मेहनत, प्रतिभा और उद्धमशीलता से कमाए गए धन में से अरबों रुपए का आयकर भरते हैं ! सरकार, मीडिया और प्रशासन के सबसे ताकतवर और रसूख दार लोगों में पहुंच, पकड़ और उठना बैठना भी है। आज अपने मात्र 23 साल के बेटे आर्यन खान जो साउथ कैलिफोर्निया अमेरिका के विश्वविद्यालय से फाइन आर्ट्स एवं टीवी प्रोडक्शन मे ग्रेजुएट है जिसके चेहरे पर बचपन की मासूमियत और अबोध तरुणाई का अक्स साफ झलकता हो, को कानून के ऐसे मकड़जाल से निकालने के लिए न सिर्फ एक आम आदमी की तरह असहाय है, वरन नि:शब्द भी है अंदर ही अंदर घुटने, रोने और मन को मसोसने के अलावा उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है 


देश के चारो स्तंभ सरकार, प्रशासन, न्यायिक प्रणाली और मीडिया चारों देश के आम आदमी से लेकर उच्च वर्ग तक के लोगों के जमीर, स्वाभिमान, आज़ादी और संपत्ति का गला घोट रहे हैं भ्रष्ट, दुष्ट, धृष्ट और राजनीति से प्रेरित जांच एजेंसियां और पुलिस प्रणाली कानून की आड़ में कानून के धाराओं और प्रक्रिया का एक खौफनाक जाल बुनकर एक ऐसे न्यायालय के सामने पेश कर दें, जिसके पास आपको न्याय देने का अधिकार तो छोड़िए ! जमानत तक देने का अधिकार नहीं होता है ! सिर्फ पुलिस के लगाए गए झूठे, बनावटी आरोपों, गवाहों और पारिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर रिमांड और फिर जेल की काल कोठरी में भेज देता है और फिर जेल से सेशन कोर्ट, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, सिंगल बेंच, डबल बेंच तक आवेदन पर आवेदन और उसके बाद भी कोढ़ में खाज़ यह कि 365 दिन मे 165 दिन की छुट्टियां अंतहीन तारीख पर तारीख उसके बाद फैसला आने तक एक पूरे परिवार का जीवन खत्म ऐसी नारकीय न्यायिक व्यवस्था में जीने को अभिशप्त है ये बातें शाहरुख खान के साथ सहानुभूति रखने वाले लोग कह रहे हैं  


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