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रविवार, 24 अक्तूबर 2021

एआरटीओ दफ्तर प्रतापगढ़ में नहीं चल पा रहा है, दलालों की दलाली, दलालों ने आपस में गुटबाजी बना रखी है, एक गुट, दूसरे गुट की करता है, शिकायत

दलालों से घिरा है,प्रतापगढ़ का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी का दफ्तर, आयेदिन होती रहती है,शिकायतें 

प्रतापगढ़ के एआरटीओ दफ्तर में सांसद, विधायक, ट्रांसपोर्ट संगठन के पदाधिकारियों, कथित पत्रकारों और अधिवक्ताओं के साथ-साथ में स्थानीय नेताओं में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान भी देते हैं,दखल 

प्रतापगढ़ का नया एआरटीओ दफ्तर... 
प्रतापगढ़ में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी का दफ्तर शहर मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूर चिलबिला अमेठी रोड़ पर कोरोना काल वर्ष-2020 में बड़ी मशक्कत के बाद अपने भवन में शिफ्ट हो गया कुछ सरकारी दफ्तर ऐसे होते हैं जहाँ बिना माध्यम यानि दलालों के काम संभव नहीं पाता ऐसे दफ्तरों में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी का दफ्तर भी शामिल है, जिसे ARTO दफ्तर के नाम से जाना जाता है सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के दफ्तर में कुछ दलाल नेता के चमचे बनकर दलाली करते हैं तो कुछ स्वयं को पत्रकार बताकर सबसे मजेदार बात यह है कि अधिवक्ता जो काम कराने के लिए किसी भी दफ्तर में बेहिचक आता और जाता है उसे भी ARTO दफ्तर में दलाली करने के लिए चौकी प्रभारी ARTO दफ्तर और दफ्तर के अधिकारियों की जी हुजूरी करना पड़ रहा है। एक अधिवक्ता को उस समय चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए जब उसे कचेहरी में वकालत न कर ARTO दफ्तर में दलाली करनी पड़े।  

जनपद प्रतापगढ़ में ट्रांसपोर्ट के कई संगठन हैं और उन संगठन के पदाधिकारी भी अपना एजेंट पाल रखे हैं और स्थाई रूप से ARTO दफ्तर के पास में महंगे रेट पर कमरा किराये पर लेकर अपनी दलाली चमकाए हुए हैं।प्रतापगढ़ ARTO दफ्तर की दशा ऐसी हो गई है कि उसमें सदर विधायक राजकुमार करेजा पाल भी अपना एक दलाल की नियुक्त कर रखे हैं यही हाल प्रतापगढ़ के सांसद संगम लाल गुप्ता का भी है। एक दलाल उनके नाम पर ARTO दफ्तर की दलाली करता है और बदले में उनके संगम इंटरनेशनल स्कूल की बसें का टैक्स आदि का कार्य करता हैये हाल सांसद, विधायक, ट्रांसपोर्ट संगठन के पदाधिकारियों, कथित पत्रकारों और अधिवक्ताओं के हैं। अब बात करते हैं स्थानीय नेता जैसे जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य यानि बीडीसी और ग्राम प्रधान आदि कीकुछ स्थानीय नेता स्वयं तो ARTO दफ्तर की दलाली करने नहीं जाते, परन्तु पड़ताल करने पर पता चला कि फलाने नेता ने एक कमरा लेकर वहाँ वाईफाई की सुविधा कराते हुए एक लैपटॉप खरीद कर एक अपना आदमी रख दिया है और शाम को नेताजी उससे हिसाब लेकर कुर्ता पायजामा झाड़कर निकल लेते हैं और समाज में बड़के नेता बने हए हैं 

ARTO दफ्तर के पास जिनकी जमीन थी उसकी तो मानों किस्मत ही खुल गई। जमीन के काम में जो लगे हैं उन्हें समाज में प्रापर्टी डीलर कहते हैं और जो सब रजिस्ट्रार के यहाँ जमीन की खरीद के लिए दस्तावेज तैयार करते हैं उनके दस्तावेज लेखक कहते हैं परन्तु ARTO दफ्तर में जो ब्यक्ति दूसरे का कार्य करवाता है उसे विशुद्ध भाषा में सिर्फ और सिर्फ दलाल कहते हैं जो लोग अपनी आजीविका के लिए ARTO दफ्तर में कार्य करना चाहते हैं उन्हें सरकार दस्तावेज लेखक अथवा पोस्ट ऑफिस या एलआईसी में कार्य करने वाले एजेंटो की तरह अधिकृत कर उन्हें लाइसेंस दिया जाना चाहिए ताकि उनके माथे पर दलाली का दाग मिट सके शासन व प्रशासन इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है और उसकी जानकारी में सारे कार्य हो रहे हैं एआरटीओ दफ्तर में ARTO प्रशासन जब दलालों के प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगाते हैं और उसके पालन करने के लिए वहाँ तैनात पुलिस चौकी के दरोगा के द्वारा जब दलालों को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया जाता है तो दरोगा पर भी धन उगाही का आरोप लगता है। 

इस आरोप के पीछे के कारणों की वजह जब जानना चाहा तो पता लगा कि दरोगा जी का तो महीनों पहले तवादला हो चुका है फिर भी एआरटीओ दफ्तर में दरोगा जी बने हुए हैं और वहाँ से जाने के लिए मन नहीं बना पा रहे हैं तो जनसामान्य में यही सन्देश जा रहा है कि दरोगा जी का भी मन ARTO दफ्तर की दलाली में लग चुका है और दलालों से अधिक धन दरोगा जो स्वयं कमा रहे हैं तो जाहिर सी बात है कि उस दशा में तवादला वाले स्थान पर क्यों जाएं ? सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो अपने हमराही सिपाही विकास के साथ मिलकर सब इंस्पेक्टर बाल किशुन ने दलालों की लिस्ट बनाई है ARTO दफ्तर में दलालो की इंट्री तभी होगी जब दरोगा जी के डायरी में उस दलाल का नाम होगा। दलाल को अपने नाम की इंट्री कराने के लिए  हर महीना जेब ढीली करनी होगी। सब इंस्पेक्टर बाल किशुन साहेब का तवादला होने के बाद भी अपने रसूख के चलते एआरटीओ दफ्तर में बने हुए है।  इससे तो यही लगता है कि दरोगा साहेब को भी ARTO दफ्तर में दलालों सहित अन्य स्रोतों से मिलने वाले नाजायज धन का चस्का बुरी तरह लग चुका है।

सब इंस्पेक्टर बाल किशुन का थाना मानिकपुर में हुआ है,तवादला...

प्रतापगढ़ के थाना महेशगंज में मोटी रकम वसूल करने में माहिर दरोगा का थाने से नहीं छूट रहा मोह...

 एसआई श्यामसुंदर श्रीवास्तव भी अंगद की तरह महेशगंज थाने में जमा रखे हैं,पैर...

महेशगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर श्यामसुंदर श्रीवास्तव का थाने से ट्रांसफर होने के बाद भी मोह नहीं छूट रहा है। बता दें कि कई वर्षों से महेशगंज थाने में तैनात दरोगा का ट्रांसफर एआरटीओ प्रतापगढ़ चौकी इंचार्ज के रूप में हुआ है ट्रांसफर होने के बावजूद थाना छोड़कर जाने की इच्छा नहीं हो रही है क्षेत्र में घूम घूम कर धमक जमा कर मोटी रकम वसूल करने में दरोगा जी मशहूर हैं दरोगा जी का थाने से नाता नहीं छूट रहा है मानों वो महेशगंज थाना अपने पिताजी की जागीर समझ लिए हैं सोशल मीडिया में तवादला हुए दरोगा जी पर खबर वायरल हो रही है कि महेशगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर श्यामसुंदर श्रीवास्तव फेंक मुकदमा लिखने में माहिर हैं और थाने में बैठकर पंचायत करके दोनों पक्षों से मोटी रकम वसूल करने की दक्षता उनमें कूट-कूटकर भरी हैदेखना है कि महेशगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर श्यामसुंदर श्रीवास्तव और ARTO दफ्तर में तैनात चौकी प्रभारी बाल किशुन सब इंस्पेक्टर साहेब कब तक अपने-अपने तवादला स्थल पर जाकर कार्यभार ग्रहण करते हैं ? सब इंस्पेक्टर बाल किशुन साहेब और सब इंस्पेक्टर श्यामसुंदर श्रीवास्तव पर पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल की निगाह कब पड़ती है ? जब अपने ही आदेश का अनुपालन तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल नहीं करा पा रहे हैं तो उन्हें इन दरोगाओं का तवादला ही नहीं करना था क्योंकि इससे जनसामान्य के मन में पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ पर भी सवाल उठ रहे हैं 

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