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सोमवार, 6 सितंबर 2021

प्रतापगढ़ के थाना इंचार्जों ने वर्दी को दागदार करने की कसम खाई है, एक मामला खत्म नहीं होता कि दूसरा मामला खाकी को दागदार करने आ जाता है

जेठवारा थाना के दरोगा बलवंत सिंह पर आरोप है कि आम आदमी को फेंक मुकदमें में फंसाने का डर दिखाकर करते हैं,जबरन वसूली 

प्रतापगढ़ का चर्चित थाना जेठवारा जहाँ होता है,मोलभाव...

प्रतापगढ़ के थाना जेठवारा में पुलिस के दरोगा और थाना इंचार्ज ने खाकी वर्दी को दागदार करने की कसम खाई है। पुलिस की छवि को सुधारने के लिए आला अफसरों द्वारा जहाँ सुधार के लिए दिन रात प्रयास किये जाते हैंएक मामला खत्म नहीं होता कि दूसरा सामने आ जाता है प्रतापगढ़ में खाकी के ऊपर लगातार गम्भीर आरोप लगते रहे हैं हलांकि सम्पूर्ण मामले को थानाध्यक्ष ने निराधार बताया है प्रतापगढ़ पुलिस अपराध व अपराधियों को रोकने में फेल हैं। परन्तु धन की वसूली में दरोगा हो या सिपाही सब एक से बढ़कर एक हैं। थाना इंचार्ज की बात ही दीगर है थाना क्षेत्र के युवक को धमकी देकर पैसे की मांग करते हैं सरकारी तनख्वाह से प्रतापगढ़ की खाकीधारियों का पेट नहीं भर रहा है। 


जेठवारा थाना क्षेत्र के रेंडी गांव निवासी मो0 नसीर सुत मो0 अय्यूब ने आरोप लगाते हुए कहा है कि वह छत्तीसगढ़ के एक ट्रांसपोर्ट में गाड़ी चलाता है गांव के कुछ रसूखदारों से उसकी पुरानी रंजिश है जिनका पुलिस के साथ उठना बैठना है। वह जब भी गांव आता है तो उनके इशारे पर जेठवारा थाने के दरोगा बलवंत सिंह उससे पैसा मांगते हैं उसकी गैर मौजूदगी में भी कभी-कभी घर वालों से भी आकर पैसे की मांग करते हैं और कहते हैं कि अगर तुम लोग पैसा नहीं पहुंचाए तो तुम्हारे लड़के को किसी मुकदमें में फंसाकर जेल भेज दूंगा। कई बार तो घर की महिलाओं के साथ गाली गलौज व अभद्रता भी किए हैं। पीड़ित युवक ने आगे बताया कि इससे पहले जब वह घर आया था तो वह अपने माता-पिता की दवाई लेने सरियापुर बाजार गया था वहां उसे एक दरोगा जी थाने उठा ले गए और चोरी का आरोप लगाते हुए पैसे की मांग की और कहा कि पैसा दो तो छूट जाओगे उसके बाद 15000/ लेने के बाद उसे छोड़ दिया। 


पीड़ित युवक ने यह भी आरोप लगाया कि बलवंत सिंह ने मुझे धमकी दी है कि अगर तुम पैसा नहीं दिए तो तुमको घर में रहने नहीं दूंगा। जिसकी वजह से पीड़ित व उसका पूरा परिवार काफी डरा व सहमा हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त गांव दरोगा बलवंत जी के क्षेत्र में भी नहीं आता है। फिलहाल पीड़ित युवक ने इस सम्बंध में मुख्यमंत्री, पुलिस अधीक्षक सहित मानवाधिकार आयोग लखनऊ को प्रार्थना पत्र  लिखकर अपने व अपने परिवार के जान-माल की रक्षा के लिए गुहार लगाई है। यक्ष प्रश्न यह है कि आम जनमानस की रक्षा के लिए काम करने वाली पुलिस क्या उनकी रक्षा करने के बजाय उनके लिए भक्षक का कार्य कर रही है ? क्या बड़े-बड़े अपराध करने वाले अपराधियों को पकड़ने के बजाय पुलिस सीधे साधे लोगों पर जुल्म ढाने का काम करने लगी है ? अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग, जिले के तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल इस मामले को गंभीरता पूर्वक संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच करवाकर उचित कार्रवाई कब करते हैं ?


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