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शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

प्रतापगढ़ जनपद मुख्यालय से 20 किमी पश्चिम में स्थित है,राजा नहुष मोक्ष स्थल अजगरा

अजगरा मेले की प्राचीनता को प्रमाणित करता है,प्राप्त ब्राम्ही लिपि का प्रस्तर लेख 


सज रहा है,अजगरा में मेला... 

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के जनपद प्रतापगढ़ का एक ऐसा स्थान जिसे यक्ष युधिस्ठिर संवाद स्थल के नाम से जाना जाता है। बताते चलें कि जनपद के प्रसिद्ध पौराणिक स्थल अजगरा में प्रतिवर्ष भादोंमाह में ऋषिपंचमी तिथि से प्रारंभ होकर तीन दिन तक लगने वाले प्राचीन व पौराणिक मेले की प्राचीनता की पुष्टि अजगरा से ही प्राप्त ब्राम्हीलिपि के प्रस्तर लेख वर्ष जनवरी 1984 में स्थानीय निवासी प्रसिद्ध कवि एवं पुरातत्व खोजी पं० राजेश कुमार पाण्डेय 'निर्झर प्रतापगढ़ी' द्वारा खोजे गए द्वितीय से तृतीय शदी ईसापूर्व के ब्राम्हीलिपि व प्राकृतिक भाषा मे लिखे गए प्रस्तर लेखों के वाचन पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तत्कालीन प्राचीन इतिहास, संस्कृत एवं पुरातत्व विभागाध्यक्ष प्रो० एस०एन० राय एवं ई०सी०सी० के पुराविद प्रोफेसर विमल चन्द शुक्ल ने सर्वप्रथम वाचन किया है। 


अजगरा में प्राप्त ब्राम्ही लिपि का प्रस्तर लेख...

प्रोफेसर विमल चन्द शुक्ल के वाचन पर सहमति देते हुए सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ० ओ०पी० लाल कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय लंदन के पुराविद डॉ० एफ०आर०अल्चीन,  डॉ० विमलेश पाण्डेय, डॉ० पियूषकान्त शर्मा, डॉ० वृजभानु सिंह आदि विद्वानों ने पौराणिक राजा नहुष के अजगर सर्प योनि में जाने, पांडवो द्वारा वनवास के अंतिम समय मे अज्ञातवास जाने के पूर्व अजगरा के इस पौराणिक सरोवर पर आने व यक्ष युधिष्ठिर संवाद होने तथा इसी पौराणिक घटना की स्मृत में ईसापूर्व की शताब्दियों में भी यहां यक्ष उपासना से संबंधित मेले के आयोजन की परम्परा रहने व सरोवर के जल को पवित पाप से मुक्ति दायक मानने के उल्लेख को प्रमाणित माना है। 


प्रतापगढ़ जनपद मुख्यालय से 20किमी पश्चिम में स्थित है,अजगरा...

मेले के आयोजन की वह प्राचीन परम्परा आज तक चली आ रही है। जिसे वर्ष- 1997 से जिला प्रशाशन द्वारा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अजगरा महोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा है। बता दें कि बीते वर्ष कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए महोत्सव व मेले का आयोजन नही किया गया था। हालांकि की इस वर्ष कोरोना की तीसरी लहर को दृष्टिगत रखते हुए शाशन स्तर से महोत्सव की अनुमति नही मिली है किंतु कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार मेला लगने की अनुमति मिली है अनुमति मिलने पर दुकाने, झूले, सर्कस व लकड़ी की दुकाने सज चुकी हैं।


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