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शनिवार, 4 सितंबर 2021

साँप सीढ़ी के खेल में पुलिस को भी मात दे गया प्रतापगढ़ का भूमाफिया जावेद अहमद, उप जिला मजिस्ट्रेट, सदर प्रतापगढ़ को बनाया अपनी साजिश का शिकार

दो प्रतिवादीगण को पक्षकार बनाते हुए न्यायालय श्रीमान् उपजिला मजिस्ट्रेट महोदय सदर-प्रतापगढ़ के यहाँ दाखिल किया प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. का वाद 


सिविल कोर्ट के प्रकरण को नियम विरुद्ध तरीका अपना कर भूमाफिया जावेद अहमद ने प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. को बनाया अपना हथियार, न्यायालय श्रीमान् उपजिला मजिस्ट्रेट महोदय सदर-प्रतापगढ़ को अपनी साजिश का बनाया हिस्सा 


सब्जी मंडी रोड़ पर टक्करगंज में गुप्ता टेलर्स की दुकान जिस पर गड़ी है जावेद की नजर...

सिविल मामले को आपराधिक मामले में कन्वर्ट करके सीधे-साधे ब्यक्ति को हैरान व परेशान करके अपने काम को निकालने का गुणसूत्र सीखना हो तो शहर का बहुचर्चित भूमाफिया जावेद अहमद जो पतुलकी थाना-अंतु का रहने वाला है और शहर में ऐसी जमीन को खोजता है जो विवादित होती है उस विवादित सम्पत्ति को औने-पौने दाम में एग्रीमेंट कराकर कब्जेदार पर फेंक मुकदमा लिखाना, गुंडों के साथ पहुँचकर बिला कब्जा एग्रीमेंट के आधार पर उस सम्पत्ति पर कब्जा करना जावेद अहमद की नियति बन चुकी है। तीन मामले तो शहर के टक्करगंज से ही हैं एक विवाद रमेश बाजपेयी सुत नरेंद्र प्रसाद व क्रेता भैरोदीन गुप्ता सुत स्व. राम प्रसाद गुप्ता के बीच का है। उक्त मामले में भूमाफिया जावेद अहमद ने प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. के तहत उप जिला मजिस्ट्रेट सदर, प्रतापगढ़ के यहाँ दाखिल किया है 


मजेदार बात यह है कि पुलिस विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को यह भी ज्ञान नहीं कि जब मामला स्वत्व निर्धारण यानि मालिकाना हक तय करने का हो तो उसका निस्तारण सिर्फ और सिर्फ सिविल न्यायलय में वाद दायर करके ही पाया जा सकता है परन्तु प्रतापगढ़ में ऐसे भी भूमाफिया हैं जो राजस्व विभाग को अपनी जेब में लेकर घूमते हैं। हल्का लेखपाल और राजस्व निरीक्षक तो उनके घर पर पानी भरा करते हैं। तहसीलदार और नायब तहसीलदार की बात करें तो वह उनके इशारे पर उठते-बैठते हैं। तभी तो किसी भी तरह की रिपोर्ट को भूमाफिया जावेद अहमद चलते-चलते लगवा लेने की माद्दा रखते हैं, बाद में फंसने के बाद वही राजस्व विभाग के कर्मचारी और अधिकारी उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दे


वादी मुकदमा जावेद अहमद प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. का जो वाद न्यायालय उप जिला मजिस्ट्रेट सदर, प्रतापगढ़ के समक्ष दाखिल किया है, उसे देखकर और पढ़कर तो ऐसा लगता है कि आज भी आम आदमी ऐसे फितरतबाजों से हैरान व परेशान होकर उसके सामने घुटने टेक देता है। जिसमें सिस्टम के लोग भी शामिल रहते हैं, वो इस कार्य में भूमाफियाओं के साथ मिलकर कार्य करते हैं। उन्हीं के बल पर ऐसे फरेबी ब्यक्ति अपनी चाल में सफल हो पाता है और बदले में सिस्टम में बैठे सभी आकाओं को खिलाता पिलाता रहता है। उपरोक्त वाद में प्रतिवादीगण संख्या-2 भैरोदीन गुप्ता सुत राम प्रसाद है जो उपरोक्त वाद में बैनामेदार हैं। साथ ही बैनामा दिनांक से क्रय की गई दुकान पर काबिज दखील होकर उसका उपभोग कर रहे हैं। नगरपालिका के अभिलेख में नामांतरण और बिजली का कनेक्शन भी भैरोदीन गुप्ता द्वारा लिया जा चुका है।  


वादी मुकदमा जावेद अहमद का कथन है कि द्वितीय पक्ष संख्या-1 को भूमि स्थित ग्राम बेल्हाघाट परगना व तहसील-सदर, जनपद-प्रतापगढ़ की गाटा संख्या-831 मि. रकबा- 0-1-15 का पट्टा राजा अजीत प्रताप सिंह सुत राजा बहादुर राजा प्रताप बहादुर सिंह निवासी किला प्रतापगढ़ सिटी से दिनांक-28/11/1987 को पट्टा 30 वर्ष के लिए प्राप्त किया गया था, उक्त पट्टे की अवधि वर्ष-2017 में समाप्त हो चुकी है। वादी मुकदमा शायद यह भूल गया है कि शहर बेल्हाघाट में नॉन जेड ए की जमीन तालुकेदार राजा अजीत प्रताप सिंह की रही है और उनके द्वारा शहर में रहने वाले ब्यक्तियों को आवासीय पट्टा सहित अन्य पट्टा दिया जाता रहा है और लोग उस पर अपना घर बनाकर रहते आ रहे हैं जावेद अहमद भी तो वही सम्पत्ति का एग्रीमेंट लिए हैं, अंतर है तो सिर्फ चौहद्दी का है। जावेद अहमद पट्टे की भूमि का एग्रीमेंट ले सकते हैं, परन्तु भैरोदीन गुप्ता पट्टे की जमीन का बैनामा नहीं ले सकता।   


उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता- 2006 जो फरवरी, 2016 को लागू हुई और नॉन जेड ए में पट्टा धारक को तालुकेदार से आवासीय मामले में स्वतंत्र कर दिया गया। प्रथम पक्ष यानि जावेद अहमद द्वारा आरोपित किया गया है कि द्वितीय पक्ष संख्या-1 को द्वितीय पक्ष संख्या-2 ने बिना पैसा दिए बैनामा करा लिया है। उपरोक्त कथन में प्रथम पक्ष से कोई मतलब ही नहीं है। यह मामला द्वितीय पक्ष संख्या-1 को द्वितीय पक्ष संख्या-2 के बीच का है यदि द्वितीय पक्ष संख्या-1 ये आरोप लगाता तो उसके कथन में बल रहता प्रथम पक्ष यह कथन स्वयं कह रहा है कि बैनामा निरस्तीकरण का वाद न्यायालय में विचाराधीन है फिर ऐसी दशा में जब मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है तो उसे एसडीएम सदर की कोर्ट में घसीटने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि सिविल कोर्ट को ऐसे मामले की सुनवाई करने का अधिकार है न कि एसडीएम कोर्ट को है।  


जब किसी जमीन और मकान के मालिकाना हक का विवाद सिविल कोर्ट में वाद दायर करके निस्तारित करने का प्रकरण विचाराधीन हो तो उस प्रकरण में आपराधिक मामले के अंतर्गत कार्यवाही किये जाने का कोई प्राविधान नहीं है। क्योंकि मालिकाना हक का विवाद सिर्फ सिविल कोर्ट को ही निस्तारित करने का अधिकार प्राप्त है न कि प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. के अंतर्गत मामले में दखल देने की ब्यवस्था है। प्रतिवादीगण संख्या-1 को प्रतिवादीगण-2 ने धोखा देकर बैनामा कराया है। पूरे वाद में वादी मुकदमा जावेद अहमद अपनी पीड़ा का उल्लेख न करके अपने प्रतिवादीगण संख्या-1 व 2 के बीच की पीड़ा का जिक्र किया है किसी ने किसी के साथ क्या किया है ? इसका ठेकेदार वादी मुकदमा जावेद अहमद नहीं है। उन्हें अपनी समस्या कहनी चाहिए और उससे राहत पाने के लिए सक्षम न्यायालय में वाद दाखिल करना चाहिए उस न्यायालय का समय खराब नहीं करना चाहिए जहाँ से मामला का निस्तारण नियमतः नहीं किया जा सकता 


वादी मुकदमा का कहना है कि प्रथम पक्ष और द्वतीय पक्ष के मध्य विवाद उत्पन्न होता रहा है, जिस कारण किसी भी समय गंभीर घटना हो सकती है। प्रतिवादीगण-2 भैरोदीन गुप्ता यह बात स्वीकार करते हैं कि वादी मुकदमा जावेद अहमद निवासी-पतुलकी थाना-कोतवाली अंतु शहर में बिला कब्ज़ा मकान का एग्रीमेंट कराते हैं और कूट रचित दस्तावेज तैयार करके बिना बैनामा लिए उस सम्पत्ति पर मालिकाना हक जताने पहुँच जाते हैं। जब बैनामा नहीं लेंगे और किसी के मकान को कब्जा करने गुंडों के साथ पहुंचेगें तो विवाद होना स्वाभाविक है क्योंकि जो जिस मकान में रह रहा है वह वादी मुकदमा को बिला कब्जा एग्रीमेंट के आधार पर तो देगा नहीं। सारा विवाद स्वयं वादी मुकदमा स्वीकार रहे हैं 

उपरोक्त मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि पुलिस रिपोर्ट सम्बन्धित पुलिस चौकी भंगवा से न लगवाकर सेटिंग के आधार पर मकन्द्रूगंज पुलिस चौकी से लगवाकर प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय के समक्ष प्रेषित की गई है, जो नियम विरुद्ध है साथ ही राजस्व विभाग की भी रिपोर्ट अपने सम्बन्धों के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से लगवाई है वादी मुकदमा जावेद अहमद, पुलिस विभाग और राजस्व विभाग के हल्का लेखपाल आदि को पता है कि जावेद अहमद ही जाकर मौके पर विवाद करते हैं। जावेद अहमद के खिलाफ एक बार प्रार्थी द्वारा कोतवाली नगर में एनसीआर दर्ज हुआ है तो दूसरी बार प्रतिवादीगण-2 के लड़के बृजेश कुमार गुप्ता द्वारा मुकदमा अपराध संख्या- 0510/2021 कोतवाली नगर में दर्ज हुआ है। 


प्रकरण सिविल कोर्ट में बैनामा कैंसिलेशन का विचाराधीन है जो परोक्ष रूप से वादी मुकदमा जावेद अहमद के द्वारा प्रतिवादीगण संख्या-1 रमेश बाजपेयी की माँ कृष्णा देवी से सिविल कोर्ट जूनियर डिवीजन के यहाँ दाखिल कराया है सिविल कोर्ट से संतुष्ट न हुए तो सम्बन्धित पुलिस चौकी को किनारे करके सेटिंग करके दूसरी पुलिस चौकी से प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. माननीय जी के न्यायालय के समक्ष प्रेषित किये हैं बिला कब्ज़ा एग्रीमेंट के आधार पर किसी बैनामेदार के मकान अथवा दुकान को प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा.फौ. निस्तारित नहीं किया जा सकताक्योंकि मामला सिविल प्रक्रिया का हो तो उस दशा में प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-145 (1) जा. फौ. की कार्रवाई नहीं की जा सकती।  


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