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रविवार, 12 सितंबर 2021

प्रतापगढ़ कोतवाली नगर में दर्ज अपराध संख्या-0005/2019 में वर्तमान विवेचना अधिकारी किं कर्तब्य विमूढ़ की स्थिति में, विवेचना का आधार स्तम्भ हुआ धराशायी, मृत्यु प्रमाण पत्र को नगर पालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ ने किया निरस्त

तथ्यों को छिपाकर झूठा हलफ नामा देकर बनवाए गए फेंक मृत्यु प्रमाण के निरस्त होने के बाद कब्रिस्तान के मुखिया अथवा नगरपलिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ के अधिशासी अधिकारी क्या अकबर अली और उनके संरक्षक जावेद अहमद पर धोखाधड़ी का अपराध दर्ज करायेगी...???


शौहर के मौत के बाद बीबी और बाप के न रहने पर बेटों की तरह बाप की सम्पत्ति में बेटी को सुप्रीम कोर्ट ने वारिस माना था और उन्हें भी हक देने का आदेश दिया था,परन्तु प्रतापगढ़ में सुप्रीम कोर्ट आदेश को भी दरकिनार करके राजस्व विभाग ने बना दिया तनहा पौत्र अकबर अली के नाम वारिस प्रमाण पत्र 


हसीना बेगम का मकान जिसे जावेद ने कराया है,बिला कब्जा एग्रीमेंट...


आज प्रतापगढ़ शहर में हो रहे जमीन और जायदाद के उस खेल से आप सभी को अवगत कराना है जिसे सुनकर और जानकर आप सब भी हैरान व परेशान हो जायेंगे। क्योंकि मामला ही कुछ ऐसा है। प्रतापगढ़ शहर का सबसे भीड़ भाड़ वाला एरिया सब्जी मंडी और पंजाबी मार्केट है। प्रतापगढ़ के भूमाफियाओं की नजर यहाँ भी होती है। उनका टारगेट किसी भवन को विवादित करना होता है। उसके लिए सबसे आसान तरीका भूमाफियाओं द्वारा अपनाया जाता है। वह तरीका है किसी भी ब्यक्ति को खड़ा करके बिला कब्जा एग्रीमेंट कराकर उस भवन स्वामी के लिए एक चिंता की लकीर खींच देना

भूमाफिया द्वारा बनवाया गया दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र हुआ निरस्त...


प्रतापगढ़ में राजस्व विभाग के अधिकारियों और पुलिस महकमें से मिलकर प्रतापगढ़ के भूमाफियाओं द्वारा बिला कब्जा एग्रीमेंट के आधार पर मौके पर गुंडई और सरहंगई के बल पर मौका पर जाकर कब्जा करने की धमकी देना और भवन स्वामी के लिए समस्या खड़ी करना है। ऐसा करते ही पुलिस विभाग से 107/116 की पुलिसिया कार्यवाही शुरू हो जाती है। यदि भूमाफिया जावेद अहमद की तरह है तो वह पैसे के बल पर पुलिस से उस भवन को पाने के लिए 145(1) की रिपोर्ट लगवा कर एसडीएम सदर के न्यायालय में भेजवा देते हैं और एसडीएम सदर के यहाँ से उस पर नोटिस भी तामील हो जाती है। भले ही मामला सिविल कोर्ट में प्रचलित हो

 प्रतापगढ़ के राजस्व विभाग ने बनाये नियम विरुद्ध वारिस प्रमाण पत्र...


भूमाफियाओं से पीड़ित इमरान उर्फ सोनू पुत्र निजामुद्दीन, निवासी-टक्करगंज, थाना- कोतवाली नगर, जनपद प्रतापगढ़ का हैइमरान उर्फ सोनू का भूमाफिया जावेद अहमद से जमीनी विवाद हैटक्करगंज स्थित भवन संख्या-18 का बैनामा सोनू की माँ हसीना बेगम द्वारा अपनी माँ यानि सोनू की नानी इसरातुल निशा पत्नी स्व इब्राहिम से दिनांक-19/09/2012 को क्रय किया गया था, उसी भवन को जमीन की सौदागरी करने वाला थाना अंतु क्षेत्र पतुलकी निवासी जावेद अहमद कूट रचित दस्तावेज तैयार करके दिनांक- 21/08/2018 उस ब्यक्ति से एग्रीमेंट करा लिया, जिसका वह स्वामी ही नहीं हैइमरान उर्फ सोनू का आरोप है कि जावेद अहमद एक गिरोह संचालित करता है और शहर में भूमि व भवन का बिला कब्जा एग्रीमेंट कराकर जबरन विवाद उत्पन्न करता है और मूल स्वामी से ब्लैकमेल करते हुए उससे धनादोहन करता हैउनकी बात न मानने पर फेंक मुकदमा लिखवाकर हैरान व परेशान कर उससे धन वसूली का खेल खेलता है ये सारा धन भूमाफिया जावेद अहमद और उसकी टीम लगाती है


जमीन का कारोबारी जावेद अहमद...

भूमाफिया जावेद अहमद जिस भवन का एग्रीमेंट कराया है, वह इमरान उर्फ सोनू के मामा मोहम्मद मुस्तफा के लड़के अकबर अली से कराया हैजबकि सोनू की माँ हसीना बेगम द्वारा अपनी माँ यानि सोनू की नानी इसरातुल निशा पत्नी स्व इब्राहिम से दिनांक-19/09/2012 को बैनामा लिया है इब्राहिम की मौत दिनांक-09/09/2000 को हुई, जिन्हें पल्टन बाजार (चाँद तारा मस्जिद के पास) स्थित कब्रिस्तान में दिनांक-10/09/2000 दफनाया गया। भूमि और भवन का भूखा जावेद अहमद, इमरान उर्फ सोनू के उक्त भवन को सोनू के मामा मोहम्मद मुस्तफा के लड़के अकबर अली से एग्रीमेंट कराने के लिए कूट रचित दस्तावेज तैयार कराया क्योंकि इमरान उर्फ सोनू के नाना इब्राहिम की मौत से पहले सोनू के मामा मोहम्मद मुस्तफा की मौत हो चुकी थी, जिसके कारण उक्त भवन की इकलौती वारिस उसकी नानी इसरातुल निशा हुई और सरकारी अभिलेखों में उन्हीं के नाम नामांतरण भी हुआजिसके आधार पर प्रार्थी की माँ हसीना बेगम ने अपनी माँ इसरातुल निशा से बैनामा लिया


वांछित इमरान हाशमी उर्फ सोनू

इसी बीच भूमाफिया जावेद अहमद की नजर सोनू के मकान पर पड़ गई और जावेद अहमद ने बड़ी चालाकी से अपने धंधे में अकबर अली को शामिल कर लियाअपने मकसद में कामयाब होने के लिए जावेद अहमद ने अकबर अली से गाँजा और स्मैक का धंधा कराने लगा और एक दिन जानबूझकर उसके मकान का एग्रीमेंट कराने के लिए उसे जेल भेजवा दियाताकि अकबर अली, जावेद अहमद के मकड़जाल में उलझ जाए और उसकी हर बात मानने के लिए बाध्य हो जायेजावेद अहमद अपने मकसद में काफी हद तक सफल रहावर्ष-2016 में पुलिस चौकी भंगवाचुंगी के प्रभारी एस एम कासिम सब-इंस्पेक्टर द्वारा चेकिंग के दौरान अकबर अली और उसके साथी श्रीराम विश्वकर्मा को चोरी की मोटरसाइकिल और मोटरसाइकिल की हैंडिल में गांजा के साथ पकड़ लिया। जिसके उपरांत दिनांक- 14-06-2016 को कोतवाली नगर में अपराध संख्या-0453 धारा- 8/20 PNDS Act के तहत मुकदमा दर्ज कर अकबर अली को जेल भेज दिया


नशे का कारोबारी अकबर अली...

इमरान उर्फ सोनू के मुताविक उक्त गांजा बेंचने के धंधे में जावेद अहमद का धन लगा था। क्योंकि जावेद अहमद ही अकबर अली से उसके घर मिलने आता था। उस वक्त अकबर अली अपनी बुआ हसीना बागम के साथ रहता था। अकबर अली को सब लोग बहुत समझाते थे, परन्तु वह किसी की नहीं सुनता था। इसीलिये उसकी दादी इसरातुल निशा जान गई थी कि उसका पुत्र मोहम्मद मुस्तफा मृत हो चुका है और बहू मोहम्मद मुस्तफा मृत होने के पहले घर छोड़कर चली गई थी। पौत्र अकबर अली नसेड़ी निकल गया और घर का सामान आदि बेंचने लगा। इसीलिए इसरातुल निशा अपना मकान अपनी बेटी हसीना बेगम के हाथ बैनामा कर दियालगभग दो वर्ष जेल में रहने के बाद जावेद अहमद को जब यकीन हो गया कि अकबर अली की अब जमानत करा लेने के बाद उसकी योजना सफल हो जायेगी और अकबर अली वही करेगा जो जावेद अहमद चाहेगा। अकबर अली की जेल से जमानत कराकर जावेद अहमद सबसे पहले अकबर अली के जरिये कूट रचित कागजात तैयार कराये और अकबर अली से वह भवन बिला कब्जा एग्रीमेंट करवा लिया जिसमें हसीना बेगम सपरिवार रहती थी


इसरातुल निशा माँ ने बेटी हसीना बेगम के नाम किया है,बैनामा...


इस तरह जावेद अहमद पहले नगरपालिका से असल मृत्यु का दिनांक को छिपाकर 31/05/2001 दिखाकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराया है और उसी आधार पर जिलाधिकारी प्रतापगढ़ के कार्यालय से अकबर अली के नाम तनहा वारिस प्रमाण पत्र जारी करवाया जबकि सोनू की माँ हसीना बेगम और मोहम्मद मुस्तफा दो संतान ही स्व. इब्राहिम के पास रहीफिर भी जावेद अहमद ने तथ्यों को छिपाकर वर्ष-2013 में जो वारिस प्रमाण पत्र बनवाया, उसमें अकेले वारिस अकबर अली को बनवायाइस तरह जावेद अहमद कूट रचित दस्तावेज तैयार करके दिनांक-21/08/2018 को सोनू के भवन का एग्रीमेंट करा लियाजिस आधार पर जावेद अहमद नगरपालिका अभिलेख में स्व इब्राहिम के बाद सीधे अकबर अली का नाम नामांतरण कराया था, उसमें आपत्ति के बाद अकबर अली का नाम खारिज कर दिया गयायही नहीं जेल से छूटने के बाद अकबर अली अपनी बुआ के पास आया और अपने साथ रहने के लिए बहुत मिन्नते की, परन्तु हसीना बेगम का एक ही शर्त थी कि वह नशे की लत छोड़ दे और जावेद अहमद के गांजे वाले धंधे से अपने को अलग कर ले


अकबर अली को अपने बुआ हसीना की बात रास आई और वह अपनी बुआ के साथ रहने भी लगा हसीना बेगम ने एक दिन अकबर अली को बताया कि उसके नाम से न्यायालय अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतापगढ़ के यहाँ कोई मुकदमा किया है तो अकबर अली चौक गया और कहने लगा कि वह तो कोई मुकदमा किया ही नहीं ! फिर उसके नाम से कौन मुकदमा दायर किया ? फिलहाल न्यायालय अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतापगढ़ के यहाँ अकबर अली बनाम हसीना के एक वाद में अकबर अली ने शपथ पत्र दाखिल किया। चूँकि अकबर अली जब जेल में बंद था तब किसी ब्यक्ति द्वारा न्यायालय अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतापगढ़ के यहाँ अकबर अली के नाम से एक वाद दाखिल किया था जेल से छूटने के बाद अकबर अली को जब हसीना बेगम ने मुकदमा की बात बताई तो अकबर अली उस मुकदमें को खत्म करने के लिए एक शपथ पत्र न्यायालय में दाखिल किया


वर्ष-2016 में जो अकबर अली न्यायालय अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतापगढ़ के यहाँ शपथ पत्र देकर फेंक वाद को लड़ने से मना कर दिया था और अपनी दादी इसरातुल निशा द्वारा बुआ हसीना बेगम के पक्ष में किये गए बैनामे से कोई शिकायत न होने का शपथ पत्र दिया, उसी अकबर अली से भूमाफिया जावेद अहमद ने वर्ष-2018 में उसी भवन का बिला कब्जा एग्रीमेंट करा लिया। है न मजेदार कहानी ! इस खेल को जावेद अहमद बड़ी ही चालाकी से खेलाक्योंकि अकबर अली के नाम जो कागजात उक्त भवन का जावेद अहमद ने तैयार किया, वह सोनू के नाना इब्राहिम को आधार बनाकर कियाजबकि इब्राहिम की मौत के बाद तनहा वारिस उनकी पत्नी इसरातुल निशा रही और इसरातुल निशा अपने पति की मौत के बाद अपने मकान का स्थानान्तरण स्वयं के नाम करा लिया थाचूँकि इसरातुल निशा के एक ही लड़का मोहम्मद मुस्तफा रहा, जो उनके पति से पहले ही मर चुका थामोहम्मद मुस्तफा की मौत से पहले ही उसकी पत्नी मोहम्मद मुस्तफा को छोड़कर चली गई थीफिर इसरातुल निशा के साथ सोनू और उसकी माँ और भाई एवं पिता रहते हुए उनकी सेवा आदि करने लगे


पति और बेटे की मौत के बाद आवारा और नसेड़ी पौत्र अकबर अली की चाल-चलन से अस्तुष्ट होकर सोनू की नानी इसरातुल निशा अपने जीवनकाल में अपने भवन को बेंचने की इच्छा जताई तो सोनू की माँ उचित रकम अदा करके अपने नाम बैनामा करा लियाइसी वजह से तिकड़मी जावेद अहमद द्वारा हसीना बेगम के बैनामे से अर्जित मकान का बिला कब्जा एग्रीमेंट अकबर अली से कराकर जावेद अहमद ने उसी अकबर अली को मोहरा बनाकर सोनू और उसके भाई इरफान के ऊपर कोतवाली नगर प्रतापगढ़ में मुकदमा अपराध संख्या-0005/2019, दिनांक- जनवरी, 2019 फेंक मुकदमा लिखाकर हैरान व परेशान करना शुरू किया। पूरे मुकदमें की पैरोकारी जावेद अहमद ही करता है। वादी मुकदमा अकबर अली का कहीं अता पता नहीं रहता जबकि सच्चाई यह है कि उक्त मुकदमा में जो आरोप अकबर अली द्वारा लगाया गया है वह बेबुनियाद है और आधारहीन व बलहीन है। फिर कई विवेचना अधिकारियों ने उसे उलझाया कि वह आज खुद ही उलझकर रह गए हैं। उक्त मुकदमें के वर्तमान विवेचनाधिकारी किं कर्तब्य विमूढ़ की स्थिति में दिख रहे हैं


चूँकि जिस आधार पर उक्त मुकदमें की विवेचना को आगे बढ़ाया गया, वह आधार ही ध्वस्त हो गया। उक्त मुकदमें की विवेचना का मूल आधार अकबर अली द्वारा बनवाया गया अपनी दादी इसरातुल निशा की मृत्यु प्रमाण पत्र दिनांक-14/03/2019 नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ द्वारा निरस्त कर दिया गया। क्योंकि इसरातुल निशा की बेटी हसीना बेगम ने अपनी माँ का मृत्यु प्रमाण पत्र दिनांक-25/10/2012 को ही नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ द्वारा निर्गत करा लिया थाजमीन का कारोबारी जावेद अहमद द्वारा टक्करगंज स्थित भवन संख्या-18 के एग्रीमेंट लेने के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद मान्यवर जावेद अहमद ये सारे मिथ्या आरोप लगाते हुए एक षड़यंत्र के तहत सोनू व उसके परिवार के लोगों पर फेंक मुकदमा दर्ज कराये हैंसारे फसाद की जड़ भूमाफिया जावेद अहमद ही हैंचूँकि दर्ज मुकदमें में अकबर अली वादी हैं और FIR में वादी अकबर अली के मोबाइल नम्बर की जगह जावेद अहमद का मोबाइल नम्बर 9919553235 अंकित है


साथ ही दर्ज उक्त मुकदमें में आरोपित किया गया है कि सोनू माँ हसीना बेगम ने जो बैनामा लिया है, उसमें अजनबी महिला की फोटो लगाकर फर्जी तरीके से बैनामा प्राप्त किया गया हैजबकि सच्चाई यह है कि रजिस्ट्री दफ्तर में जहाँ बैनामा होता है, वहाँ कैमरा लगा होता है और कैमरे के सामने डिजिटल सिंग्नेचर और हाथ का अंगूठा लगाया जाता हैसाथ ही सब रजिस्ट्रार महोदय के सामने पेशी होती है और विक्रेता का बयान लिए जाने की ब्यवस्था होती हैएक बैनामे में दस्तावेज लेखक, बैनामे के दो हाशिया गवाह और क्रेता व विक्रेता के साथ-साथ उप निबंधक कार्यालय का रोल उसकी रजिस्ट्री में होता हैवादी मुकदमा अकबर अली की बात मान भी ली जाए तो इसरातुल निशा के स्थान पर किसी अजनबी महिला की फोटो लगाकर यदि फर्जी तरीके से इमरान उर्फ सोनू और उनकी माँ हसीना बेगम द्वारा अकबर अली की प्रापर्टी बैनामा करा लिया था तो उप निबंधक कार्यालय और दस्तावेज लेखक सहित हाशिया गवाह भी तो आरोपी बनते, परन्तु अकबर अली जो जावेद अहमद के हाथ का मोहरा है वह वही किया जो जावेद अहमद ने चाहा


चूँकि जावेद अहमद तो यही चाहते हैं कि जी भवन को जावेद अहमद ने बिला कब्जा एग्रीमेंट लिया है, वह इमरान उर्फ सोनू के कब्जे में है जब इमरान उर्फ सोनू को फेंक मुकदमें में फंसाकर जेल भेजवा देंगे तो वह अंततः टूट जायेगा और जेल से निकलकर समझौता कर लेगाइमरान उर्फ सोनू ने बताया कि जावेद अहमद धमकी देता है कि उसकी पकड़ जेल में बंद बड़े-बड़े खुंखार और शातिर अपराधियों से भी हैं। जेल भेजवाने के बाद इमरान उर्फ सोनू को इतना टार्चर कराऊंगा कि वह अपना मकान भूल जायेगा और प्रतापगढ़ छोड़कर भाग जायेगा इसीलिये जब जेल से बंदी और कैदी जिला कचेहरी आते हैं तो जावेद अहमद उसकी खिदमतदारी करते नजर आता हैइमरान सोनू का कहना है कि उसके ऊपर फेंक आरोप लगाकर लिखाया गया उक्त मुकदमा बेबुनियाद और असत्य कथनों पर आधारित है। वह किसी भी जाँच के लिए तैयार है। सरकार चाहे तो राज्य की जाँच एजेंसी सीबीसीआईडी अथवा देश के सबसे बड़ी जाँच एजेंसी सीबीआई से करवा लेइमरान सोनू ने कहा कि उसे अदालत पर पूर्ण भरोसा है। सत्य परेशान हो सकता है, किन्तु पराजित नहीं हो सकता। सत्य की रह पर चलते हुए जावेद अहमद जैसे भूमाफिया से लड़ता रहूँगा और अपने नानी की सम्पत्ति की रक्षा करता रहूँगा


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