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रविवार, 26 सितंबर 2021

कांग्रेस के अभेद दुर्ग के नाम से जाना जाने वाला रामपुरखास विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक जमीन तलाशने वालों की होती रही पिटाई, आइये जाने कितने जनप्रतिनिधियों को प्रमोद और मोना ने अभी तक पिटवाया...???

अपने विधानसभा रामपुरखास में ही नहीं बल्कि प्रयागराज के झूंसी थाने में 17 नवम्बर, 2011 को कथित कांग्रेस के दिग्गज प्रमोद कुमार अपने युवराज राहुल गाँधी की गुड लिस्ट में आने के लिए उन्हें काला झंडा दिखाने वाले युवा सपा नेता को लातों से मार मारकर कर दिया था,अधमरा 


इस तरह जलवा बिखेरते हुए विधानसभा क्षेत्र में निकलते हैं,बाप-बेटी...

प्रतापगढ़ जनपद में कुल सात विधानसभा है। रामपुरखास विधानसभा में 45 सालों से कांग्रेस का कब्जा रहा है।गिनीज बुक में एक ही दल और एक ही झंडे व एक ही विधानसभा से लगातार 9 बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले प्रमोद कुमार का नाम वर्ड की गिनीज बुक में दर्ज हुआ। परन्तु इसके साथ प्रमोद कुमार मारपीट करने का भी रिकार्ड कायम किया है। रामपुरखास में जनप्रतिनिधियों की पिटाई के साथ प्रयागराज झूंसी में राहुल गाँधी की जनसभा में सपा के युवा नेता को उस समय लातों से पिटाई की थी, जब वह राहुल गाँधी को काला झंडा दिखाने की गुस्ताखी की थी लात मारते हुए प्रमोद कुमार की फोटो अखबार में सुर्खिया बनी थी उसकी शिकायत पर  प्रयागराज के झूंसी थाने में 17 नवम्बर, 2011 को प्रमोद कुमार सहित कई कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था कांग्रेस के कथित दिग्गज नेता प्रमोद कुमार दिन भर लोकतंत्र की बहाली पर भाषण देते नहीं थकते, परन्तु जब अपनी बारी आती है तो सारा लोकतंत्र ताक पर रख देते हैं और लोकतंत्र को शर्मसार करने में कोई संकोच नहीं करते  


सांसद संगम लाल गुप्ता की पिटाई के बाद प्रमोद और मोना डैमेज कंट्रोल करते हुए...

मुझे कभी रंच मात्र भी संदेह नहीं रहा कि उनका राजनीतिक वर्चस्व हिंसा पूर्ण और भय आधारित नहीं है वे प्रदेश, देश के अपने पूर्ववर्तियों में से कुछ एक की तरह सफेदपोश अपराधी राजनीतिज्ञ हैं। अपवाद को छोड़ दें तो लगभग सभी ऐसे महानुभावों, जिन्होंने रामपुर विधानसभा क्षेत्र में किसी भी प्रकार का राजनैतिक हस्तक्षेप किया होगा, उसके साथ कथित दिग्गज नेता प्रमोद कुमार ने हिंसा करने-कराने का प्रयास सदैव ही किया था। चाहे रामपुरखास से उनके सामने विधानसभा चुनाव लड़ने वाले रहे हों अथवा पंचायतों के चुनाव में भागीदारी करने-कराने वाले हों अथवा लोकसभा प्रत्याशी हों या लोकसभा सदस्य अथवा विधान परिषद सदस्य रहे हों ! साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी प्रमोद कुमार ने नहीं बख्सा। रामपुरखास में राजनीतिक जमीन तलाशने वाले राजनीतिक लोगों को प्रमोद कुमार अपने समर्थकों और सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त एसपीजी सुरक्षा ब्यवस्था के बल पर अपने विधानसभा क्षेत्र में दौड़ा-दौड़ा कर पिटवाया और मुकदमा अलग से लिखवाया। 


अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने के बाद भी विधायक बेटी के साथ में बने रहते हैं,नेताजी 

रामपुरखास विधानसभा में अब तक घटित कुछ घटनाओं की यादें ताजा कराता हूं उदहारण के लिए कुछ नाम आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसमें पूर्वमंत्री स्वर्गीय राजाराम पांडेय, पूर्व कुलपति आर पी मिश्रा, विधान परिषद सदस्य अक्षय प्रताप सिंह गोपाल, सांसद कुंवर हरिवंश सिंह, कई बार रामपुरखास विधानसभा के उम्मीदवार रहे हीरामणि पटेल, पूर्व सांसद स्व. चन्द्र नाथ उर्फ सीएन सिंह, नागेश प्रताप सिंह "छोटे सरकार"के बाद अब भाजपा सांसद संगम लाल गुप्ता और सांगीपुर ब्लॉक प्रमुख चुनाव के उम्मीदवार रहे गुड्डू पाण्डेय सहित दर्जनों भाजपाईयों को जिस तरह दौड़ा दौड़ाकर कांग्रेस के कथित दिग्गज प्रमोद कुमार और उनकी विधायक बेटी मोना मिश्रा ने पिटवाया वह शर्मनाक रहा। भाजपाईयों के साथ मारपीट के साथ-साथ उनकी गाड़ियां भी तोड़वा डाली। पाँच लोगों ने तहरीर देकर अलग-अलग मुकदमा लिखवाया है। सभी मुकदमों में पूर्व सांसद प्रमोद कुमार और विधायक अराधना मिश्रा मोना नामजद हैं और संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत हुआ है।  


इसकी ताजा बानगी देखने के लिए रामपुरखास विधानसभा के सांगीपुर ब्लॉक परिसर में जिला पंचायत चुनाव लड़े अभिषेक मिश्रा व सांगीपुर से ब्लाक प्रमुख चुनाव के भाजपा समर्थित उम्मीदवार ओम प्रकाश पांडेय उर्फ गुड्डू जिन्हें कल ही ब्लॉक परिसर में दौड़ा-दौड़ाकर गिराकर लातों से जी भर कर पीटा गया, वह लोकतंत्र के लिए काला दिन के समान रहा। अभी तक सूबे में सपा और बसपा की सरकार थी तो कांग्रेस के कथित दिग्गज प्रमोद कुमार विपक्ष में रहकर भी सपा और बसपा की सरकार में अपना सिक्का जामये रखने में सफल रहे। सपा और बसपा सरकार में बैशाखी के सहारे अपनी अपराधी मानसिकता का होने और आपराधिक क्रिया-कलाप करने-कराने के पश्चात भी वे अपने आप को प्रतापगढ़ से बाहर तथाकथित भला मानुष कहलवाने में सफल रहे हैं यह उनकी विशेषता कही जाती है। इस तरह वे कानूनी कार्यवाहियों के प्रभाव से बचते रहे और समय के साथ निरंतर मनबढ़ होते चले गए थे 


शायद इसीलिए इस प्रकार की घटनाओं के घटने के उपरांत भी स्वयं के ऊपर आच नहीं आने का विश्वास, निश्चिंतता उनके चेहरे और बातचीत में आज भी झलकती है। परन्तु इस बार हालात बदले हुए हैं और सूबे में भाजपा की योगी सरकार है। देखना है योगी सरकार इस कथित कांग्रेसी दिग्गज प्रमोद कुमार का इलाज कर पाती है अथवा रामपुरखास विधानसभा में भाजपा बैकफुट पर रहते हुए प्रमोद कुमार के कृत्यों को अनदेखा कर देगी। कल की घटना हिंसापूर्ण भय आधारित उनके अपना वर्चस्व बनाये रखने के क्रम में ही घटी हैयह घटना कोई अचानक नहीं घटित हुई, सबके पास सोंटा, डंडा, स्टंप, हाकी होने से स्पष्ट है कि यह सब सुनियोजित था‌। आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत इस प्रकार का शर्मनाक कृत्य करे-कराये जाने का आरोप विधायक रामपुरखास आराधना मिश्रा उर्फ मोना और प्रमोद कुमार पर एफआईआर दर्ज होने से सिद्ध हुआ है। 


लोगों का मानना है कि यदि प्रभावपूर्ण, आवश्यक कानूनी कार्यवाही नहीं हुई तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं में भय ब्याप्त हो जायेगा और वहाँ पर भाजपा के उम्मीदवार के सामने समर्थकों और कार्यकर्ताओं का घोर आभाव दिखेगा कांग्रेस के कथित दिग्गज नेता प्रमोद कुमार और उनकी पुत्री आराधना मिश्रा उर्फ मोना को आगामी विधानसभा में इस बात का भी सता रहा है कि कहीं उनके हाथ से विधायकी खिसक न जाये। इसी भय से प्रमोद और मोना रामपुरखास विधानसभा में अपना बर्चस्व बनाये रखने के लिए समय-समय पर तांडव कराया जाता रहा है पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, पूर्व मंत्री स्व. राजाराम पाण्डेय को बड़ी चालाकी के साथ प्रमोद कुमार रामपुरखास विधानसभा से हटवाकर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज करवाने में सफल रहे। 70 वर्षीय प्रमोद कुमार को अब गुंडई करना शोभा नहीं देता। परन्तु पुत्र और पुत्री मोह चाहे जो करा दे ! सत्ता का नशा ही ऐसा होता है  


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