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गुरुवार, 16 सितंबर 2021

देशभर में बाढ़ और बारिश से 'त्राहिमाम', पहाड़ों से मैदान तक बारिश ने जनजीवन को किया अस्त ब्यस्त

देश के कई प्रदेश बाढ़ की चपेट में, मूसलाधार बारिश की वजह से सैकड़ों लोगों की मौत, कई दर्जन घायल, हालात बद से बद्तर 


खुलासा इंडिया की अपील-"जर्जर मकानों को छोड़कर गांव और इलाके के सरकारी भवनों में रहें। किसी भी आफत-परेशानी में सम्बंधित ग्राम प्रधान, लेखपाल एवं सक्षम अफसरों से मांगें मदद।"


उफ ! ये बारिश...

बरसात का अंतिम माह सितम्बर का माना गया है। अमूमन माह सितम्बर में बरसात कम होती है,परन्तु कभी काल माह सितम्बर में भारी बरसात होती है तो हालात बाढ़ के हो जाते हैं। अभी माह अगस्त में कई जिले बाढ़ग्रस्त हुए थे अभी माह अगस्त की बाढ़ से लोग राहत की सांस ले ही रहे थे कि माह सितम्बर में तीन दिन से हो रही बरसात ने जनजीवन अस्त ब्यस्त करके रख दिया। जब ऐसी बरसात होती है तो कई जिले प्रभावित होते हैं


संगम नगरी प्रयागराज में बरसात से खराब हुए हालात...

सूबे के कई जिले में तीन दिन की बरसात ने ऐसा कहर बरपाया कि लोगों के आशियाने धराशायी हो गया। कई परिवार तो दबकर उसी में जमीदोंज हो गए। कई बुरी तरह घायल हो गये हैं। शासन व प्रशासन की तरफ से अभी तक उन परिवारों की सुध नहीं ली गई है। गाँवों में कच्चे खपरैल मकान की तो इस बरसात में सामत आ गई है। कई कच्चे खपरैल मकान गिरने की सूचना है    


देश की राजधानी दिल्ली में बारिश ने हालात और बुरे किये...

इस बारिश ने शहर से लेकर गांव तक को तालाब की शक्ल में बना दिया है। शहर समेत गाँव में विजली उप केंद्रों पर कई घण्टे से विद्युत आपूर्ति बाधित है। मोबाइल में कई कंपनियों के नेटवर्क दिन भर से गायब हैं। लोग बात करने के लिए तरस गए आज बरसात का तीसरा दिन है। अभी शुक्रवार को भी भारी बारिश का अलर्ट घोषित है। मौसम विभाग का भी आंकलन इस बार फेल रहा बारिश की वजह से शुक्रवार को भी स्कूल व कालेज बंद रहेगें। 


उत्तर प्रदेश में कई जिलों में कच्चे मकान हुए धराशायी...

कचेहरी में वादकारियों के हित के लिए अधिवक्ताओं ने हड़ताल का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया, जिससे दो दिनों से कचेहरी के भी कार्य ठप्प रहे। मनुष्यों के साथ-साथ मूसलाधार इस बारिश में जानवरों और पशु पक्षियों के जीवन को प्रभावित कर रखा है। लगातार बारिश ने हरी सब्जियों और फलों को सड़ा कर रख दिया। लोग अपने घरों से खरीददारी के लिए निकल न सके। बादलों की गर्जना से लोग घबड़ा जा रहे हैं। उन्हें लगता है कि कहीं आकाशीय बिजली न गिर जाये। कई पेड़ तो सड़क पर ही गिर गए, जिससे आवागमन तक प्रभावित हुआ है।     


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