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शुक्रवार, 3 सितंबर 2021

बिकरू कांड : आयोग की जांच में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट डीआईजी समेत 12 पुलिस कर्मियों पर दोष साबित

अपर मुख्य सचिव, "गृह" अवनीश अवस्थी  के सम्बन्ध गैंगेस्टर अपराधी विकास दुबे और बिजनेस पार्टनर जय बाजपेयी से उजागर हुए थे,परन्तु उसे दबा दिया गया...


गैंगस्टर विकास दुबे के हाईप्रोफाइल कनेक्शन...

कानपुर क्षेत्र में सांसद और विधायक मेकर खुंखार अपराधी विकास दुबे जो सफेदपोश अपराधियों का बादशाह बनकर उत्तर प्रदेश की नौकरशाही का भी चहेता बन गया था, पुलिस विभाग में एसएसपी /डीआईजी अनंत देव तिवारी तो महज बानगी रहे, असल में अपर मुख्य सचिव, "गृह" अवनीश अवस्थी तक से दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के सम्बन्ध निकल कर सामने आये थे, परन्तु जब बात बड़े स्तर पर पहुँचती है तो वहीं शांत  हो जाती है  विकास दुबे एक दिन में  अपराध का पर्याय नहीं बना, बल्कि उसे सत्ता की बागडोर थामने वाले ही उसके संरक्षक बने तो वह अपराध की दुनिया बेताज बादशाह बना । विकास दुबे के बिजनेस पार्टनर जय बाजपेयी और अपर मुख्य सचिव, "गृह" अवनीश अवस्थी की फोटो तक वायरल हुई थी, परन्तु योगी सरकार उस मामले को दबा दिया ।  

 

दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और बिजनेस पार्टनर जय बाजपेयी का ACSहोम से कनेक्शन...

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए बिकरू कांड को आज भी लोग भूले नहीं, क्योंकि घटना ही ऐसी घटित हुई थी कि आज भी सोचकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सूबे में ऐसा दिल दहला देने वाला कांड किसी ने नहीं देखा रहा होगा। चूँकि घटना और प्रायोजित घटना में बहुत अंतर होता है। बिकरू काण्ड में पुलिस वाले ही गैंगेस्टर अपराधी विकास दुबे को मुखबिरी करके अपने ही पुलिस परिवार के जवानों को मरवा दिया था। बिकरू काण्ड के बाद योगी सरकार ने आयोग गठित कर जाँच कराने का निरनय लिया था। एक साल में गठित आयोग की जांच पूरी कर ली गई है। जांच में तत्कालीन डीआईजी अंनत देव तिवारी समेत 12 डिप्टी एसपी स्तर के पुलिस कर्मियोंं को दुर्दांत विकास दुबे को शरण दिए जाने व कार्रवाई में नरमी बरते जाने का दोषी पाया गया है।


अपराधियों का बेताज बादशाह विकास दुबे और SSP/DIG अनंत देव से कनेक्शन...


बिकरू कांड को अंजाम देने वाला गैंगस्टर विकास दुबे मारा गया और पुलिस ने उसके गैंग का पूरी तरह से सफाया कर चौबेपुर इलाके को अपराधियों से पूरी तरह से मुक्त करा दिया। अब अपराधी के मददगारों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। जांच आयोग ने कानपुर के तत्कालीन एसएसपी/डीआईजी रहे अंनत देव तिवारी के साथ डीएसपी सूक्ष्म प्रकाश, आरके चतुर्वेदी, करुणा शंकर राय, पासपोर्ट नोडल अफसर अमित कुमार, नंदलाल प्रताप, हरेंद्र कुमार यादव, सुंदरलाल, प्रेम प्रकाश, राम प्रकाश, सुभाष चंद्र और लक्ष्मी निवास को दोषी पाया है। आयोग ने इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की संतुति की है। आयोग ने पाया है कि बिकरू कांड के पीछे इनकी मिलीभगत व घोर उदासीन रवैया अपनाया गया है। साथ ही साथ विकास दुबे को शरण देने और उस पर नरमी बरतने में पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ी। इसलिए इन सभी को दोषी ठहराया है।


खुंखार अपराधी विकास दुबे के पार्टनर जय बाजपेयी और बीजेपी का कनेक्शन...

बिकरू कांड में पीठासीन अधिकारी नियुक्त कर आरोपों की जांच होती है। इसमें आरोपी को पक्ष लिखने का मौका भी दिया जाता है। दोषी को तीन तरह की सजा का प्रावधान है। पहला- ऐसी बर्खास्तगी, जिसमें सभी प्रकार की सरकारी नौकरी के लिए आयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। दूसरा- केवल विभागीय बर्खास्तगी और तीसरा- न्यूनतम वेतनमान कटौती किए जाने की कार्रवाई को अमल में लाया जा सकता है। 2 जुलाई, 2020 को बिकरू गांव में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इस वारदात को गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गैंग के बदमाशों ने अंजाम दिया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के चलते पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विकास दुबे समेत गैंग के 6 गुर्गों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। साथ ही उसके मददगारों पर शिकंजा कसते हुए पुलिसकर्मियों समेत 34 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।


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