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बुधवार, 8 सितंबर 2021

लौटकर बुद्धू घर को आया वाली कहावत को चरितार्थ कर सकते हैं,चाचा शिवपाल यादव

यूपी चुनावों के बारे में चाचा शिवपाल से फोन पर हुई है,बात-अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी


जसवंत नगर की एक सीट चाचा शिवपाल यादव के लिए सुरक्षित, अन्य सीटों पर बैठकर हो जायेगी बात, जैसा चाचा का छोटा दल है,वैसी ही होगी सीटों पर बात


शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच आज भी सेतु का काम करते हैं,मुलायम...

आखिरकार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने और चाचा शिवपाल यादव के बीच पक रही खिचड़ी पर पत्ता खोल दिया है और कहा है कि चाचा और चाचा के दल का समाजवादी पार्टी में सम्मान है, चाचा का छोटा सा दल है, उसके मुताविक उन्हें उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2022 में सम्मान के साथ कुछ सीटें दे दी जायेगी, जिसमें जसवंत नगर की एक सीट देनी पहले से ही तय है अखिलेश और शिवपाल यादव सगे चाचा और भतीजे हैं वर्ष-2012 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मुलायम सिंह न बैठकर अपने बड़े बेटे अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की कमान सौंप दी। यह बात चाचा शिवपाल यादव के रास न आई और किसी तरह 5 साल का कार्यकाल पूरा किये अंतिम वर्ष यानि चुनावी साल में समाजवादी पार्टी में ड्रामा होना शुरू हुआ


चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अखिलेश यादव में मिलन के आसार हुए तेज... 

अखिलेश यादव को टीपू सुल्तान तक की उपाधि से नवाजा गया शिवपाल यादव अपने भाई मुलायम सिंह की चाल को समझ न सके मुलायम सिंह धृतराष्ट्र बन गए और पुत्रमोह में समाजवादी पार्टी के अंदर महाभारत शुरू हो गया मुलायम सिंह कभी भाई शिवपाल के मंच पर समाजवादी की टोपी लगाकर पहुँच जाते तो कभी अखिलेश यादव को आशीर्वाद देने समाजवादी पार्टी के मंच पहुँच जाते थे सबसे मजेदार बात उस समय हुई जब भारत निर्वाचन आयोग में समाजवादी पार्टी के सिम्बल को जब्त करने की बारी आयी तो मुलायम सिंह सबको दाँव देते हुए अपना आवेदन ही वापस ले लिया और कहा कि जिस पेड़ को पाल पोसकर बड़ा किये, उसे वह काट नहीं सकते उस वक्त सबसे धर्म संकट में मुलायम सिंह के अति करीबी अमर सिंह को झटका लगा था


भाई और पुत्र के बीच में मुलायम बनते थे,संयोजक...

सारा ड्रामा खत्म हुआ तो शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के सिम्बल पर विधायक रहते हुए भारत निर्वाचन आयोग में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया और स्वयं उस दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन बैठे भारत निर्वाचन आयोग में किसी भी दल का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 100 सदस्यों का होना आवश्यक है और वह 100 सदस्य किसी भी राजनीतिक दल के प्राथमिक सदस्य भी नहीं होने चाहिए इसके लिए सभी सदस्यों से हलफनामा लिया जाता है परन्तु भारत में कानून का मजाक कानून बनाने वाले ही करते हैं शिवपाल यादव जो स्वयं जसवंत नगर से समाजवादी पार्टी के सिम्बल साईकिल से चुनाव लड़कर विधायक बने थे, वह स्वयं भारत निर्वाचन आयोग में झूठा हलफनामा देकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया और स्वयंभू उस दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए


धृतराष्ट्र की भूमिका में मुलायम सिंह...

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त खाने के बाद अपने चाचा शिवपाल यादव की विधानसभा सदस्यता को खत्म करने के लिए पत्र लिखा, परन्तु अंदर ही अंदर परिवार प्रेम में मुलायम सिंह के दखल के बाद उसे वापस ले लिया गया और शिवपाल यादव की विधान सभा सदस्यता बरकरार रह गई शिवपाल यादव सिर्फ भारत निर्वाचन आयोग में ही झूठा हलफनामा नहीं दिए बल्कि लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर अपने दल प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ते समय फिर झूठा हलफनामा जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष दिए शिवपाल यादव इस बात को गोल कर गए कि वह समाजवादी पार्टी के विधायक है और विधायक रहते वह प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार हैं


समय रहते मुलायम सिंह यादव ने वर्ष-2012 में तय कर दिया था,अपना उतराधिकार...

उत्तर प्रदेश में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के चुनाव में उतरने के ऐलान के बाद समाजवादी पार्टी और शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी में सुलह समझौते की जो स्थिति बन रही है वह चाचा और भतीजे की राजनीतिक मजबूरी भी हो सकती है यदि शिवपाल यादव विधायक भी न बन सके तो उनकी राजनीतिक रूप से हत्या हो जायेगी इसलिए अपने वजूद को बचाए रखने के लिए शिवपाल यादव अपने दल प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को समाजवादी पार्टी में विलय कर सकते हैं और भतीजे के साथ दो बात सुन व सहनकर एक ही दल में रहकर राजनीतिक मजबूती बनाए रखने में ही भलाई है। यह बात महज तीन साल में ही समझ आ गई। इसलिए चाचा शिवपाल यादव और भतीजा अखिलेश यादव में समझौता की राह आसान हुई है


कहा जा रहा है कि सद्भावना के तौर पर यदि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव प्रस्‍ताव रखते हैं तो शिवपाल यादव की पार्टी अपने कुछ उम्‍मीदवारों को समाजवादी पार्टी के निशान तले चुनावी मैदान में खड़ा कर सकती है। भतीजे अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के ठंडे पड़ चुके रिश्‍तों में फिर से एक बार गर्मी आती दिख रही हैं हाल ही में अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी, चाचा शिवपाल यादव से यूपी विधानसभा चुनावों के सिलसिले में फोन पर बात हुई इससे पहले शिवपाल यादव ने अफसोस जताया था कि भतीजे अखिलेश के पास इतनी भी फुर्सत नहीं कि उनका फोन उठा लें भतीजे अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के ठंडे पड़ चुके रिश्‍तों में फिर से एक बार गर्मी आती दिख रही हैं। हाल ही में पूर्व मुख्‍यमंत्री और समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी चाचा शिवपाल यादव से यूपी में विधानसभा चुनाव-2022 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के सिलसिले में फोन पर बात हुई है।


समाजवादी पार्टी से गठबंधन की इच्छा रखने वाले शिवपाल यादव लगातार सपा सुप्रीमों पर रिश्तों को लेकर कटाक्ष करते रहेलगभग एक सप्‍ताह पहले शिवपाल यादव ने अफसोस जताया था कि सीएम योगी तो उनका फोन उठा लेते हैं लेकिन भतीजे अखिलेश के पास इतनी भी फुर्सत नहीं। मैनपुरी में मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान यह सवाल उठा था कि क्‍या वह आगामी चुनावों में शिवपाल यादव से हाथ मिला सकते हैं। इस पर अखिलेश बोले, 'वह एक पार्टी के मुखिया हैं। हम उनकी पार्टी के लिए जगह बनाएंगे। उनको हम पूरा सम्‍मान देंगे।' लेकिन सबसे ज्‍यादा लोगों को उनके उस बयान से हैरानी हुई ज‍िसमें उन्‍होंने कहा, 'बातचीत फोन पर हुई है। असल में 27 अगस्‍त को लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ अपने रिश्‍तों पर शिवपाल ने कहा था, 'मुख्‍यमंत्री योगी तो फोन पर आ जाते हैं, लेकिन भतीजे फोन पर भी नहीं आते हैं इसका मुझे बहुत दुःख भी है और बेहद अफसोस भी है।'

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय की संभावना से किया इंकार

हालांकि पार्टी के सूत्रों ने दोनों दलों के विलय की संभावना से इनकार किया है। फिर भी यह कहा जा रहा है कि सद्भावना के तौर पर अगर अखिलेश प्रस्‍ताव रखते हैं तो शिवपाल यादव की पार्टी अपने कुछ उम्‍मीदवारों को समाजवादी पार्टी के निशान तले चुनावी मैदान में खड़ा कर सकती है। एक दूसरे सूत्र का कहना था, 'अभी तक इस मसले पर कोई विचार नहीं हुआ है। लेकिन इससे पहले ऐसे उदाहरण रहे हैं, जहां सहयोगी दलों के उम्‍मीदवार समाजवादी पार्टी के टिकट और चुनाव चिन्‍ह पर मैदान में उतरे हैं। आने वाले चुनावों में भी ऐसा देखने को मिल सकता है। चाचा शिवपाल यादव अपनी पार्टी का विलय समाजवादी पार्टी में करने के लिए अभी भी तैयार नहीं दिख रहे हैं। जबकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की इच्छा है कि चाचा शिवपाल यादव अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का विलय समाजवादी पार्टी में कर दें। अभी यही पेंच चाचा और भतीजा में फंसा हुआ हैप्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव सिर्फ समाजवादी पार्टी से विधानसभा चुनाव-2022 में गठबंधन से चुनाव लड़ना चाहते हैं


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