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शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

प्रतापगढ़ कोतवाली नगर के भंगवा चुंगी रोड़ से 100 मीटर दूर कचेहरी रोड़ पर बिजली के पोल से भिड़ा ई-रिक्शा,चालक सहित ई-रिक्शा में सवार यात्री हुए घायल

ई-रिक्शा संचालकों ने बिगाड़ दी है,शहर की यातायात ब्यवस्था

पचास फीसदी ई-रिक्शा चालक नशेड़ी हैं और 90फीसदी ई रिक्शा चालकों के पास वाहन चलाने का नहीं है,लाइसेंस

अधिकांश ई-रिक्शा बिना परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए ही सड़क पर दौड़ रहे हैं और सरकार को लगा रहे हैं,चूना

कचेहरी से भंगवा चुंगी रोड़ पर बिजली पोल से अनियंत्रित होकर भिड़ा ई-रिक्शा...
भंगवाचुंगी पुलिस चौकी से 100 मीटर दूर कचेहरी रोड़ पर आज सुबह 9:15 पर एक ई रिक्शा कचेहरी से भंगवा चुंगी की तरफ जा रहा था। इतने में एक आवारा पशु ई-रिक्शा के सामने आ गया। उसे बचाने के चक्कर में ई-रिक्शा सड़क के किनारे बिजली के पोल से जा टकराया। ई-रिक्शा चालक और उसमें बैठी सवारियां बुरी तरह घायल हो गई। ई-रिक्शा चालक और घायल सवारियों को ईलाज हेतु लोगों ने जिला मेडिकल कालेज दूसरे ई-रिक्शा से भेजवाया।

नाक के नीचे स्थित पुलिस चौकी से एक अदद होमगार्ड तक घटना स्थल पर नहीं पहुँचा। जबकि 20 मिनट तक सड़क यातायात प्रभावित रहा। योगी सरकार में इफराद हुए आवारा जानवर जिनका ठिकाना सड़क बन चुकी है। जिससे दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। परन्तु जिला प्रशासन और नगरपालिका प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। गौशालाओं की स्थिति बद से बद्तर है। सवाल उठता है कि यदि शहर में सड़क पर आवारा पशुओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है तो गौशालाओं में कौन से जानवर पाले जा रहे हैं ?

सड़क पर आवारा पशु को बचाने में बिजली के पोल से भिड़ा ई-रिक्शा...

पाँच किमी के अंदर प्रतापगढ़ शहर में लगभग 5000 ई-रिक्शा के ऊपर हो चुके हैं। बिना प्रशिक्षण के ई-रिक्शा संचालन से शहर में प्रतिदिन कोई न कोई दुर्घटना हो रही है। अब तो ई-रिक्शा पर यात्रा करना भी जान जोखिम में डालना है। क्योंकि किसी न किसी मोड़ पर कोई न कोई ई रिक्शा पलट हुआ दिख जाता है। 90 फीसदी ई रिक्शा चालकों के पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं है। 50 फीसदी ई-रिक्शा बिना परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए ही सड़क पर दौड़ रहे हैं।
ओवरलोड सवारियां और अधिक स्पीड की वजह से ई-रिक्शा पलट जाता है। जब भी कोई मोड़ पर स्पीड में ई-रिक्शा चालक बिना स्पीड कम किये अपना ई-रिक्शा मोड़ता है तो वह बिना देर किए पलट जाता है और उस पर सवार यात्री घायल हो जाते हैं। कभी-कभी तो लोग मरणासन्न की स्थिति में दिख जाते हैं। इन ई-रिक्शा संचालकों को न तो पुलिस बोलती है और न ही परिवहन विभाग। सड़क पर तीन लेन में ई-रिक्शा के चालको द्वारा ई-रिक्शा चलाया जाता है। जिससे शहर में जाम की समस्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
50फीसदी ई-रिक्शा चालक तो नशेड़ी हैं। अक्सर इनके ई-रिक्शे से किसी न किसी गाड़ी में भिड़ंत हो जाती है। क्योंकि बिना प्रशिक्षण लिए ई-रिक्शा चलाने वाले बिना किसी इशारे के किसी भी समय अपना ई-रिक्शा मोड़ देते हैं। दुर्घटना का प्रमुख कारण यह भी है। ये लोकल होते हैं और इनके संगठन वाले हर समय कुछ ही देर में एकत्र हो जाते हैं। बोलने पर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इसलिये सामने वाला ब्यक्ति अपना नुकसान बर्दास्त कर अपनी मंजिल की तरफ चले जाने में अपनी भलाई समझता है। समय रहते इन ई-रिक्शा संचालकों पर कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति भयावह हो सकती है।

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