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रविवार, 15 अगस्त 2021

विधानसभा भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फहराया तिरंगा, बोले- सभी क्रांतिकारियों को करता हूं,नमन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 75वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर स्वाधीनता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं...


विधानभवन में तिरंगा फहराते सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ...

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पूरा देश जश्न में डूबा है। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ  देश की 75वें स्वतंत्रता दिवस पर रविवार को सुबह 9 बजे विधानभवन प्रांगण में ध्वाजारोहण किया। इस मौके पर सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, बलिया में मंगल पांडे के नेतृत्व में स्वतंत्रता की लड़ाई आगे बढ़ी वर्ष- 1942 में ही बलिया ने खुद को स्वाधीन घोषित कर दिया था। उन्होंने कहा कि लखनऊ के काकोरी में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह ने क्रांति का बिगुल बजाया, आज देश के सभी क्रांतिकारियों को नमन करता हूं। 


राष्ट्रध्वज तिरंगा के सामने सिर झुकाकर मुख्यमंत्री ने किया राष्ट्रध्वज को प्रमाण...

देश की स्वाधीनता हेतु अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले असंख्य अनाम बलिदानियों की पावन स्मृति को संजोने का महापर्व है, स्वतंत्रता दिवस इसे आजादी का अमृत महोत्सव कहना गलत न होगा स्वाधीनता दिवस की 74वीं वर्षगांठ पर हम सभी अपने अनाम बलिदानियों के राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव को धारण करने की शपथ लें उन्होंने राष्ट्र के प्रति समपर्ण भाव को धारण करने की शपथ लेने की अपील की सीएम योगी ने इस मौके पर कहा कि, देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्राण देने वाले तमाम बलिदानियों की स्मृतियों को संजोने का पर्व है। वर्ष- 1916 में लखनऊ में ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, हम इसे लेकर ही रहेंगे' का उद्घोष किया था। यह उद्घोष देश के स्वाधीनता आंदोलन का एक मंत्र बन गया था।


विधानसभा में स्वतंत्रता दिवस के शुभअवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ... 

सीएम योगी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, आजादी का अमृत महोत्सव पर प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गये पंच सूत्रों का पालन करते हुए स्वाधीनता सेनानियों के अमर बलिदान से प्रेरणा लेकर आत्म निर्भर भारत के सपने को साकार करने में लगे मुख्यमंत्री ने कहा कि, मां भारती की स्वतंत्रता के लिए गांव, नगर हर जगह अंग्रेजों की प्रतिकार किया गया। उन्होंने कहा कि, अपनी वीरता से सभी को चकित करने वाले क्रांतिकारियों को नमन कर आजादी का अमृत महोत्सव को सार्थकता प्रदान करें। बलिया ने तो 1942 में ही स्वयं को स्वाधीन घोषित कर दिया था। काकोरी की घटना कभी विस्मृत नहीं हो सकती। हमारे पूर्वजों ने 75 वर्ष पूर्व 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना को साकार करने हेतु अपनी आहुति दी थी। आज प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भी 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत, समृद्ध भारत' की परिकल्पना को साकार करने में हम अपना योगदान दे रहे हैं। 

लखनऊ से क्रांतिकारियों ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ क्रांति का जो बिगुल बजाया था, उसकी परिणीति 15 अगस्त 1947 के रूप में देखने को मिलीपराधीनता के खिलाफ एक लंबी लड़ाई व अनगिनत बलिदानों के कारण 1947 में देश स्वतंत्र हुआ। देश के अंदर अलग-अलग स्थानों पर बने स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े शहीद स्मारक स्वाधीनता की कीमत के जीवंत गवाह हैंकहीं झांसी में रानी लक्ष्मीबाई जी का नेतृत्व तो कहीं बलिया में मंगल पांडेय जी का नेतृत्व। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वाधीनता की सामूहिक लड़ाई का प्रतिफल है कि विदेशी हुकूमत को भारत छोड़ना पड़ा नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानियों ने देश की इस लड़ाई को एक नई ऊंचाई प्रदान की। उत्तर प्रदेश इस निर्णायक लड़ाई का एक केंद्र बिंदु बनास्वाधीनता के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही यह वर्ष चौरी चौरा की ऐतिहासिक घटना का शताब्दी वर्ष भी है। वर्ष 1922 में गोरखपुर के चौरी चौरा के नागरिकों ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई को आगे बढ़ाया था। 


हम सभी लोग अपने-अपने कर्म क्षेत्र में अपने कर्तव्यों का प्रतिबद्धता के साथ पालन करें, यही हमारा 'राष्ट्र धर्म' है। स्वाधीनता की क्या कीमत होती है, इस बात के जीवंत गवाह देश में बने शहीद स्मारक व स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े वे सभी स्मारक हैं, जो आधुनिक भारत के महातीर्थ के रूप में हम सबको देश की स्वाधीनता की लड़ाई का अहसास कराते हैं। माँ भारती के वीर सपूतों के सामूहिक प्रतिकार का प्रतिफल है कि विदेशी हुकूमत को इस देश को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। सभी का सौभाग्य है कि आज हम देश की स्वाधीनता के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने एक समृद्ध भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए आज से 75 वर्ष पूर्व अपना बलिदान दिया था। हमें संतोष है कि आज प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हम लोग 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत और समृद्ध भारत' की संकल्पना को साकार करने में अपना योगदान पूरी ईमानदारी के साथ दे रहे हैं।हमारी आस्था व्यक्तिगत हो सकती है। हमारी पूजा पद्धति विशिष्ट हो सकती है, लेकिन जब हम राष्ट्र के बारे में सोचते हैं तो हमारा एक ही धर्म है 'राष्ट्र धर्म'।

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