Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

स्वस्थ लोकतंत्र की रक्षा के लिए नामांकन न कर पाने जैसे मुद्दे को न्यायालय ने गंभीरता से लिया और दो पार्ट में सुनवाई कर सुनाया फैसला और सम्बन्धित अधिकारियों को टेलेफोन से आदेश का अनुपालन कराने का दिया निर्देश

मंगरौरा प्रमुख पद के नामांकन में दाखिल याचिका में कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह को भी बनाया गया है,पक्षकार...!!!


बीडीसी सदस्य अखिलेश सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ ने मंगरौरा प्रमुख पद के लिए नामांकन करने में खलल डालने के मुद्दे पर लिया संज्ञान और शासन-प्रशासन सहित राज्य निर्वाचन आयोग के लिए जारी किये निर्देश...!!!

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ''खंडपीठ लखनऊ "

लखनऊ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रतापगढ़ के ब्लॉक प्रमुख पद के प्रत्याशी अखिलेश सिंह की याचिका को संज्ञान में लेकर उन्हें नामांकन कराने में किसी तरह के ब्यवधान से निपटने के लिए अपर मुख्य सचिव गृह विभाग, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक सहित राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र की रक्षा के लिए किसी का नामांकन न रोका जाए और उसे पुलिस सुरक्षा के साथ उसका नामांकन कराने का आदेश दिया है उच्च न्यायालय ने ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव का परिणाम आ जाने तक प्रत्याशी की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आदेश पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ को दिया है 


मंगरौरा प्रमुख पद के प्रत्याशी अखिलेश सिंह ने उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दाखिल कर गुहार लगाई कि स्वस्थ लोकतंत्र की रक्षा की जाए और उसे मंगरौरा ब्लॉक प्रमुख पद पर चुनाव लड़ने के लिए नामांकन करने दिया जाए याचिकाकर्ता अखिलेश सिंह का आरोप है कि योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री मोती सिंह व उनके बेटे नंदन सिंह उसे चुनाव लड़ने से रोकने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं मंगरौरा प्रमुख पद निर्विरोध हो जाए, इसके लिए याचिकाकर्ता को नामांकन न करने के लिए अपने पद और शासन सत्ता का दुरूपयोग कर रहे हैं। जिस पर उच्च न्यायालय ने मंत्री व उनके बेटे को भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया है यह आदेश न्यायमूर्ति डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव, प्रथम की खंडपीठ ने प्रत्याशी अखिलेश सिंह की याचिका पर दिया

 

एक बार मंगरौरा ब्लॉक प्रमुख का चुनाव फिर सुर्खियों में छाया रहा। चूँकि मंगरौरा ब्लॉक प्रमुख पद पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री मोती सिंह आत्मा वास करती है। क्योंकि मंत्री मोती सिंह इसी मंगरौरा प्रमुख पद से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुवात की थी। मंत्री मोती सिंह मंगरौरा प्रमुख पद के चुनाव के समय अपना आपा तक खो देते हैं। तभी तीन दशक से अधिक समय से मंत्री मोती सिंह से मंगरौरा प्रमुख पद कोई छीन न सका।  
सपा की सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा, विधायक नागेन्द्र सिंह मुन्ना यादव, पट्टी से विधायक रामसिंह पटेल आदि लोग लगे तो मंगरौरा प्रमुख पद पर मंत्री मोती सिंह से छीन सके। क्योंकि उस समय मंत्री मोती सिंह पट्टी से विधायकी हार चुके थे और पॉवरलेस थे। जिसकी सत्ता थी, मंगरौरा में उस दल का प्रमुख बना फिलहाल मंत्री मोती सिंह वर्ष-2017 में जैसे ही पट्टी से विधायक  निर्वाचित हुए और योगी सरकार में मंत्री बने, वैसे ही मंगरौरा प्रमुख पद का तख्ता पलटने की बेकरारी उनमें दिखने लगी। यह अलग बात रही कि वह अपने मकसद में सफल नहीं हुए  


याचिका में कहा गया है कि मंगरौरा ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री मोती सिंह का बेटा ब्लॉक प्रमुख पद का प्रत्याशी है मंत्री व उनके बेटे के कहने पर स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन चुनाव में याचिकाकर्ता भाग न ले पाए, इसके लिए न सिर्फ उसे, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों को भी हिरासत में ले रहे हैंसुबह हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता एच पी श्रीवास्तव को निर्देशित किया कि बिना देर किये सभी सम्बंधित अधिकारियों को टेलेफोन से आदेश को अवगत कराने एवं आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ अपर मुख्य सचिव, गृह (गोपन) विभाग, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश से सम्पर्क करें साथ ही प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी और एसपी से निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है कोर्ट ने अगली सुनवाई तिथि 25 अगस्त को निर्धारित की है  


उच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश की तरफ से मुख्य स्थाई अधिवक्ता राकेश कुमार चौधरी को निर्देशित किया कि आदेश की प्रति राज्य निर्वाचन आयोग, रिटर्निंग ऑफिसर सहित चुनाव कार्य में लगे अन्य अधिकारी को टेलीफोन से न्यायालय के आदेश को अवगत कराएं डीजीपी ऑफिस के सुरेन्द्र बहादुर सिंह  आईपीएस अधिकारी को भी न्यायालय ने सुनवाई के समय वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये पुलिस प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया। पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने डीआईजी/पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़, एलआर कुमार से सम्पर्क कर कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के बेटे को शांति भंग में दिनांक-7 जुलाई, 2021 को CRPC- 151 के तहत चालान किया गया था और उसकी जमानत भी तुरंत हो गई थी उच्च न्यायालय के आदेश पर शासन-प्रशासन सक्रिय हुआ और निर्धारित नामांकन अपरान्ह 3 बजे के बाद याचिकाकर्ता से नामांकन करने के लिए सम्पर्क किया गया,परन्तु उन्होंने मना कर दिया चूँकि तब तक नंदन सिंह के निर्विरोध निर्वाचित होने के ख़बरें सोशल मीडिया पर चलने लगी थी   

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Top Ad

Your Ad Spot

अधिक जानें