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शनिवार, 31 जुलाई 2021

पीएम मोदी ने दाढ़ी बढ़ाई और रवींद्रनाथ टैगोर का वेश बनाया और पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह के इरादे के अनुसार आम जाति के घावों को ताज़ा करने के लिए किया,काम

दाढ़ी रखने से कोई टैगोर नहीं हो सकता,कौवा कभी मोर नहीं हो सकता...!!!


देश के सभी हिन्दू पीएम मोदी को हिन्दू हृदय सम्राट समझते थे,पर ये तो पिछड़ी जाति हृदय सम्राट निकले...!!!


जिस मोदी को लोग दिल से चाहते थे,उसी मोदी के खिलाफ NEETमें ओबीसी कोटा 27%लागू करने के बाद सोशल मीडिया पर आ रहे हैं,तरह-तरह के कमेन्ट...!!!


NEETमें OBCका 27%आरक्षण के निर्णय से मोदी के प्रति सामान्य जाति में असंतोष बढ़ा... 

आरक्षण देश को बर्बाद करके ही खत्म होगा। यह बात लोग अक्सर बोलचाल में कह देते थे। परन्तु देश की बागडोर संभालने वाले देश के पीएम नरेन्द्र मोदी जी पर देश के सभी नागरिकों की आस टिकी हुई थी। लोगों को पीएम मोदी पर सबसे अलग तरह का भरोसा था जो कल कई खण्डों में विखंडित हो गया। सामान्य जाति में पैदा होना ही पाप है, ऐसा अब सामान्य जाति में पैदा होने वाला बच्चा युवा होकर बोलने के लिए मजबूर हो रहा है वह तो यहाँ तक कहने लगा है कि पूर्व जन्म में उसने कोई गलत कार्य जरूर किया रहा होगा जो इस जन्म में वह सामान्य वर्ग में जन्म लिया और उसे हर क्षण आरक्षण रूपी तक्षक विषैला साँप काट रहा है वह अपने को श्रापित तक कहने लगा है।   


मंडल कमीशन लागू कर पूरे जीवन PMबनने का ख्वाब देखने वाले VPसिंह का हश्र...

सामान्य जाति में जन्म लेना जैसे पाप हो गया है सामान्य जाति के लोग किस पर भरोसा करें ? सभी पार्टियां आरक्षण रूपी नाव पर सवार हैं ओबीसी आरक्षण की बात करने से पहले उस कहानी को जरुर जान लेना चाहिए जिस पर ओबीसी आरक्षण सवार होकर समाज को आज डसने का कार्य कर रहा है जब विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के गृहमंत्री थे तो मंडल कमीशन की रिपोर्ट को उन्होंने कौतूहल वश स्पर्श किया था, जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बी पी सिंह को कहा था कि देखे वी पी सिंह ये मंडल कमीशन रिपोर्ट है और यह रिपोर्ट ऐसा विषधर है जो इसे स्पर्श करेगा, उसे वह पहले ही डसेगा 


पूर्व प्रधानमंत्री अपने जीवन को घुट-घुट कर जिये थे...

उस वक्त तो वी पी सिंह मान गए और देश के पीएम बनते ही वी पी सिंह वही मंडल कमीशन रिपोर्ट वाली पत्रावली को स्पर्श किया वी पी सिंह को लगा कि मंडल आयोग को यदि वह लागू कर देते हैं तो वह आजीवान प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बने रहेंगे बस इसी लालच में वी पी सिंह सामान्य जाति के होते हुए भी मंडल कमीशन लागू किया और देश में 27 आरक्षण का खेल शुरू हो गया उस वक्त आरक्षण विरोध में हजारों सामान्य जाति के बच्चे अपनी जान गंवाए थे और उनका वह श्राप प्रधानमंत्री वी पी सिंह को ऐसा लगा कि उन्हें ब्लड कैंसर हो गया और वह पूरा जीवन विदेश में अपने शरीर का ब्लड निकलवाते और चढ़वाते रहे 


यह वही मंडल कमीशन रिपोर्ट है जो वीपी सिंह को डंसा और अब पूरे देश का बेड़ा गर्क कर रहा है...

देश के प्रधानमंत्री रहे वी पी सिंह को मौत भी उन्हें तब आयी, जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ था एक पूर्व पीएम के खत्म होने पर राष्ट्रीय शोक का प्रोटोकाल बना हुआ है, परन्तु वी पी सिंह की मौत को जनसमान्य भी जान न सकाजबकि सूबे की मुख्यमंत्री मायावती उनकी मौत पर मांडा उनके आवास गई थी, फिर भी मीडिया में न के बराबर कवरेज उन्हें मिली थी वी पी सिंह को आज तक सामान्य जाति के बच्चे हृदय से गाली देते हैं। वी पी सिंह का हश्र सबके सामने है इसलिए देश में दूसरा कोई वी पी सिंह न बने तो ही बेहतर होगा खासकर करोड़ों लोगों के हृदय में बसने वाले लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वी पी सिंह नहीं बनना चाहिये था   


सरकार वापसी के लिए दलित वोटों की मजबूरी में मोदी सरकार ने उठाया 'गलत कदम'

देश में लोकसभा चुनाव से पहले SC/ST कानून को देश की सर्वोच्च अदालत खारिज कर दी थी, परन्तु पीएम मोदी दलित वोटबैंक की लालच में उसे संसद से पुनः लागू कर दिया था। उस समय सवर्णों के निशाने पर पीएम मोदी आ गए थेपीएम मोदी को भी अपने गलत निर्णय का एहसास हो चुका था, परन्तु तीर कमान से निकल चुकी थी, इसलिए वह वापस नहीं आ सकती थी। अभी SC/ST कानून को देश में पुनः लागू करने का दर्द सवर्ण वर्ग भूला भी नहीं था कि उसे पुनः NEET में OBC का 27% आरक्षण देकर उसके जख्म को मोदी जी ने कुरेद दिया है। ओबीसी का आरक्षण जाति पर आधारित होगा। जबकि जनरल क्लास का आरक्षण आर्थिक आधार पर होगा। 


NEET की कितनी नीट यानि आवश्यकता है,पिछड़ी जातियों को...

देश में कैसी दोगली नीति की ब्यवस्था लागू है ? फिर भी लोग खुश हैं। SC/ST के प्रकरण में PM मोदी सुप्रीम कोर्ट के पारित हुए आदेश को पलट दिया था और जब विरोध शुरू हुआ तो लोकसभा चुनाव से पहले गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण देने का झुनझुना पकड़ा कर डैमेज कंट्रोल किया था। अब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले फिर से केंद्र कोटे में NEET के लिए ओबीसी का 27% आरक्षण को नाटकीय ढंग से लागू करना, सामान्य जाति के लोगों की बलि देने जैसा है। पीम मोदी बहुत ही शातिराना अंदाज में पहले ओबीसी के कुछ सांसदों और मंत्रियों को बुलाकर ज्ञापन लिया जाता है और दोपहर होते-होते आरक्षण ब्यवस्था को अमली जामा पहना दिया जाता है। 


देश के पीएम को सामान्य जाति के बच्चों के साथ इतना भेदभाव क्यों...??? 

वाह मोदी, वाह ! आप से ऐसी उम्मीद सामान्य जाति के यहाँ पैदा होने वाले बच्चे कभी अपने मन में नहीं पाले थे, जो आपने उनके साथ किया चिकित्सा के क्षेत्र में ओबीसी वर्ग का 27% आरक्षण लागू हो जाने से अब इलाज कराने जाने से पहले डॉ के बारे में मरीज और उसके तीमारदारों को यह जानना आवश्यक हो गया है कि जिसे वह मरीज दिखाने गया है वह 27% OBC वाला तो नहीं है लोकप्रिय PM नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से वोटबैंक और स्वार्थवादी राजनीति करने का उदाहरण पेश किया है। इस बार NEET में OBC आरक्षण देकर अपनी लोकप्रियता को दाँव पर लगाया है। मेरी सोच जातिवादी नहीं है। जो जातिवाद के दलदल में फंस चुका है। 


मेरी बात उसे ही खराब लगेगी जो पिछड़ी जाति के दलदल से ऊपर नहीं उठ सकता। इस देश में दो ब्यवस्था लागू हैसवर्णों के लिए आर्थिक आधार पर 10% और ओबीसी के लिए जाति के आधार पर 27% की नीति दोगली नहीं हैसामान्य जाति के लोगों का PM मोदी जी से आग्रह है कि लगे हाथ देश की सेना में भी आरक्षण ब्यवस्था लागू कर देते तो पूरा मामला ही सही हो जाता। कोई कसक बाकी न रह जाए लोग कहते है कि गर्व से कहो हम हिन्दू हैं, लेकिन हमें एकलव्य कहकर नकारा जाता है। योग्यता पर उंगली उठायी जाती है। हमें भी समाज में जगह चाहिये ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य और शूद्र की बात तब तक होती रहेगी, तब तक विरोध होता रहेगा जब तक समाज मे समानता नहीं आयेगी, ऐसे ही सबकुछ चलता रहेगा 


पैदा होने से लेकर पढ़ने, नौकरी पाने और प्रमोशन में आरक्षण की ब्यवस्था लागू हो चुकी है तो मरने में आरक्षण लेने की माँग कब उठेगी ? भाई कोई तो यह माँग उठाये योग्यता पर उंगली उठायी जाती है। हमें भी समाज में जगह चाहियेब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की बात तब तक होती रहेगी, तब तक विरोध होता रहेगा जब तक समाज में समानता नहीं आयेगी, तब तक ऐसे ही चलता रहेगा पैदा होने से लेकर पढ़ने, नौकरी पाने और प्रमोशन में आरक्षण की ब्यवस्था लागू हो चुकी है तो मरने में आरक्षण लेने की माँग कब उठेगी ? भाई कोई तो यह माँग उठाये। ओबीसी और एस सी/एस टी वर्ग का आरक्षण प्राप्त चिकित्सक और बड़े बाप की औलादें जो डोनेशन से चिकित्सा क्षेत्र  की पढ़ाई करके चिकित्सक बन बैठे हैं, उनसे मरीजों को बचना होगा। नहीं तो कान काटने की जगह वह अपनी नाक ही कटवा सकते हैं 


बिल्कुल दोनों एक श्रेणी के हैं। जीवन बचाने के लिए दोनों तरह के चिकित्सकों से बचना होगा। मेडिकल दाखिले में जिनके इकाई में नंबर होते हैं और उनके पास गुलावी नोटों के बंडल होते हैं तो उन्हें भी दाखिला मिल जाता है और वो भी एमबीबीएस डिग्री ही मिलती है। ऐसे ही डॉक्टर मरीजो के पेट में कैंची और तौलिया छोड़ देते हैं और पेट की सिलाई करके अपने दायित्व से इतिश्री कर लेते हैं। भोगता है मरीज और उसके साथ उसका तीमारदार। मरीज का धन भी जाता है और धर्म भी जाता है। कोई मरीज किसी चिकित्सक से झगड़ा करके निपट भी तो नहीं सकता। इस तरह कई सालों बाद देश के पीएम नरेन्द्र मोदी दाढ़ी रखकर रवींद्र नाथ टैगोर की शक्ल में दिखने लगे और पश्चिम में ममता बनर्जी के आगे सफलता न मिली तो अब वी पी सिंह की भूमिका का निर्वहन पीएम मोदी कर रहे हैं। इससे अधिक मेरे पास शब्द नहीं हैं।प्रधानमंत्री मोदी जी को पिछड़ी जाति की राजनीति करने और पिछड़ी जाति में स्थापित नेता होने की बहुत सारी शुभकामनाएं और बधाइयाँ देता हूँ।   

  

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