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शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

भाजपा नेता राम आसरे पाल के लिए विधायक राजकुमार "करेजा पाल" झूठ बोलकर पुलिस को किया था,बदनाम

सत्ता पक्ष के विधायक अपनी ही सरकार में विधवा विलाप कर रहे हैं और कह रहे कि सीओ सिटी सहित नगर कोतवाल नहीं उठाते उनका फोन, विरदारी का मुकदमा दर्ज न करने पर विधायक राजकुमार "करेजा पाल" को आया गुस्सा, पुलिस पर लगाये गंभीर आरोप...!!!


विधायक राजकुमार "करेजा पाल" दिनांक-28/06/2021 को मीडिया के समाने पुलिस और अपराधियों के बीच सांठगांठ होने का आरोप लगाया था, जबकि विधायक का आरोप ही झूठ निकला ! एक दिन पहले अपराध संख्या-0554/2021 दिनांक-27/06/2021 समय शाम-8 बजकर, 55 मिनट पर कोतवाली नगर में दर्ज हो गया था,मुकदमा...!!!

महिलाओं को आगे करके पीछे छिपने वाला नेकर में भाजपा नेता राम आसरे पाल... 

प्रतापगढ़। जनता का प्रतिनिधि जनता के लिए अभिभावक जैसा होता है। जिस तरह एक परिवार का मुखिया होता है उसी तरह एक विधायक उस विधानसभा क्षेत्र का मुखिया होता है। उसके नजर में जातिवाद, क्षेत्रवाद, सम्प्रदायवाद, लिंगभेद जैसी सोच नहीं होनी चाहिए। परन्तु आज राजनीति में जनप्रतिनधियों को टिकट ही जाति देखकर दिया जाता है। मंत्रिमंडल बनाते समय अथवा मंत्रिमंडल विस्तार के समय जातीय संतुलन बनाये रखने की दुहाई देकर जातीयता के आधार पर कार्य किया जाता है। सबसे मजेदार बात यह होती है कि राजनीतिक दलों में पदाधिकारी बनाते समय भी जाति और मजहब देखकर पद का आवंटन किया जाता है। फिर यह कहा जाता है कि जाति और मजहब के आधार पर राजनीति करना ठीक नहीं होता

जब राजनीति में बीजारोपण ही जाति और मजहब के आधार पर किया जाता है तो विधायक, सांसद और मंत्री बनने के बाद उनसे इस बात की उम्मीद करना कि वह निष्पक्ष होकर कार्य करेंगे। वह जाति धर्म से ऊपर स्वयं को रखकर सही गलत का निर्णय करेंगे। यदि ऐसा आप सोचते हो तो आप बुद्धिमान नहीं बल्कि मूर्ख हो ! वर्तमान परिवेश में राजनीतिक ब्यक्ति मत लेने तक तो सर्व समाज की दुहाई देता है और चुनाव में सफल हो जाने पर उसे ताख पर रख देता है और सबसे पहले अपनी जाति विरादरी पर उसकी लार लपकने लगती है। उसका बस चले तो सारी योजना अपनी विरादरी अथवा अपने जाति वाले समाज के पीछे ही संचालित करा दें। ऐसे ही प्रतापगढ़ के विधायक राजकुमार "करेजा पाल" हैं जिनमें जातीयता इस कदर ब्याप्त है कि अपनी जाति के आगे उन्हें दूसरे जाति के लोग दिखते ही नहीं

भाजपा नेता राम आसरे पाल परिवार की महिला के हाथ में लाठी बहुत कुछ स्पष्ट कर देती है...

प्रतापगढ़ कोतवाली नगर के अचलपुर शहरी क्षेत्र के रहने वाले भाजपा के जिला मंत्री राम आसरे पाल के पक्ष में विधायक सदर राजकुमार "करेजा पाल" ने अपनी ही सरकार की नाक कटवाने में पीछे नहीं रहे उसकी हकीकत जानना बहुत आवश्यक है। आइये जाने क्या है पूरा मामला ? भाजपा नेता राम आसरे पाल सत्ता पक्ष की आड़ में जमीन की खरीद फरोख्त का कार्य करता है और जिस दल की सत्ता होती है, उस दल के नेता का दरबार करता है। भाजपा नेता आम रासरे पाल के पूर्वज कादीपुर के रहने वाले थे, जिन्हें स्व. रामराज सिंह निवासी-अचलपुर ने अपनी बाग में बसाया था। पाल विरादरी के होने की वजह से राम आसरे पाल भेड़-बकरी एवं अन्य जानवर पालते थे। सो घर के अतिरिक्त भगौती प्रसाद सिंह की बाग में जानवरों के लिए पहले छान/मड़ही रख कर जानवरों के लिए अस्थाई सरिया बनाया। उस वक्त मना करने पर गिड़गिड़ाते हुए राम आसरे पाल बोला था कि बाबूसाहेब आपके पूर्वजों ने हमारे पूर्वजों को लाकर बसाया और हम आप सबके आगे आजीवन ऋणी रहूँगा। जिससे दया भाव दिखाते हुए भगौती प्रसाद सिंह ने सोचा कि जाने दीजिये अपना आदमी है। परन्तु भगौती प्रसाद सिंह को क्या पता कि जिसे बसाया वही आगे चलकर काल बनेगा और सांप की तरह उन्हें ही डसेगा

भाजपा नेता और भगौती सिंह के बीच जमीन विवाद का वह स्थल जहाँ हुई थी,मारपीट...

भाजपा नेता राम आसरे पाल चीन देश की तरह विस्तारवादी नीति की सोच वाला ब्यक्ति है। इंसान की आदत होती है कि यदि उसे खड़े होने की जगह दोगे तो वह बैठने की कोशिश करेगा और बैठ गया तो लेटने की कोशिश करता है। राम आसरे पाल भी उसी सोच का ब्यक्ति है। जिस ब्यक्ति के पूर्वजों ने राम आसरे पाल के परिवार को बसाया वही राम आसरे पाल आज मौका पाते ही उसकी बाग़ की नम्बरी जमीन पर जानवरों का टीन सेड रखकर और खुले स्थान पर खूंटा गाड़कर कब्जा करना चाहता है। उसके लिए उसने एक रणनीति अपनाई और महिलाओं को आगे करके 26 जून, 2021 की शाम को राम आसरे पाल की पत्नी और बिटिया एवं उनका लड़का भगौती प्रसाद सिंह के कुएं से सटकर खूंटा गाड़ रहे थे तो भगौती प्रसाद सिंह के परिवार वाले मना किये कि यहाँ खूंटा मत गाड़ो। उस समय वह लोग बिना खूंटा गाड़े घर चले गए। परन्तु उनकी नियति में खोंट था और रात्रि में चुपके से खूंटा गाड़ लिए

खूंटा गाड़ने के लिए मना करने के बावजूद खूंटा गाड़ने पर हुई दोनों पक्षों में मारपीट...

27 जून को सुबह जब भगौती प्रसाद सिंह के परिवार वाले खूंटा गड़ा देखे तो राम आसरे पाल की पत्नी से पूंछा कि मना करने के बाद खूंटा क्यों गाड़ लिए ? माकूल जवाब न मिलने पर भगौती प्रसाद सिंह के परिवार के लोग जबरन कब्जा करने की नियति से गड़े खूंटे को उखाड़ने लगे जिस पर भाजपा नेता राम आसरे पाल अपनी आदत के मुताविक अपनी पत्नी मालती पाल और बेटी नंदनी पाल को आगे करके आपारधिक मामला बनाने के लिए खूंटा उखाड़ रहे भगौती प्रसाद सिंह के लड़के अभिषेक सिंह पर लाठी, डंडे से हमला बोल दिया। अभिषेक सिंह के साथ में चन्दन सिंह ने बीच बचाव किया तो राम आसरे पाल के परिवार वाले ईंट अद्धे से प्रहार करने लगे। इस तरह से दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। दोनों पक्ष से लोग घायल हो गए, परन्तु भाजपा नेता राम आसरे पाल महिलाओं को आगे करके सबसे पीछे खुद नेकर में छिपा था, ताकि बाद में मेडिकल मोयना कराकर अपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जा सके

भाजपा नेता आर्म आसरे पाल की पत्नी मालती पाल की तहरीर पर जो मुकदमा कोतवाली नगर में दर्ज हुआ उसमें घर में घुसकर मारने, जान लेवा हमला करने के साथ डकैती जैसे अपराध कारित करने का आरोप है। जबकि असलियत यह है कि बाग की नम्बरी जमीन में खूंटा गाड़ने के विवाद में मारपीट हुई तो घर में घुसकर मारपीट करने की बात असत्य है। डकैती करने जैसा कोई अपराध हुआ ही नहीं। क्योंकि भगौती प्रसाद सिंह का परिवार सम्पन्न और रईस परिवारों में से है। अपनी 8 विस्वा जमीन गाँव के लोंगो के रास्ते के लिए जो परिवार दिया हो और राम आसरे पाल के परिवार को कादीपुर से लाकर अपनी जमीन में बसाया हो वो परिवार राम आसरे पाल के परिवार के साथ डकैती डालेगा। शायद ये बातें "करेजा पाल" को नहीं पता है। इसलिए विधायक को सर्व जमाज की बात सुननी चाहिए न कि अपने विरादरी और रिश्तेदार की बात सुनकर एक पक्षीय कार्यवाही के लिए अपने पद और प्रतिष्ठा को ही दांव पर लगा देना चाहिए। विधायक को लगता है कि दूसरी बार चुनाव नहीं लड़ना है। तभी रावण जैसा घमंड सर चढ़कर बोल रहा है। भगौती प्रसाद सिंह की तरफ से तहरीर कोतवाली में दी गई है,परन्तु विधायक राजकुमार "करेजा पाल" के दबाव में अभी तक उस पर मुकदमा नहीं दर्ज हो सका है

जिस जमीन को राम आसरे पाल की पुस्तैनी जमीन बताया जा रहा वह जमीन असल में भगौती प्रसाद सिंह की है। उन्हें के पूर्वजों ने राम आसरे पाल के पूर्वजों को लाकर बसाया था। फिर यह आरोप भी झूठ है कि राम आसरे पाल के घर और जमीन से बेदखल करने पर उनके दबंग पड़ोसी आमादा हैं। जिन्हें विधायक सदर अपाराधी बता रहे हैं, उनके विरुद्ध कोई आपारधिक रिकार्ड नहीं है फिर किस आधार पर विधायक किसी को अपराधी घोषित कर सकते हैं ? क्या विधायक को सिर्फ उनकी ही जाति के लोगों ने चुनाव में जीत दिलाई थी ? तब तो सर्व समाज की बात करते थे। अपने विरादरी के नेता को दूसरे की जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए सदर विधायक जिसे दबंग और अपराधी बता रहे हैं वो परिवार आरएसएस से जुड़ा हुआ है। विधायक सदर राजकुमार "करेजा पाल" स्वतः समाजवादी पार्टी से आयातित हैं और भाजपा ने पिछड़ी जाति के होने के नाटे अपना दल एस में सदस्यता दिलाकर विधायक का संयुक्त उम्मीदवार बनाया था। विधायक सदर को आरएसएस की तरफ से मामले में सुलह समझौता के लिए बुलाया गया,परन्तु वह जाने की हिम्मत न कर सके

एक सोची समझी साजिश के तहत भाजपा नेता राम आसरे पाल अपनी पत्नी और बिटिया को प्रतापगढ़ मेडिकल कालेज आकर मालती पाल, पूजा पाल और नंदनी पाल का मेडिकल मोयना कराया और कोतवाली नगर में तहरीर दी जिस पर मुकदमा भी पंजीकृत कर लिया गया। जब दोनों पक्षों में मारपीट की घटना हुई थी तो आपातकालीन सेवा UP112 भी पहुँची थी। मौके से भगौती प्रसाद सिंह और कुलभूषण सिंह को आपातकालीन सेवा UP112 की पुलिस कोतवाली लाई और उनका शांति भंग करने के आरोप में चालान किया गया। जबकि सच्चाई यह थी कि भगौती प्रसाद सिंह और कुलभूषण सिंह मारपीट की घटना में शामिल ही नहीं थे। एसडीम सदर के यहाँ से भगौती प्रसाद सिंह और कुलभूषण सिंह को 27 जून की शाम को ही जमानत मिल गई तो भाजपा नेता राम आसरे पाल बौखला गया और अपनी साजिश के हिस्से में सदर विधायक राजकुमार "करेजा पाल" को शामिल किया। जब मामला विरादरी का होता है तो वह बहुत जल्द रिश्ते-नाते में बदल जाता है। सदर विधायक राजकुमार "करेजा पाल" भी न आव देखा न ताव, अपनी बाह सिकोड़ी और पुलिस की कार्य प्रणाली पर ही हमलावर हो गए

अपना दल एस के सदर विधायक राजकुमार "करेजा पाल" ने मीडिया के सामने अपनी ही सरकार में पुलिस प्रशासन को जमकर कोसा। अपनी ही सरकार में कानून व्यवस्था पर सत्तापक्ष के विधायक राजकुमार पाल ने गम्भीर आरोप लगाए। विधायक राजकुमार पाल की माने तो प्रतापगढ़ पुलिस निरंकुश हो चुकी है। सरकार को बदनाम कर रही है। एसपी हफ्तों से रहते है,छुट्टी पर। सीओ सिटी और कोतवाली नगर पुलिस विधायक तक की बात को नजरंदाज कर रही है। जब विधायक की सुनवाई नहीं हो पा रही है, तब आम जनता की सुनवाई कैसे होती होगी ? ये आरोप मीडिया में सुर्खियां बनी। क्योंकि मामला ही ऐसा था कि जब सत्तापक्ष के विधायक की नहीं सुनी जा रही है तो आम आदमी की क्या दशा होती होगी ? परन्तु मामला विल्कुल झूठ निकला विधायक राजकुमार "करेजा पाल" सरासर झूठ बोल रहे थे जिस मामले को लेकर विधायक अपनी ही सरकार की पुलिस पर सवाल खड़ा किये वही पुलिस उनके सवाल खड़ा करने से पहले घटना में मिली तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया था

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