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बुधवार, 14 जुलाई 2021

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ में और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में हुई थी, डील

उत्तर प्रदेश के आगामी विधान सभा चुनाव-2022 में भाजपा और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक में गठबंधन के आसार तेज...!!!


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजा भईया...

लोकसभा चुनाव-2019 के समय जनसत्ता दल का उदय हुआ। कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" अपने राजनैतिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण कर लेने के बाद अपने समर्थकों से ऑनलाइन सर्वे कराया कि उन्हें राजनैतिक दल बनाना चाहिए कि निर्दलीय ही बने रहना चाहिए। ऑन लाइन सर्वे में लोगों ने दल बनाने के लिए अपना सुझाव दिया तब राजा भईया राजनीतिक दल के रूप में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का गठन किया। सर्वप्रथम राजा भईया निर्दलीय के रूप में वर्ष-1993 से वह कुंडा से विधायक निर्वाचित हुए। साथ ही विहार विधानसभा से अपने विश्वास पात्र रामनाथ सरोज को विधायक बनवाया और बाद में उनके स्थान पर उनके पुत्र विनोद सरोज को विहार से विधायक निर्वाचित कराया। राजा भईया अपनी लोकप्रियता और क्षेत्र में दबंगई के बल पर जनपद प्रतापगढ़ की 7 विधान सभाओं में से 2 सीट कुंडा और बाबागंज (बिहार) पर विधानसभा का चुनाव जीतते आ रहे हैं।  


BJPमें राजा भईया से किसी से नजदीकी हो या न हो,परन्तु मुख्यमंत्री से गहरे सम्बन्ध हैं...


सपा के समर्थन से कुंडा और बाबागंज की सीट निकलना बहुत आसान हो जाती थी। वर्ष-2012 में समाजवादी पार्टी की सूबे में सरकार बनी तो मुख्यमंत्री मुलायम सिंह न बनकर उन्होंने अपनी जगह अपने पुत्र अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। मुख्यमंत्री अखिलेश तो बन गए, परन्तु मुलायम सिंह के करीबी राजा भईया को मंत्रिमंडल में रखने के लिए अखिलेश यादव तैयार न थे। चूँकि समाजवादी पार्टी को अकेले उत्तर प्रदेश की जनता पूर्ण बहुमत सरकार बनाने के लिए अपना जनादेश दिया था। हालांकि कुंडा और बाबागंज में सपा ने राजा भईया और विनोद सरोज को अपना समर्थन दिया था। सो मुलायम सिंह के बहुत दबाव पर राजा भईया को अखिलेश यादव ने अपने मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया और राजा भईया का मन पसंदीदा मंत्रालय खाद्य रसद विभाग भी उन्हें दिया।  


CMयोगी आदित्यनाथ के सामने राजा भईया हुए नतमस्तक... 


मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बाहुबलियों और अपराधियों से दूरी बनाना चाहते थे। अतीक अहमद और डी पी यादव को मुलायम के लाख चाहने के बाद भी सपा में शामिल नहीं किया। मुलायम सिंह के बहुत दबाव में मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता का एक बार समाजवादी पार्टी में विलय हुआ, परन्तु अखिलेश यादव ने साफ संकेत दिया कि उनकी पार्टी अपराधियों और बाहुबलियों से दूरी बनाकर रखेगी। मुलायम के प्रभाव के साथ ही राजा भईया और मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं से अखिलेश यादव ने पर्याप्त दूरी बना ली। राजा भईया को उस समय महसूस हुआ कि उन्हें भी एक राजनैतिक दल का गठन करना चाहिए और समूचे उत्तर प्रदेश में क्षत्रियों के नेता के रूप में उन्हें लोग स्वीकार कर लेंगे। साथ ही किसी भी सरकार में गठबंधन धर्म आड़े नहीं आएगा। 


जब कोई दल पूर्ण बहुमत में रहता है तो वह निर्दलीय उम्मीदवार को अपनी सरकार में शामिल करने से बचना चाहता है। वर्ष-2017 में जब उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला तो सूबे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई और सूबे के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर योगी आदित्यनाथ को बैठाया गया। योगी आदित्यनाथ चाहते थे कि राजा भईया को अपने कैबिनेट में जगह दें, परन्तु भाजपा शीर्ष नेतृत्व इसके लिए तैयार न हुआ। सच तो यह है कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की सह पर राजा भईया राजनैतिक पार्टी का गठन किये। क्योंकि योगी आदित्यनाथ जी चाहते थे कि लोकसभा चुनाव में राजा भईया यदि राजनैतिक दल का गठन कर लेते हैं तो भाजपा और उत्तर प्रदेश में राजा भईया की पार्टी से गठबंधन कर लेगी और राजा भईया को योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमडल में शामिल कर उन्हें कैबिनेट मंत्री बना देंगे और उनका मन पसंदीदा मंत्रालय उन्हें दे दिया जायेगा।   


लोकसभा चुनाव से पहले राज भईया अपने कार्यकर्ताओं के साथ राजनैतिक दल का गठन किया और लोकसभा चुनाव में अंत तक भाजपा से गठबंधन के लिए बातचीत होती रही, परन्तु दो संसदीय सीट मांगने की वजह से गठबंधन न हो सका। सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो भाजपा राजा भईया की पार्टी को एक सीट प्रतापगढ़ दे रही थी और इसीलिये अपना दल एस से यह सीट खाली कराई गई थी, परन्तु राजा भईया कौशाम्बी की सीट के लिए अंत तक अड़े रह गए, जिससे गठबंधन की बात फेल हो गई। राजा भईया प्रतापगढ़ से पूर्व सांसद अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" को लड़ाना चाहते थे और कौशाम्बी से वहाँ के पूर्व सांसद शैलेन्द्र सरोज को लड़ाना चाहते थे। साथ ही स्वयं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में शामिल होकर खाद्य रसद मंत्री बनना चाहते थे। परन्तु राजा भईया की हठधर्मिता ने गठबंधन की योजना पर पानी फेर दिया।  


उत्तर प्रदेश के आगामी विधान सभा चुनाव- 2022 हेतु अभी से ही गोट बिछाई जा रही है। योगी आदित्यनाथ जी की चली तो विधान सभा गठबंधन में राजा भईया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से गठबंधन हो जाना चाहिए। लोकसभा जैसे दूसरी गलती नहीं करनी चाहिए ऐसा इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की विशेष कृपा राजा भईया और उनकी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पर बनी रही। तभी भाजपा की सरकार में राजा भईया सिर्फ 12 जिला पंचायत सदस्य लेकर 40 जिला पंचायत सदस्य की ब्यवस्था करने में सफल रहे। नहीं तो योगी सरकार अपने पर आती तो जैसे 75 जिला पंचायत अध्यक्ष में से 67 सीट जीत लिए वैसे प्रतापगढ़ की भी सीट भाजपा की झोली में आती। बिना शासन सत्ता के इशारे के राजा भईया इस बार जिला पंचायत का बोर्ड नहीं बना सकते थे। ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि भाजपा की तरफ से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीदवार क्षमा सिंह और उनके पति पप्पन सिंह मतदान के दिन मतदान केंद्र पर समर्थकों संग सार्वजनिक रूप से जिला प्रशासन पर राजा भईया के इशारे पर कार्य करने का आरोप तक लगाया था।    

 

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