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शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अपने विरोधियों की सम्पत्तियां बेनामी बताकर उस पर बुलडोजर चलाकर उनकी कमर तो तोड़ रही है, परन्तु सत्तधारी दल भाजपा में हरि प्रताप सिंह जैसे भूमाफियाओं पर कब होगी कार्रवाई ?

चाइना की तरह प्रतापगढ़ में भी भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह शहर की सरकारी जमीनों और दूसरों की जमीनों पर कब्जाने की रखते हैं,मानसिकता...!!!


 UPके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ महाभ्रष्ट हरि प्रताप सिंह...

भूमाफियाओं का असल संरक्षण राजस्व विभाग स्वयं होता है। कभी-कभी कुछ ईमानदार अफसर जो दिल के साफ सुथरे होते हैं, वह अपने ही विभाग के काले कारनामें को समझ नहीं पाते और जज्बात में भूमाफियाओं के खिलाफ निर्णय ले लेने पर पता चलता है कि उसका हल्का लेखपाल और कानून गो ही उस भूमाफिया का संरक्षक है। उसी के बनाये हुए अभिलेखों पर वह भूमाफिया बना। यह खेल उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपदों में ब्याप्त है। कहीं अधिक है तो कहीं थोड़ा कम है। पर भूमाफियाओं के सहयोगी राजस्वकर्मी ही हैं। इस आरोप से इंकार नहीं किया जा सकता।    


राजस्व परिषद् उत्तर प्रदेश 

जिला मुख्यालय अंतर्गत सदर तहसील क्षेत्र में ही शहरी क्षेत्र पड़ता है। शहरी क्षेत्र और उससे जुड़े गाँव में जो हल्का लेखपाल तैनात होता है वह बहुत ही नटवरलाल किस्म का होता है। राजस्व विभाग में अधिकारियों को खिला पिलाकर और राजस्व विभाग में बेईमानी, लूट खसोट सहित प्रत्येक तरह के भ्रष्टाचार में एकत्र धन का बहुत ही ईमानदारी से आपस में बंटवारा होता है और सारे बेईमान मिलकर ईमानदार किस्म के अधिकारियों को गुमराह कर देते हैं। चूँकि प्रत्येक जाँच का जिम्मा हल्का लेखपाल और राजस्व निरीक्षक को ही मिलता है। वह चाहे जाँच रिपोर्ट में श्याह करें अथवा सफेद करें।    


नपाध्यक्ष प्रेमलता के पति भाजपा नेता हरि प्रताप चीन की तरह करते हैं,कारनामा...

जनपद प्रतापगढ़ में सदर तहसील में ऐसे लेखपाल हैं जिनकी हैंसियत जिले के जिलाधिकारी से कम नहीं है। वह शहर की लेखपाली करके माममाल हो गए। कई लेखपाल तो प्रापर्टी डीलर बन गए हैं। इन लेखपालों का उठना बैठना विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के यहाँ तक होता है। क्योंकि प्रतापगढ़ में पट्टी तहसील के सर्वजीतपुर गाँव से प्रतापगढ़ शहर मुख्यालय आये हरि प्रताप सिंह के पास शहर में एक धूर अपने नाम जमीन नहीं था, परन्तु वर्तमान में उनके पास अरबों रुपये की जमीन जायदाद हो चुकी है। कई जमीने तो सरकार की कब्जा कर लिए हैं, परन्तु बोलने वाला कोई नहीं। क्योंकि जो बोलेगा वह अपना ही नाश करा लेगा और अपनी बर्बादी का तमाशा अपनी आँखों से देखेगा। 


महज पच्चीस वर्षो में अरबपति बने हरि प्रताप वर्ष-1995 के पहले चलाते थे,सवारी जीप...

सच तो यह है कि वर्ष-1995 के पहले वह स्वयं जीप चलाकर सवारी ढोते थे। परन्तु उनके ससुर उमानाथ सिंह जो कल्याण सिंह की सरकार में कारागार मंत्री थे, उनके दिवंगत होते ही हरि प्रताप सिंह की किस्मत बदल गई और भाजपा से हरि प्रताप सिंह को प्रतापगढ़ की नगरपालिका के अध्यक्ष पद का टिकट मिल गया और वह चुनाव जीत गए। फिर क्या था ? दिन दूना रात चौगुना वाली कहावत को चरितार्थ करके हरि प्रताप सिंह अरबपतियों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। हरि प्रताप सिंह के पास इतनी अकूत सम्पत्ति कहाँ से आई यह एक रहस्य बनकर रह गया है, परन्तु जानकार बताते हैं कि आनाज की कालाबाजारी और नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ के कोष को हरि प्रताप सिंह ने विगत 24 वर्षों से बहुत इतिमिनान के साथ लूटा है। 


नपाध्यक्ष प्रेमलता सिंह और पूर्व नपाध्यक्ष हरि प्रताप सिंह नपा दफ्तर में साथ-साथ... 

सूबे में योगी सरकार बनी तो एंटी भूमाफिया सेल का गठन किया गया। जिले में एंटी भूमाफिया सेल संचालित है,परन्तु उस सेल में हरि प्रताप सिंह जैसे भूमाफिया के नाम को दर्ज करने की हिम्मत किसी अधिकारी में नहीं है।सच तो यह है सिर्फ दिखावे के लिए और अपने राजनैतिक विरोधियों के लिए योगी सरकार एंटी भूमाफिया सेल की स्थापना की है। कागज पर गरीब और लाचार लोगों को तो भूमाफिया घोषित कर दिया गया है,परन्तु हरि प्रताप सिंह जैसे वास्तविक भूमाफियाओं के खिलाफ योगी सरकार के अफसर मेहरबान हैं। हरि प्रताप सिंह प्रयागराज-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैय्याबाँध गोपालापुर सीताराम धाम के सामने सरकारी नाले पर कब्जा करके वहाँ कामर्शियल बिल्डिंग बनाने जा रहे थे, परन्तु तत्कालीन आईएएस अफसर जो सदर एसडीम के पद पर तैनात रहे,उन्होंने उनके इरादे को ध्वस्त कर दिया और जल निकासी को बाधित कर रही हरि प्रताप सिंह की दीवाल को तोड़वा दिया था। 


अदालत के आदेश के बाद भी हरि प्रताप सिंह जबरन खोल लिया दरवाजा...

बाद में विनियमित क्षेत्र से सदर एसडीएम और तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने हरि प्रताप सिंह की बिल्डिंग को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था, जो अपील में आज भी लंबित है। यह तो रहा शहर के दक्षिणी छोर का मामला। अब आते हैं सदर मोड़ पर ! सदर मोड़ पर नाले पर अतिक्रमण हरि प्रताप सिंह अपना शीश महल बनवाए हैं। थोड़ा और आगे बढ़ते है तो ब्यवसायिक काम्लेक्स में होंडा एजेंसी के सामने मुसई राम का कुआं था, जिसे हरि प्रताप सिंह एकदम से बंद कर दिया, क्योंकि बड़ी मालवाहनों को खड़ा करके उनकी होंडा बाइक को उतारने में वहाँ समस्या होती थी। अब सई नदी को पार करते हैं। बराछा मोड़ के सामने रंजीतपुर चिलबिला की गाटा संख्या-2257 मि. में महज 6 विस्वा बैनामा लेकर वहाँ 15 विस्वा पर काबिज हो गए। 


सिविल कोर्ट से जारी हुआ है,आदेश...

चूँकि बगल में बंजर ग्राम समाज की जमीन खाली थी और पुराना सई नदी का पुल डैमेज हो जाने से सड़क पश्चिम दिशा में खिसक गई तो खंथी वाली एरिया भी हरि प्रताप सिंह को फ्री में मिल गई और वहाँ एक कंज्यूमर पंप को नियम विरुद्ध तरीके से रिटेल आउट लेट में कन्वर्ट कराकर पेट्रोल पंप भी स्थापित हो गई। पेट्रोल पंप के बगल सुजुकी बाइक एजेंसी और एस्कॉर्ट ट्रैक्टर एजेंसी भी खोल लिए। क्या संभव है कि महज 6 विस्वा की जमीन में ये सब खोल पाना। अब बगल में गाटा संख्या-2256 में हरि प्रताप सिंह और उनके भाईयों ने 31 विस्वा का बैनामा कराया और वहाँ भी बंजर नगरपालिका के खाते की जमीन को कब्जा कर लिया। क्योंकि नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ के चेयरमैन के पद पर हरि प्रताप सिंह स्वयं विराजमान थे, तो उन्हें इस नेक कम से कौन रोक सकता ? इतना सब होते हुए भी प्रतापगढ़ का जिला प्रशासन हरि प्रताप सिंह के ऊपर मेहरबान रहता है, उनके खिलाफ एंटी भूमाफिया की केस नहीं रजिस्टर्ड करेगा और न ही कोई कार्रवाई ही करेगा। 


नपाध्यक्ष प्रेमलता सिंह और ईओ मुदित सिंह नहीं बचा पा रहे हैं,अपनी जमीन...

भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह की बात करें तो वह इतने बड़े रसूख वाले राजनीतिक ब्यक्ति हैं कि उनके आगे प्रशासन तो पानी भरता ही है, अदालत भी उनका कुछ नहीं कर पाती। अदालत के फैसले और उसे मानने या न मानने के लिए भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह बाध्य नहीं हैं। उदाहरण के लिए भाजपा नेता सत्तापक्ष के मद में इतने मदमस्त हैं कि सिविल जज सीनियर डिवीजन, प्रतापगढ़ की कोर्ट का स्थगनादेश जारी होने के बाद भी वह अपने एजेंसी का दरवाजा दक्षिण तरफ खोल लिए और न्यायालय के आदेश को धता बता दिए। ऐसे ही अपने ट्रकों को खड़ी करने के लिए पेट्रोल पंप से उत्तर जो बड़ी सी बाउंड्रीवाल बनी है, उसमें भी उत्तर तरफ दरवाजा खोलकर नगरपालिका के खाते की बंजर जमीन पर कब्जा कर लिए हैं। दर्शल भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ की कुर्सी पर वर्ष-1995 से काबिज हैं और नगरपालिका को भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह अपने पिता की समझ बैठे हैं। तभी नगरपलिका की प्रत्येक सम्पत्ति को वह अपनी निजी सम्पत्ति मानते हैं  


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