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गुरुवार, 1 जुलाई 2021

उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल के नाम को कैश करने की फर्नीचर कारोबारी सुनील गोयल कर चुका है,तैयारी

फर्नीचर कारोबारी सुनील गोयल इस बार पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश मुकुल गोयल के डीजीपी बनते ही उनके पद और स्वजातीय नाम को कैश करने के लिए सुनील गोयल अपने समाज के बैनर तले बनाई रणनीति...!!!


मंत्री मोती सिंह और मंत्री महेंद्र सिंह के मंत्री बनने के बाद जिले में प्रथम आगमन पर अपना बंद होटल जिसमें दर्जनों दस लोग जल मरे थे और दो दर्जन से अधिक मरणासन्न हुए थे, उसको खोलने के लिए जगह-जगह बैनर पोस्टर लगाकर सुनील गोयल उनका स्वागत समारोह में शामिल रहा और मौका पाते ही गोयल रेजीडेंसी का पुनः जीर्णोद्धार करके उसका नाम बदलकर जिंजर नाम से खोलने में सफलता हासिल करने वाले सुनील गोयल इस बार अपने ऊपर दर्ज दर्जनों मुकदमों को दफन करने के लिए उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल की तस्वीर के साथ अपनी इमेज लगाकर अपनी इमेज चमकाने के साथ डीजीपी मुकुल गोयल की मख्खनबाजी शुरू कर दी है...

 

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समाज में ऐसे भी लोग होते हैं जो कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते। डिजिटल इंडिया के जमाने में सबकुछ माडर्न हो चुका है। सोशल मीडिया के इस दौर में पब्लिसिटी सिटी पाने की इच्छा 90 फीसदी लोगों में होती है। ऐसे लोगों को छपास रोगी कहा जाता है। ऐसे लोग पहले पब्लिसिटी पाने के लिए पहले अखबार के दफ्तरों में चक्कर लगाते अक्सर दिख जाते थे और उसके लिए समाज सेवा करने का ढोंग करके अखबार में अपनी फोटो और समाचार प्रकाशित कराने के लिए हैरान व परेशान रहते थे। परन्तु सोशल मीडिया में अब छपास रोगी अपने उस छपास रोग का इलाज कोरोना संक्रमण काल की तरह होम आइसोलेशन में रहकर कर लेते हैं। 

कुछ लोग अपना भवकाल बनाने के लिए अपने स्वजातीय अधिकारी नेता मंत्री, विधायक और सांसद के साथ अपनी फोटो लगाकर सोशल मीडिया में उसका प्रचार प्रसार करते हैं। ऐसा करने के पीछे के कारणों में बहुत बड़ा राज़ छिपा होता है। ऐसे लोग उस सम्बन्ध को मौका पाते ही बेंच लेते हैं। अब सम्बन्ध रहता भी है या नहीं ? यह कह पाना मुश्किल रहता है। परन्तु सम्बन्ध रहे या न रहे ये कौन चेक करता है ? स्वजातीय मामले में तो ये खेल बहुत आसानी से किया जा सकता है। स्वजातीय अधिकारी को अपना रिश्तेदार-नातेदार बनाकर उसके पद के अनुरूप उसके सम्बन्ध को बेंचकर खेल करने में कुछ लोंगो को महारत हासिल रहता है। प्रतापगढ़ में फर्नीचर और होटल का ब्यवसायी सुनील गोयल उन्हीं में से एक है। सूबे के डीजीपी की फोटो के साथ अपनी फोटो लगाकर पब्लिसिटी का कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। इससे डीजीपी पद की गरिमा की छति होती है

मजेदार बात यह है कि अभी कल ही उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के पद पर मुकुल गोयल की नियुक्ति हुई और कल ही बैनर बनाकर प्रतापगढ़ के फर्नीचर ब्यवसायी सुनील गोयल सूबे के डीजीपी के साथ फोटो लगाकर अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के बैनर तले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति मुकुल गोयल को उत्तर प्रदेश का डीजीपी बनाने के लिए शुभकामनाएं ज्ञापित कर समाज में यह सन्देश देने की कोशिश की है कि प्रतापगढ़ के होटल और फर्नीचर ब्यवसायी सुनील गोयल का सम्बन्ध उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल से है।इस पोस्टर के बहाने सुनील गोयल इस बार सांसद संगम लाल गुप्ता, विधायक सदर राजकुमार "करेजा पाल", मंत्री महेंद्र सिंह और मंत्री मोती सिंह को पीछे छोड़ उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल के बैनर पोस्टर लगाकर उन्हें भी फर्नीचर के साथ बेंचने की तैयारी कर लिया है  

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