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रविवार, 18 जुलाई 2021

प्रतापगढ़ शहर में चलना हुआ मुहाल, यातायात ब्यवस्था को देखने के लिए जिला प्रशासन के पास नहीं है,कोई योजना

पूरे शहर में पार्किंग की नहीं है कोई ब्यवस्था जिससे लगते हैं,भीषण जाम...!!!

ई-रिक्शे के संचालन के बाद प्रतापगढ़ शहर में बाइक से भी निकलना हो गया दूभर...!!!

प्रतापगढ़ शहर में प्रत्येक चौराहे पर यातायात सुचारू रूप से संचालित करने के लिए लगाये जाते हैं, ट्रैफिक पुलिस ! जिनका रहता है सिर्फ एक उद्देश्य कि चौराहे से गुजरने वाली गाड़ियों का स्मार्ट फोन के जरिये का ई-चालान करके सरकार की तिजोरी भरना...!!!


प्रयागराज-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग प्रतापगढ़ शहर की स्मार्ट सिटी का दृश्य...

उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में राजनीतिक रूप से सबसे स्मार्ट सिटी प्रतापगढ़ है। प्रतापगढ़ के जनप्रतिनधियों की वाणी तो नम्बर एक की है बड़बोला इतना कि सिर से दो फिट बात ऊपर से निकल जाती है यहाँ के सांसद और विधायक एवं मंत्री सबके सब नकारे हैं परन्तु इनके समर्थकों की बात निराली है उनके लिए ये नेता भगवन सरीखे हैं अपने माता-पिता का पैर न छूने वाले इन नेताओं के समर्थक इनके पैर धोकर पी जाने की बात करते हैं।ये कहे तो दिन भर धूप में एक पैर पर खड़े होकर बिता सकते हैं 


प्रतापगढ़ के नेताओं के ब्यक्तिगत विकास और जिले के विकास का तुलनात्मक अध्ययन कर लिया जाए तो जिले का विकास 10फीसदी ही मिलेगा और नेताजी का विकास 100 फीसदी होता है। प्रतापगढ़ जिले में एक नगरपालिका है, जिसमें अभी तक 25 वार्ड रहा और बहुत लड़ते-झगड़ते वर्ष-2020 में नगरपालिका का सीमा विस्तार हुआ 30 वर्ष के बाद जो विस्तार हुआ वह भी राजनीतिक दृष्टिकोण से हुआ। जहाँ भाजपाई मतदाता अधिक हैं, वहाँ का क्षेत्र नगरपालिका में शामिल किया गया और जो शहर सीमा से सटा है उसे विस्तार में नहीं लिया गया। केंद्र सरकार की नगरीय योजना का लाभ प्रतापगढ़ को नहीं मिला जिससे प्रतापगढ़ शहर का विकास बहुत पीछे छूट गया। जिसके एकलौते जिम्मेदार हरि प्रताप सिंह हैं जो वर्ष 1995 से लेकर आज तक नगरपालिका अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए नगरपालिका का सीमा विस्तार नहीं होने दिया और शहर की आबादी को यथावत बनाये रखा  


थर्ड क्लास का जिला है,प्रतापगढ़ और जहाँ यातायात ब्यवस्था हुई धड़ाम...

शहर में एक अदद बाईपास तक अभी नहीं बन सका। पांच वर्ष पहले बाईपास पास हुआ तो आज तक उस पर कार्य शुरू न हो सका। प्रतापगढ़ के नकारे नेताओं की दशा इतना खराब है कि वह किसानों की अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा तक नहीं बंटवा सके भंगवा चुंगी से सई नदी तक अब जाकर नाला निर्माण कार्य शुरू हुआ है वह भी सिनेमा रोड़ से चौक की तरफ सिर्फ पश्चिम दिशा में नाला निर्माण कराया जा रहा है मजेदार बात यह है कि शहर में प्रयागराज-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण प्रस्तावित है बीच सड़क से एक तरफ 43 फिट सड़क और नाला निर्माण कराया जाएगा यानि जो निर्माण अभी नगरपालिका करा रही है वह कल तोड़ दिया जायेगा। मोदी और योगी सरकार में पैसे का दुरूपयोग दुर्भाग्यपूर्ण है। अभी नाले के निर्माण में आवागमन में जो बाधा उत्पन्न हो रही है, वह खत्म होने वाली नहीं है। अभी नाला निर्माण जो हो रहा है वह कुछ ही दिनों में उसे ध्वस्त कर दिया जाएगा। फिर दूसरा निर्माण शुरू होगा। जनता को उसका उपभोग नहीं करने दिया जाएगा   


प्रतापगढ़ चौक घंटाघर का नजारा जहाँ लगता है,अक्सर जाम...

प्रतापगढ़ भी कभी स्मार्ट सिटी बन पायेगी ? यह सवाल प्रतापगढ़ की जनता में सावन माह के बादलों की तरह उमड़ता घुमड़ता रहता है। आज प्रतापगढ़ की दशा जो है उसे देखकर तरस आता है। प्रतापगढ़ में आयेदिन बड़ा-बड़ा खेला यहाँ तैनात नौकरशाह और यहाँ के भ्रष्ट नेता मिलकर कर जाते हैं 60 वर्ष की स्वतंत्रता के बाद सरकार को याद आया कि थर्ड क्लास जनपद प्रतापगढ़ में अभी तक सीवर की ब्यवस्था नहीं है, सो वर्ष-2007 में सीवरेज निर्माण का धन सरकार ने आवंटित किया, परन्तु आज तक प्रतापगढ़ शहर में सीवरेज का संचालन नहीं हो सका । सिसटम में बैठे जिम्मेदारों को कुछ दिखाई ही नहीं देता सीवरेज के नाम पर दिखता है तो सई नदी के किनारे बना मौत का कुआं दिखता है, जिसमें लगी मशीनों को जंग खा लिया है 


NH पर अतिक्रमण कर बनी है,कोतवाली नगर की भंगवा पुलिस चौकी...

आम आदमी को प्रतापगढ़ शहर में निकलना पड़ता है तो वह अक्सर जाम में फंस जाता है सिर्फ तीन किमी की एरिया में फैले प्रतापगढ़ शहर की दशा सबसे बद्तर स्थिति चिलबिला से भगवाचुंगी, भंगवा चुंगी से कचेहरी और कचेहरी से सदर मोड़ और चौक घंटाघर से कचेहरी रोड़ की है पंजाबी मार्केट में यदि गलती से घुस गए तो एड़ी का पसीना चोटी तक होने से कोई रोक नहीं सकता शहर में चारो तरफ जाम का झाम दिख जाता है। यातायात ब्यवस्था को ई-रिक्शा ने इस कदर फेल किया कि अब शहर में बाइक से भी निकलने में डर लगा रहता है कि 5 मिनट के काम में कहीं 2 घंटा न खप जाए  शहर में यातायात ब्यवस्था पूरी तरह से धड़ाम हो चुकी है सिर्फ ब्यवस्था के नाम पर दिखता है तो चौराहे पर खड़े होमगार्ड और ट्रैफिक के सिपाही जिनके हाथों में स्मार्ट फोन रहता है और वह आते-जाते वाहनों का ई-चालान फोटो खींच कर कर देते हैं    

 

यातायात से सरकार का कोष तो भरने का कार्य किया जा रहा है, परन्तु जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए कोई उपाय सिस्टम में बैठे आकाओं के पास नहीं है जब कभी जिले के हाकिम और मंत्री जी जाम के झाम में फंसते हैं तो इनके साथ सुरक्षा में लगे लोग उतर कर निरीह जनता के ऊपर हाथ साफ करते हैं जाम के झाम से जूझते हुए आम आदमी किसी तरह जब घर पहुँचता है तो घर पहुँचते ही उसके मोबाइल पर एक मैसेज आता है कि चौराहे पर बैठे मामा लोग गाड़ी का ई-चालान कर दिए हैं कितना जायज है, प्रतापगढ़ पुलिस का यह ई-चालान ब्यवस्था ? प्रतापगढ़ जैसे थर्ड क्लास की स्मार्ट सिटी की पुलिस भी महान है शहर  भर में कहीं भी पार्किंग की ब्यवस्था नहीं है कामर्शियल काम्प्लेक्स में पार्किंग को उसके मालिकों ने बेंच दिया है अथवा उसे भी किराये पर उठा दिया है। प्रतापगढ़ की जो पुलिस नियम कानून बताकर गाड़ियों का चालान करती है, उसी पुलिस की पुलिस चौकी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण कर बनाई गई है उसका चालान कौन करेगा ? 


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